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एम्स मेडिकल कॉलेज में 9 सीटें रिक्त हैं।
एम्स मेडिकल कॉलेज में 9 सीटें रिक्त हैं।|Social Media
भारत

मध्यप्रदेश के एक्टिविस्ट के कारण एम्स मेडिकल कॉलेज का सच आया सामने

हाल ही में मिली जानकारी से पता चला है कि एम्स मेडिकल कॉलेज की प्रवेश परीक्षा और काउंसलिंग की प्रक्रिया खत्म होने के बाद भी 9 सीटें रिक्त हैं

रवीना शशि मिंज

राज एक्सप्रेस। AIIMS यानी अखिल भारत आयुर्विज्ञान संस्थान ( एम्स) में मेडिकल की पढ़ाई करना हर उस विद्यार्थी का सपना है जो डॉक्टर बनने का ख्वाब देखता है। विद्यार्थी एम्स मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए रात-दिन एक कर देते हैं। लेकिन ऐसे मेहनतकश विद्यार्थियों की उम्मीद तब टूटती है जब उनकी मेहनत पर कोई पानी फेर देता है।

हाल ही में मिली जानकारी से पता चला है कि एम्स मेडिकल कॉलेज की प्रवेश परीक्षा और काउंसलिंग की प्रक्रिया खत्म होने के बाद भी 9 सीटें रिक्त हैं।

इस भूल के लिए विद्यार्थी किसे कसूरवार ठहराए?

क्या है पूरा मामला

आप को बता दें एम्स मेडिकल कॉलेज की प्रवेश परीक्षा 25 और 26 मई को हुई थी। मध्यप्रदेश नीमच जिले के एक्टिविस्ट चंद्रशेखर गौड़ के बेटे भी प्रवेश परीक्षा में सम्मिलित थे, और उन्हें आशंका थी कि काउंसलिंग और मॉप-अप राउंड के बाद भी सीटें खाली हो सकती हैं। इसी कारण उन्होंने 12 सितंबर को एम्स से सीटें भरे जाने के संदर्भ में जानकारी मांगी।

एम्स की ओर से गौड़ को दी गई जानकारी में पता चला कि, एम्स काउंसलिंग प्रक्रिया 26 अगस्त, 2019 को पूरी हो गई है। काउंसलिंग के समय तक कोई भी सीट रिक्त नहीं थी। उसके बाद देशभर के एम्स मेडिकल कालेजों में नौ सीटें खाली रह गईं।

साथ ही एम्स ने सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के एक नियम के अनुसार दाखिले की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2019 थी। इसलिए ये सीटें अभी भी खाली पड़ी हैं।

जानकारों का है कहना

सीटें खाली होने के संबंध में जानकारों का कहना है कि क्वालिफाइड विद्यार्थी कांउसलिंग में एडमिशन की प्रक्रिया पूरी करते हैं और आखिर में मुकर जाते हैं। ऐसी स्थिति में कांउसलिंग के आखिरी दिन तक सीटें भरी दिखाई देती हैं। और बाद में रिक्त रह जाती हैं।

जानकारों का ये भी कहना है कि “ये नौ सीटें इस पूरे पाठ्यक्रम के दौरान खाली रहेंगी, इस तरह एम्स में हर साल तैयार होने वाले चिकित्सकों के मुकाबले नौ चिकित्सक कम होंगे।“

इन कॉलेजों में सीट खाली

देश में एम्स के मेडिकल कॉलेज नई दिल्ली, भोपाल, भुवनेश्वर, जोधपुर, रायपुर, ऋषिकेश, पटना, नागपुर, मंगलागिरि, भठिंडा, देवगढ़, गोरखपुर, कल्याणी, रायबरेली, तेलंगाना सहित कुल 15 स्थानों पर हैं।

जिस एम्स मेडिकल कॉलेज में रिक्त सीट हैं वो हैं -

बठिंडा (एक)

देवगढ़ (दो)

नागपुर (एक)

पटना (दो)

रायबरेली (दो)

रायपुर (एक)

देशभर के एम्स मेडिकल कॉलेज में कुल सीटें

सामान्य वर्ग के लिए 584, सामान्य (पीडब्ल्यूडी) 28, अन्य पिछड़ा वर्ग 311, अन्य पिछड़ा वर्ग (पीडब्ल्यूडी) 14, अनुसूचित जाति 172, अनुसूचित जाति (पीडब्ल्यूडी) 8, अनुसूचित जनजाति 83 और 5 अनुसूचित जनजाति (पीडब्ल्यूडी)। इन सबको मिलाकर देशभर के एम्स में कुल1205 सीटे हैं।

आरटीआई एक्टिविस्ट गौड़ की जुबानी

आरटीआई एक्टिविस्ट गौड़ का कहना है, “एम्स मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए विद्यार्थी कठिन प्रतिस्पर्धा से गुज़रते हैं। वो इसके लिए बहुत मेहनत करते हैं। उनका सपना होता है एम्स जैसे संस्थान में एडमिशन मिलना।

"एम्स को खाली पड़ी सीटों को भरने के लिए सुप्रीम कोर्ट में यह अपील करनी चाहिए कि ये सभी सीटें पूरे साढ़े पांच वर्ष खाली ही रहेंगी, जिससे छात्र एवं संस्थान दोनों को नुकसान होगा। इसलिए विशेष परिस्थिति में इन सीटों को भरने की अनुमति दी जाए।”

एम्स की रिक्त सीटों को भरने के संबंध में गौड़ ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में जब सरकारों द्वारा दूसरे अन्य पाठ्यक्रमों में सितंबर माह में भी खाली सीटों को भरने के लिए विशेष प्रयास एवं मॉपअप राउंड वगैरह आयोजित किए गए हैं, तब एम्स की सीटें खाली छोड़ देना बेहद चिंताजनक है।