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उड़ने से डूबने की ओर 'एअर इंडिया' की कहानी

देखा जाए तो एअर इंडिया कई सालों से अपने कर्ज की लंबी दास्तां का रोना रो रही है। वहीं सरकार अभी भी स्थिति बेहतर होने का इंतजार कर रही है, लेकिन एअर इंडिया के हालात तो कुछ और ही बता रहे हैं।

Megha Sinha

राज एक्सप्रेस। एअर इंडिया कई सालों से अपनी कर्ज की लंबी दास्तां को लेकर सुर्खियों में है। हर साल सरकार कोई न कोई बहाना बताती है एअर इंडिया की माली हालत बिगड़ते रहने की। पिछले कई सालों से लगातार ही एअर इंडिया नुकसान झेल रहा है। वहीं इस साल भी अधिकारियों के मुताबिक जून की तिमाही में सिर्फ पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद होने की वजह से एअर इंडिया को 175 से 200 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग लॉस हुआ है।

सरकार कई बार एअर इंडिया को बेचने की कोशिश कर चुकी है, जबकि पूरे देश की कई एयरलाइंस घाटे में जाती हैं लेकिन एअर इंडिया जो कि सरकारी एयरलाइंस हैं उसे बार-बार बेचने को लेकर सरकार दबाव में है और अब सरकार उसकी 100% हिस्सेदारी बेचने को तैयार है। बात करें एअर इंडिया की हिस्ट्री की तो शुरुआत में एअर इंडिया की हालत काफी अच्छी रही थी। कंपनी ने अच्छी पूंजी कमायी थी जबकि पिछले कुछ सालों से एअर इंडिया बुरी तरह से कर्ज में डूब रही है। वहीं मौजूदा कर्ज की बात करें तो एयर इंडिया पर कुल 58,000 करोड़ का कर्ज है।

इस साल भले हीं बालाकोट स्ट्राइक और अनुच्छेद 370 की वजह से एयरलाइंस ने भारी नुकसान उठाया हो, लेकिन पिछले कई सालों से जो हालात एअर इंडिय़ा झेल रहा है उसके कारण बहुत हैं।

आइए नजर डालते हैं कुछ प्रमुख कारणों पर कि, आखिर किस वजह से ऐसे पिट रही है एअर इंडिया -

1. सरकार का लापरवाह रवैया:

· अन्य सरकारी विभागों की तरह ही एअर इंडिया को भी एक सरकारी विभाग जैसा बना दिया गया। एक तरफ जहां सभी एयरलाइंस अपनी प्रॉफेशनल रवैये की वजह से मुनाफा कमा रहीं हैं तो वहीं एअर इंडिया सरकारी कुव्यवस्था और अंदरूनी गड़बड़ी के कारण हर साल कर्ज का रोना रो रही है। देखा जाए तो एअरइंडिया पर अब तक 58,000 करोड़ का कर्ज है, तो वहीं सरकार पिछले 4 से 5 सालों में एअरइंडिया में 25 हजार करोड़ का लागत लगा कर डुबा चुकी है।

· बहाली में अनियमितता का कारण भी इसे डुबाने में महत्वपूर्ण रहा है। जहां बाकि सारी निजी एयरलाइंस जैसे इंडिगो, स्पाइस जैट, व अन्य में बहाली को लेकर एक प्रॉफेशनल तरीका अपनाया जाता है, बेहतर से बेहतर सर्विस दी जाती है वहीं एअरइंडिया प्रॉफेशनल लेवल पर बिल्कुल जीरो रहा। सरकार ने कभी इस पर ध्यान ही नहीं दिया।

· सन् 1994 में प्राइवेट एयरलाइंस को इंडिया में आने की अनुमति मिल गयी थी वहीं साल 2007 तक सारी प्राइवेट एयरलाइंस एअरइंडिया को कड़ी टक्कर देने लगी । चाहे रेट्स हो, कस्टमर सर्विस हो या कस्टमर केयर रिलेटड सवाल हो, प्राइवेट एयरलाइंस हर तरह से बेहतर थी। सरकार ने इस कॉम्पटिशन को देखते हुए किसी भी प्रकार का कोई प्रॉफेशनल रवैया नहीं अपनाया, जिसकी वजह से एअरइंडिया की दुर्गति होती चली गयी।

· वहीं साल 2007 में जब एअरइंडिया और इंडियन एयरलाइंस को मर्ज किया गया तो एक साल के अंदर ही 2009 में एअरइंडिया को सबसे बड़ा 7 हजार 200 करोड़ का नुकसान हुआ।

· क्योंकि दोनों ही कंपनी के काम करने का तरीका अलग था, जहां एक नेशनल रूट पर काम कर रही थी तो वहीं दूसरी इंटरनेशनल रूट पर काम कर रही थी। दोनों ही कंपनी की पॉलीसी, कस्टमर सर्विस सब अलग थी जिसके कारण स्टाफ परेशान होते चले गए। वहीं मैन पॉवर गिरने से स्टाफ डिसप्यूट होना भी कंपनी को और ज्यादा घाटे में ले गया।

· इसी दौरान ईंधन के बढ़ते दामों ने एअरइंडिया के पसीने छुड़ा दिए। जो प्लेन उड़ानें भर रही थी उसका मैंटेनेंस कॉस्ट काफी ज्यादा होने लगा जिसका पूरा असर मैन पॉवर पर पड़ा और इसके विकल्प में भी सरकार ने कुछ खास ध्यान नहीं दिया।

· वहीं सरकार बार-बार प्राइवेटाइजेशन और एअर इंडिया को बेचने की ही बात करती रही।

2. यात्रियों की शिकायत अनदेखी करना

· एअरइंडिया में सफर करने वाले कई यात्री बार-बार यात्री सुविधा को लेकर शिकायत करते रहे लेकिन कंपनी प्रबंधक ने उनकी शिकायतों को लेकर कोई खास कदम नहीं उठाया।

· विमान की तकनिकी समस्या से परेशान हो रहे यात्री तो कहीं अंदर का मैनेजमेंट खराब होना, खराब खाना व अन्य कई शिकायत रहीं।

3. नेताओं का बकाया

· एअरइंडिया की दुर्गति में कहीं न कहीं नेताओं ने भी अहम भूमिका निभायी है।

· वहीं आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक एअरइंडिया का केंन्द्र सरकार पर लगभग 452 करोड़ रूपये का बकाया है। हमारी सरकार जैसे प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, या उनके सरकारी मुलाजिम जैसे हमारे अन्य नेताओं को ले जाने वाली वीआईपी उड़ानों का बकाया है।

. एअर इंडिया के कर्मचारियों से नेताओं के दुर्व्यहार के किस्से भी मशहूर हैं।

· जिस प्रकार सरकार ने हर चीजों को सही करने के लिए कई सारी पहल की थी या पहल कर रहे हैं, वहीं अगर थोड़ा सा ध्यान उनका एअर इंडिया विमान सेवा पर भी जाता तो शायद आज एअर इंडिया का ब्यौरा ऐसा नहीं होता।

अभी मौजूदा हालात में 58,000 करोड़ की कर्ज में डूबी है कंपनी। जबकि कर्ज की भरपायी करने के लिए हर साल कंपनी को 4,000 करोड़ रूपये खर्च करने पड़ रहे हैं।

साल 2018 में एयरलाइंस की मौजूदा हालत सही करने के लिए सरकार ने विदेशी निवेश को भी मंजूरी दी, जिसके मुताबिक अब विदेशी कंपनिया इस एयरलाइंस में 49% निवेश कर सकती थी। जिसके बाद सरकार के इस कदम से एअर इंडिया के मौजूदा हालात के सही होने की उम्मीद की जा रही थी, वहीं इस साल हुए बालाकोट स्ट्राइक और अनुच्छेद 370 ने फिर से एअर इंडिया की बैंड बजा दी है। हालत सुधारने की उम्मीद और न जाने ऐसी कितनी उम्मीदें वर्षों से की जा रही हैं। ये तो हमारी सरकार का पैशेंस है कि उन्हें अभी भी लगता है कि एअरइंडिया फिर से प्रॉफिट कमा पाएगी, पर अगर एअर इंडिया का इतिहास देखें तो जवाब आप सभी के सामने है।