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सर्वोच्च न्यायालय में सीएए के खिलाफ दायर तमाम याचिकाओं की सुनवाई जनवरी में होनी तय है।
सर्वोच्च न्यायालय में सीएए के खिलाफ दायर तमाम याचिकाओं की सुनवाई जनवरी में होनी तय है।|सर्वोच्च न्यायालय, भारत
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CAA के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में दायर हुई एक और याचिका

ACPR ने CAA के खिलाफ दायर की याचिका में दावा किया है कि यह कानून असंवैधानिक है और बाल अधिकारों का हनन करता है। सर्वोच्च न्यायालय में सीएए के खिलाफ दायर तमाम याचिकाओं की सुनवाई इस माह में होनी है।

प्रज्ञा

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राज एक्सप्रेस। 'नागरिकता संशोधन अधिनियम' के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में एक और याचिका दायर की गई है। ये याचिका एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (ACPR) नाम की गैर-सरकारी संस्था ने दायर की है। उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून के साथ नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 3(1) को भी चुनौती दी है। इस धारा के मुताबिक, अलग-अलग समय में भारत में जन्मे लोगों के लिए नागरिकता के अलग-अलग नियम हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, वकील एज़ाज मकबूल के माध्यम से दायर इस याचिका के याचिकाकर्ता ने नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019, नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 3(1) और नागरिकता अधिनियम 1955 की तीसरी अनुसूची को असंवैधानिक करार दिया है।

एसीपीआर द्वारा दायर इस याचिका में बच्चों के अधिकारों पर जोर दिया गया है। कहा गया है कि, इसके प्रावधान ऐसे हैं कि कुछ बच्चों को किसी भी जगह की नागरिकता नहीं मिल पाती और ऐसा करना संयुक्त राष्ट्र के मूल्यों और सिद्धांतों का उल्लंघन है। साथ ही नागरिकता से बाहर किए गए बिना देश के बच्चों के साथ होने वाला व्यवहार संयुक्त राष्ट्र बाल कोष(यूनिसेफ) के तहत बच्चों के अधिकारों का हनन है। जिसके लिए भारत ने भी हस्ताक्षर किए हैं।

इससे पहले भी नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ अलग-अलग लोगों द्वारा कई याचिकाएं दायर की गई हैं। सर्वोच्च न्यायालय में इस कानून के खिलाफ दायर हुई एक याचिका पर 1000 से भी अधिक वैज्ञानिकों और स्कॉलर्स ने हस्ताक्षर किए हैं। पश्चिम बंगाल के कृष्णनगर से सांसद महुआ मोइत्रा, एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी और ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन ने भी इस कानून के खिलाफ याचिका दायर की है। संयुक्त राष्ट्रसंघ ने इस कानून को धार्मिक भेदभावपूर्ण बताया है जो कि, भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान के खिलाफ है।

कांग्रेस नेता सैयद निज़ामुद्दीन, हैदाराबाद कांग्रेस अल्पसंख्यक कमेटी के समीर वलीउल्लाह और कुछ अन्य लीगल एक्सपर्ट्स ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हैदाराबाद से 5000 याचिकाएं दायर करने का ऐलान किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैयद निज़ामुद्दीन ने कहा कि, 'सीएए के खिलाफ कुल 1,00,000 याचिकाएं दायर की जानी चाहिए। इनमें से 50,000 हैदाराबाद से दायर की जाएंगी।'

उन्होंने यह भी बताया कि, इन याचिकाओं का पूरा खर्च उनकी टीम उठाएगी। जो भी व्यक्ति नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ याचिका दायर करना चाहता है, वो उनसे सम्पर्क कर सकता है। उन्होंने इसके लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। इसके लिए हैदराबाद में एक काउंटर लगाया गया है, जहां पर लोगों को कानूनी मदद मुहैया कराई जाएगी। इन याचिकाओं को 5 जनवरी को फाइल किया जा सकता है।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सभी याचिकाओं पर केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इन याचिकाओं की सुनवाई जनवरी 2020 में होनी है।

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