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Arun Jaitley and Narendra Modi
Arun Jaitley and Narendra Modi|संपादित तस्वीर
भारत

असली संकट मोचक या चाणक्य थे जेटली

अरूण जेटली के निधन पर PM नरेंद्र मोदी ने अपनी शोक संवेदना में बहुत सारी बातें कहीं मगर उन्होंने माना कि, वे वाकई संकट मोचक थे। उनमें निर्णय क्षमता इतनी प्रबल थी, जिससे उन्हें चाणक्य कहना गलत नही है।

Sushil Dev

राज एक्सप्रेस। अरूण जेटली के निधन पर वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी शोक संवेदना में बहुत सारी बातें कहीं मगर उन्होंने माना कि, वे वाकई संकट मोचक थे। उनमें निर्णय क्षमता इतनी प्रबल और कुषाग्र थी, जिसकी वजह से उन्हें चाणक्य कहना भी गलत नही होगा। मोदी सरकार की कैबिनेट में वह हमेशा पढ़े लिखे और विद्वान मंत्री रहे। पिछले तीन दशक से अधिक समय तक अपनी तमाम तरह की काबिलियत के चलते जेटली लगभग हमेशा सत्ता तंत्र के पसंदीदा लोगों में रहे चाहे सरकार जिसकी भी रही हो।

उत्कृष्ट रणनीतिकार थे जेटली :

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे जेटली सौम्य, सुशील, अपनी बात स्पष्टता के साथ कहने वाले और राजनीतिक तौर पर उत्कृष्ट रणनीतिकार थे। कहते हैं कि, जेटली भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए मुख्य संकटमोचक थे, जिनकी चार दशक की शानदार राजनीतिक पारी स्वास्थ्य बिगड जाने की वजह से बर्बाद हो गई। बता दें कि, खराब सेहत के चलते प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दूसरी बार बनी सरकार से खुद को बाहर रखने वाले 66 वर्षीय जेटली का शनिवार को राजधानी नई दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी की शिकायत के बाद उन्हें नौ अगस्त को यहां भर्ती कराया गया था।

कहा जाता है कि, मसला कोई भी हो, जेटली मोदी की बीरबल की तरह काम करते थे। यानी उनके पास हर र्म का इलाज था। यही कारण है कि मोदी सरकार में असली चाणक्य उन्हें ही कहा जाता था। वह हर जटिल मसले पर सर्वसम्मति बनाने में माहिर थे। पार्टी भी उन्हें मोदी का असली चाणक्य मानती थी। वह 2002 से मोदी के लिए मुख्य तारणहार साबित होते रहे जब तत्कालीन मुख्यमंत्री पर गुजरात दंगे के काले बादल मंडरा रहे थे। जेटली न सिर्फ मोदी बल्कि अमित शाह के लिए भी उस वक्त में मददगार साबित हुए, जब उन्हें गुजरात से बाहर कर दिया गया था। अमित शाह को उस वक्त अक्सर जेटली के कैलाश कॉलोनी दफ्तर में देखा जाता था और दोनों हफ्ते में कई बार साथ भोजन करते देखे जाते थे।

2014 में नरेंद्र मोदी को भाजपा के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने की औपचारिक घोषणा से पहले के कुछ महीनों में जेटली ने राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान और नितिन गडकरी को साथ लाने के लिए पर्दे के पीछे बहुत चौकस रह कर काम किया।

मोदी ने अनमोल हीरा बताया :

हालांकि मोदी ने जेटली के निधन के बाद उनके प्रशंसा के पुल बांध दिए मगर जब उन्होंने यह कहा जेटली एक अनमोल हीरा थे, तब पार्टी के अन्य लोगों को इसका अहसास हुआ कि, वह मोदी के कितने खास थे। पेशे से वकील रहे जेटली अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री थे और जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने अरुण शौरी और सुब्रमण्यम स्वामी की दावेदारी को अनदेखा करते हुए, उन्हें वित्त मंत्रातय का महत्वपर्ण दायित्व सौंपा। सरकार में जेटली की उपयोगिता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता था कि, जब तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की सेहत बिगड़ी तो उन्हें ही मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।

दाव-पेंच में भी माहिर :

कहते हैं कि, अरूण जेटली सत्ता चलाने के लिए विभिन्न प्रकार के दाव-पेंचों में भी माहिर थे। जेटली 1990 के दशक के अंतिम सालों के बाद से नई दिल्ली में मोदी के भरोसेमंद बन चुके थे और बीते कुछ सालों में, खासकर गुजरात में 2002 के दंगों के बाद, अदालती मुश्किलों को हल करने वाले कानूनी दिमाग से आगे बढ़ कर वह उनके मुख्य सलाहकार, सूचना प्रदाता और उनके प्रमुख पैरोकार बन चुके थे। अपने बहुआयामी व्यक्तित्व, अनुभव और कुशाग्रता के चलते मोदी सरकार के पहले कार्यकाल (2014 से 2019) में जेटली लगभग हर जगह छाए रहे। सरकार की उपलब्धियां गिनाने का मामला हो या सरकार के विवादित फैसलों के बचाव का या फिर विपक्ष पर आक्रामक हमला बोलने की बात हो या 2019 के चुनाव अभियान के लिए स्थिरता या अव्यवस्था के बीच चुनने की परीक्षा का विमर्श तय करना हो, जेटली की भूमिका हर मामले में महत्वपूर्ण थी।

देश-विदेश के मामले हों या जीएसटी से लेकर राफेल जैसे मुददों पर भी हमेशा सरकार का बचाव किया। वह 90 के दशक से जितने प्रधानमंत्री मोदी के करीबी थे उतना ही अधिक उनका मीडिया से भी लगाव था। मीडिया उ,नके पास जाए और कोई खबर न मिले ऐसा बहुत ही कम होता था। उन्होंने स्वयं डीयू से राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी।