केन्द्र और राज्य, प्रवासियों के रैपिड टेस्ट को लेकर जवाब दे:हाईकोर्ट
केन्द्र और राज्य, प्रवासियों के रैपिड टेस्ट को लेकर जवाब दे:हाईकोर्ट|Kratik Sahu-RE
भारत

केन्द्र और राज्य, प्रवासियों के रैपिड टेस्ट को लेकर जवाब दे:हाईकोर्ट

कोरोना संक्रमण संबंधी जांच के मामले में केन्द्र एवं राज्य सरकार की नज़रअंदाजगी को लेकर उच्च न्यायालय ने उनसे टेस्ट किटों की उपलब्धता एवं प्रवासियों की जांच को लेकर सोमवार तक जवाब मांगा है।

राज एक्सप्रेस

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राजएक्सप्रेस। उत्तराखंड आने वाले लाखों प्रवासी श्रमिकों एवं अन्य लोगों की कोरोना संक्रमण संबंधी जांच के मामले में केन्द्र एवं राज्य सरकारें गंभीर नजर नहीं आ रही हैं और उन्होंने शुक्रवार को इस मामले में उच्च न्याायलय में संतोषजनक जवाब पेश नहीं किया है।

दूसरी ओर याचिकाकर्ता की ओर से उच्च न्यायालय को बताया गया कि देश में कोरोना की जांच के लिये एंटीबॉडी रैपिड टेस्ट किट उपलब्ध हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की ओर से उन्हें मान्यता दी गयी है। इसके बाद उच्च न्यायालय ने केन्द्र एवं राज्य सरकार को निर्देश दिया कि टेस्ट किटों की उपलब्धता एवं प्रवासियों की जांच को लेकर सोमवार तक जवाब दाखिल करे।

केन्द्र एवं राज्य सरकार की ओर से आज अदालत को बताया जाना था कि उत्तराखंड आने वाले सभी प्रवासियों की कोरोना संक्रमण से संबंधित जांच की जा सकती है या नहीं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शिव भट्ट ने बताया कि दोनों सरकारों की ओर से अदालत में इच्छाशक्ति की कमी महसूस की गयी और दोनों ने इस मामले में अदालत में कोई ठोस जवाब नहीं दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि देश में कोरोना महामारी की जांच के लिये दस भारतीय उत्पादकों की ओर से एंटीबॉडी रैपिड टेस्ट किट तैयार की गयी हैं और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ओर से उन्हें मान्यता मिली हुई है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि परिषद ने 14 मई को एक अधिसूचना जारी कर इसकी जानकारी दी है।

परिषद की वेबसाइट पर उसकी पूरी जानकारी उपलब्ध है। इन किट्स से आधे घंटे में जांच परिणाम संभव है। इन किटों से बाहर से आने वाले प्रवासियों की राज्य की सीमा पर ही इसकी जांच की जा सकती है। केन्द्र सरकार ने दो वितरक कंपनियों के लाइसेंस निरस्त किये हैं। इसके अलावा याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि राहत शिविरों की जांच के लिये अदालत की ओर से नियुक्त कोर्ट कमिश्नरों एवं स्वयं सेवकों को जिलाधिकारियों की ओर से सहयोग नहीं किया जा रहा है।

भट्ट ने बताया कि इसके बाद न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और रवीन्द्र मैठाणी की युगलपीठ ने केन्द्र एवं राज्य सरकार से पूछा है कि ये टेस्ट किट जांच के लिये कब तक उपलब्ध हो जायेंगी और प्रवासियों की जांच में उपयोग होंगी या नहीं।

इसके अलावा श्री भट्ट ने बताया कि अदालत ने प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिये हैं कि वे यह सुनिश्चित करे कि अदालत की ओर से नियुक्त सभी कोर्ट कमिश्नरों को अधिकारियों की ओर से सहयोग किया जाये। इस मामले में अगली सुनवाई 18 मई को होगी।

अदालत ने ये निर्देश याचिकाकर्ता सचिदानंद डबराल की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिये हैं। याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि उत्तराखंड में दो लाख से अधिक प्रवासी उत्तराखंड लौट रहे हैं। प्रवासियों के चलते प्रदेश की जनता में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। सरकार की ओर से थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है जो कि पर्याप्त नहीं है।

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