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जेएनयू कैंपस में तोड़फोड़ की तस्वीरें
जेएनयू कैंपस में तोड़फोड़ की तस्वीरें|सोशल मीडिया
भारत

जेएनयू हमले में दायर हुई एफआईआर, घायल छात्र हुए डिस्चार्ज

रविवार 5 जनवरी की शाम करीब 50 लोगों ने जेएनयू कैंपस में घुसकर लाठी, डंडो, रॉड्स से छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया, कैंपस में तोड़फोड़ की। हमले में जेएनयूएसयू प्रसिडेंट बुरी तरह घायल हुई हैं।

प्रज्ञा

प्रज्ञा

राज एक्सप्रेस। भारत की राजधानी दिल्ली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के बाद अब जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में रविवार 5 जनवरी की शाम करीब 50 नकाबपोश लोगों ने छात्रों व शिक्षकों पर हमला किया। हमलावरों में लड़कियां भी शामिल थीं। आरोपियों ने बच्चों के साथ बुरी तरह मार-पीट की, हॉस्टल में तोड़फोड़ की, वहां खड़ी कारों को क्षतिग्रस्त कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले में कुल 34 लोग घायल हुए। इन्हें दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया कि, ये सभी लोग आज सुबह डिस्चार्ज हो गए हैं। साथ ही हमले के सम्बन्ध में पुलिस ने एफआईआर दर्ज़ कर ली है।

दिल्ली पुलिस ने कल रात बताया था कि, सभी घायलों की स्थिति खतरे से बाहर है। घायल छात्रों ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर मारपीट का आरोप लगाया। वहीं, एबीवीपी नेताओं ने वामपंथी छात्रों पर हमले का आरोप लगाया है। उनके कुछ कार्यकर्ता भी अस्पताल में भर्ती हैं।

इस हमले में जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष बुरी तरह घायल हुई हैं। जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष का जो वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है, उसमें वे कहती हैं कि 'मेरे ऊपर बर्बर तरीक़े से हमला हुआ है। हमलावर नक़ाबपोश थे। देखिए कैसे ख़ून निकल रहा है। मुझे बुरी तरह से मारा गया है।'

इस घटना के दौरान कैंपस में पत्रकारों के साथ भी मारपीट हुई। घटना के कई वीडियोज़ सामने आए हैं। फिलहाल जेएनयू के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। जेएनयू शिक्षक संघ ने घटना की निंदा करते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, घटना के एक दिन बाद गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली के राज्यपाल अनिल बैजल से बात की और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों से बात करने का ज़िक्र किया।

कई छात्र इस हमले से डर और सदमे में हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई लोगों के पोस्ट सामने आ रहे हैं। जेएनयू से मास्टर्स कर रही एक विद्यार्थी ने अपनी पहचान ज़ाहिर न करने की शर्त पर कहा, 'मैं विश्वविद्यालय से बाहर थी। वॉट्सएप पर आए मैसेजेस से मुझे कैंपस का हाल पता चला। मुझे समझ नहीं आया कि क्या करना चाहिए पर मेरी हिम्मत नहीं हुई कि मैं वापस कैंपस चली जाऊं। पता नहीं यह क्या हो रहा है और कब तक हमें ऐसे डर के माहौल में जीना पड़ेगा। कैंपस तो छात्रों की सुरक्षा के लिए होते हैं, अगर वहीं उन पर हमला होगा तो हम कहां जाएंगे?'

जेएनयू में क्या हो रहा है?

बुधवार 1 जनवरी, 2020 से जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय का शीतकालीन सत्र शुरू हुआ। नए सत्र के लिए छात्रों का रजिस्ट्रेशन चल रहा है। यहां पढ़ने वाला एक समूह इस बात का विरोध कर रहा है। शुक्रवार 3 जनवरी को विरोध करने वाले छात्रों ने कम्युनिकेशन एंड इन्फॉर्मेशन सर्विसेज कैंपस में घुसकर इंटरनेट सर्वर को खराब कर दिया। जिससे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया रुक गई। इन छात्रों की पहचान कर ली गई थी।

शनिवार 4 जनवरी को दोबारा रजिस्ट्रेशन शुरू हुए। छात्रों के एक समूह ने इस बार इंटरनेट के साथ-साथ बिजली सप्लाई भी रोक दी। विरोध करने वाले छात्रों ने कुछ इमारतों पर ताला भी लगाया। रविवार 5 जनवरी की शाम लगभग 4.30 बजे जब रजिस्ट्रेशन करवा चुके कुछ छात्र अपने हॉस्टल की ओर जा रहे थे तो कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की। इसके बाद देर शाम करीब 50 नकाबपोश लोगों ने पेरियार और साबरमती हॉस्टल में घुसकर, लाठी, रॉड और डंडों से छात्रों पर हमला किया। कई छात्रों पर धारदार हथियार से भी वार किया गया।

जेएनयू प्रशासन ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि, वो उस हर छात्र के साथ खड़ा है जो शांतिपूर्ण तरीके से अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि, नियमों का उल्लंघन करते हुए कैंपस के शांतिपूर्ण शैक्षणिक माहौल को बाधित करने वालों को बख़्शा नहीं जाएगा। साथ ही अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी गई है।

हमले के अगले दिन 6 जनवरी की सुबह जेएनयू के उप-कुलपति एम. जगदीश कुमार ने कहा कि, 'हम पढ़ाई जारी रखने वाले हर छात्र के साथ हैं। विश्वविद्यालय का मुख्य लक्ष्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों की रक्षा करना है।'

इस सबके बाद रविवार रात जेएनयू में इस हमले का भारी विरोध हुआ। दिल्ली के स्थानीय लोगों ने जेएनयू के मुख्य दरवाज़े पर पहुंच कर विरोध प्रदर्शन किया तो वहीं जेएनयू के विद्यार्थियों ने मार्च निकाला।

इसके साथ ही आईटीओ स्थित दिल्ली मुख्यालय के बाहर भी इस घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ।

वहीं कई राजनेता और प्रख्यात लोग भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। स्वराज पार्टी के नेता योगेंद्र यादव भी जेएनयू पहुंचे। यहां उनके साथ भी मार-पीट की गई। उन्होंने ट्वीट कर बताया कि कल रात तीन बार उन पर हमला किया गया-

जेएनयू में हुए हमले की खबर पूरे देश में पहुंची और कई स्थानों में जेएनयू के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया गया। मुम्बई के गेटवे ऑफ इंडिया पर हज़ारों की तदाद में विद्यार्थी और आम जन पहुंचे और जेएनयू पर हुए हमले के खिलाफ, विरोध प्रदर्शन किया।

वहीं अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी भी जेएनयू के समर्थन में उतरा और उन्होंने हिंसा के खिलाफ, विरोध प्रदर्शन किया।

फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे में भी जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में हुई हिंसा के खिलाफ, विरोध प्रदर्शन हुआ। एफटीआईआई के छात्रों ने जेएनयू के समर्थन में नारे लगाए।

समाचार एजेंसी पीटीआई ने दिल्ली पुलिस के हवाले से कहा है कि जेएनयू कैंपस में फ़्लैग मार्च किया गया है और स्थिति नियंत्रण में है। वहीं, मानव संसाधन मंत्रालय ने जेएनयू रजिस्ट्रार से कैंपस की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। गृह मंत्रालय ने देर रात ट्वीट किया कि, गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से जेएनयू हिंसा पर बातचीत कर उन्हें आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्री ने संयुक्त पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारी से इस मामले की जांच कराने के आदेश दिए हैं और जल्द से जल्द रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा है।

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