भाजपा ने सीएए के समर्थन के लिए जारी किया टोल फ्री नंबर
भाजपा ने सीएए के समर्थन के लिए जारी किया टोल फ्री नंबर|भाजपा, ट्विटर
भारत

सीएए का समर्थन करने के लिए इस टोल-फ्री नंबर पर दें मिस्ड कॉल

नागरिकता संशोधन अधिनियम के लिए भाजपा ने एक नया कदम उठाया है। लोगों में इसके समर्थन को दिखाने के लिए जारी किया टोल फ्री नंबर, जिस पर मिस्ड कॉल देकर कोई भी इस कानून के प्रति समर्थन व्यक्त कर सकता है।

प्रज्ञा

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राज एक्सप्रेस। लगभग 20 दिनों से नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) भारत में चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां इसे पारित होने के पहले से ही विरोध झेलना पड़ रहा है, वहीं अब सरकार और उसके समर्थक इस कानून के समर्थन में सामने आ रहे हैं। कई राज्यों में सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए तो वहीं कई लोगों ने इसके समर्थन में भी रैलियां निकालीं।

सरकार ने भी शहर-शहर जाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लोगों में इस कानून के बारे में जागरूकता लाने का काम किया। उनका दावा रहा कि विपक्ष लोगों में सीएए के खिलाफ भ्रम फैला रहा है और वही लोग इसका विरोध कर रहे हैं जो इसके बारे में सही जानकारी नहीं रखते। जबकि, विरोध प्रदर्शनों में बड़े इतिहासकारों से लेकर फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर लोग भी शामिल हैं। वहीं 1000 से भी अधिक वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों नें इसके खिलाफ भारत के सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। जिसकी सुनवाई जनवरी 2020 में होगी।

अब सरकार सीएए के लिए जनसमर्थन जुटाने की कवायद में जुट गई है। केन्द्र में सत्तारूढ़ दल भाजपा ने एक एक टोल फ्री नंबर जारी किया है। इस नंबर पर मिस्ड कॉल देकर लोग नागरिकता संशोधन अधिनियम के लिए समर्थन व्यक्त कर सकते हैं। भाजपा 5 जनवरी 2020 से दस दिवसीय जनसम्पर्क अभियान शुरू करने जा रही है। भाजपा महासचिव अनिल जैन ने समाचार एजेंसी भाषा को बताया था कि,

'टोल फ्री नंबर शुक्रवार को जारी किये जाने की उम्मीद है ताकि लोग सीएए पर अपना समर्थन व्यक्त कर सकें। इस कानून के तहत धार्मिक प्रताड़ना के कारण पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के ऐसे अल्पसंख्यकों को नागरिकता का पात्र बनाया गया है जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए हैं।'

अनिल जैन ने यह भी बताया कि, केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह रविवार को एक परिवार के यहां भी जा सकते हैं। यह परिवार राष्ट्रीय राजधानी में स्थित हो सकता है। वहीं भाजपा के नेता और कार्यकर्ता इस दौरान सीएए पर समर्थन जुटाने के लिये तीन करोड़ परिवारों से सम्पर्क करेंगे।

जैन ने कहा कि 5 से 15 जनवरी तक चलने वाले इस अभियान में केंद्रीय मंत्रियों से लेकर पार्टी संगठन के नेता देश के विभिन्न हिस्सों में जायेंगे। इसके तहत लोगों से इस विषय पर सोशल मीडिया में समर्थन व्यक्त करने का आग्रह भी किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सहित विपक्षी दल इस कानून के बारे में लोगों को गुमराह कर रहे हैं और भाजपा लोगों को तथ्यों से अवगत करायेगी कि यह नागरिकता देने का कानून है, लेने का नहीं।

क्या है नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019?

नागरिकता (संशोधन) कानून, 2019 के अनुसार, "पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोग अगर 31 दिसंबर 2014 से पहले अपने देश में धार्मिक हिंसा का शिकार होने या उसके डर के कारण भारत आए हैं तो उन्हें भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी।"

यह विधेयक, नागरिकता विधेयक-1955 में संशोधन करने के लिए लाया गया। संसद के दोनों सदनों(लोकसभा और राज्यसभा) से पारित होने और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बन गया है। इसमें शरणार्थियों के भारत में 11 साल रहने की अवधि को कम कर के 5 वर्ष कर दिया गया है।

क्यों हो रहा है नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध?

संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक पारित होने के बाद से ही भारत के अलग-अलग हिस्सों में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। जो कि अब भी जारी हैं। विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि, यह कानून भारत के संविधान में विदित धर्मनिरपेक्षता के मूल्य के खिलाफ है। यह धर्म के आधार पर लोगों को नागरिकता देने का फैसला करेगा जो कि भारतीय संविधान की मूल आत्मा की हत्या करता है।

19 दिसंबर को देश में अलग-अलग जगह एक साथ प्रदर्शन हुए। इससे पहले सरकार ने कई राज्यों में सीआरपीसी की धारा-144 लगाकर इन्हें कमज़ोर करने का प्रयास किया। इन प्रदर्शनों में कई नामी लोगों को गिरफ्तार किया गया। इतिहासकार रामचन्द्र गुहा, भीम आर्मी के चीफ चन्द्रशेखर आज़ाद, दिल्ली में योगेन्द्र यादव आदि लोगों को 19 दिसंबर के प्रदर्शनों से गिरफ्तार किया गया।

असम और दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से शुरू हुआ यह विरोध देश के हर कोने तक पहुंच रहा है। 19 दिसंबर 2019 को दिल्ली, लखनऊ, बैंग्लोर, बिहार आदि जगहों पर न सिर्फ विद्यार्थियों बल्कि आम नागिरकों ने भी इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालयों को विरोध प्रदर्शनों के चलते 5 जनवरी तक बंद भी किया गया है। यहां विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया तो वहीं पुलिसिया कार्रवाई पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े हुए हैं। इस दौरान बच्चों की परीक्षाएं होनी थीं, जो न हो सकीं।

जामिया में हुई हिंसा के बाद दिल्ली के शाहीन बाग में औरतें इस कानून के विरोध में धरना दे रही हैं। ये औरतें 15 दिसंबर से लगातार विरोध प्रदर्शन का हिस्सा हैं। इस दौरान दिल्ली में ठंड का कहर बरसा। पारा 1.5° तक पहुंच गया लेकिन लोगों का यह विरोध प्रदर्शन नहीं रूका, वे अब भी वहां सीएए के विरोध में धरना दे रहे हैं।

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