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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल|सोशल मीडिया
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छत्तीसगढ़: पंचायत चुनावों में एक सीट विकलांग लोगों के लिए आरक्षित

छत्तीसगढ़ मंत्रिमण्डल ने पंचायत में एक विकलांग व्यक्ति को शामिल करने के फैसले को मंजूरी दे दी है। देश में यह अपने तरह का पहला कदम है। दुनिया के किस देश में सबसे अधिक विकलांग राजनेता हैं?

प्रज्ञा

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राज एक्सप्रेस। छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रिमण्डल ने पंचायतों में एक दिव्यांग व्यक्ति को शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। शनिवार, 23 नवंबर 2019 को राज्य के मंत्रिमण्डल ने 'राज्य पंचायती राज अधिनियम, 1993' में इस संशोधन को मंजूरी दे दी है। अब राज्य की सभी पंचायतों में एक विकलांग व्यक्ति का होना अनिवार्य होगा।

इसके साथ ही मंत्रिमण्डल ने पंचों के चुनाव में शैक्षिक योग्यता की आवश्यकता को समाप्त करने का भी फैसला लिया है। इन फैसलों पर अंतिम मुहर विधानसभा में लगेगी। कांग्रेस सरकार को मिले पूर्ण बहुमत को देखकर इसकी उम्मीद पूरी है।

राजनैतिक दल कांग्रेस ने चुनाव से पहले जारी किए घोषणा पत्र में विकलांगों के लिए पंचायत में एक पद अनिवार्य करने की बात कही थी। विधानसभा से पारित होने के बाद छत्तीसगढ़ ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य होगा।

अगर कोई विकलांग व्यक्ति पंचायती चुनाव में चुना नहीं जाता है तो सरकार ऐसे एक व्यक्ति को मनोनीत करेगी। इस तरह राज्य सरकार पंचायती राज व्यवस्था में 11,000 विकलांग लोगों के प्रतिनिधित्व की तैयारी कर रही है।

इसके अलावा मंत्रिमण्डल ने पंचों के लिए अभी तक पांचवी और आठवीं की अनिवार्य शैक्षिक योग्यता को समाप्त करने का भी निर्णय लिया है। केवल यह अनिवार्यता होगी कि, प्रत्याशी पढ़ा-लिखा हो।

छत्तीसगढ़ सरकार का तर्क है कि, विधायक और सांसद पद के लिए शिक्षा की कोई अनिवार्यता नहीं है तो फिर पंचों या सरपंच के लिए ऐसी अनिवार्यता रखना असमानता है। या तो सभी निर्वाचित पदों के लिए शैक्षिक योग्यता की अनिवार्य शर्त हो या फिर सभी के लिए नहीं हो।

छत्तीसगढ़ राज्य में विकलांग लोगों की जनसंख्या 6 प्रतिशत है। 'द हिन्दू' में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर निर्वाचन प्रक्रिया के ज़रिए ग्राम पंचायत में कोई विकलांग व्यक्ति नहीं चुना जाता है तो सरकार किसी विकलांग महिला या पुरूष को नामित करेगी। वहीं जनपदों और जिला पंचायतों में दो (एक महिला और एक पुरूष) विकलांग सदस्यों को सरकार मनोनीत करेगी।

इस साल हुए 17वीं लोकसभा के चुनावों में विकलांग मतदाताओं को चुनाव प्रक्रिया में शामिल करने के लिए भारतीय चुनाव आयोग ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए थे, लेकिन विकलांग उम्मीदवारों का ज़िक्र कहीं नहीं था।

दुनिया की राजनीति में विकलांग जनसंख्या-

अमेरिका और यूरोप जैसे महाद्वीपों के विकसित देशों में विकलांग लोग राजनीति का केवल एक छोटा-सा हिस्सा हैं। अगर भारत की बात की जाए तो शायद ही कोई विकलांग व्यक्ति यहां राजनीति में कोई बेहतर मुकाम पा सका है।

जिसे तीसरी दुनिया(थर्ड वर्ल्ड) कहा जाता है, वहां पर एक देश है, 'युगांडा'। पूर्वी अफ्रीका के इस देश के संविधान के अनुसार, देश की संसद में पांच सीटें विकलांग लोगों के लिए आरक्षित हैं। वहीं गांव, जिले आदि स्तरों पर एक-एक सीट विकलांग महिला और पुरूष के लिए आरक्षित है।

पूर्वी अफ्रीका के देश 'युगांडा' में लगभग 47,000 विकलांग लोग देश की राजनीति का हिस्सा हैं। विश्व में 'विकलांग राजनेताओं का यह सबसे बड़ा समूह' है।

इसके अलावा अफ्रीका के ही एक और देश, केन्या ने युगांडा के उदाहरण से सीख लेकर साल 2011 से विकलांग प्रतिनिधियों को देश की राजनीति में शामिल करना शुरू किया। यहां ऐसा है कि, राजनैतिक दल विकलांग प्रत्याशियों को चुनते हैं।

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