छत्तीसगढ़ में गरमाई गोबर पर सियासत, गोबर को राजकीय चिन्ह बनाने का सुझाव
छत्तीसगढ़ में गरमाई गोबर पर सियासत, गोबर को राजकीय चिन्ह बनाने का सुझाव|Social Media
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छत्तीसगढ़ में गोबर पर सियासत, गोबर को राजकीय चिन्ह बनाने का सुझाव

छत्तीसगढ़ में गोबर पर सियासत गरमा गई है। पूर्व मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता अजय चंद्राकर के एक सोशल मीडिया पोस्ट पर दिए गए सुझाव से गोबर पर सियासत गरमा गई है।

Rishabh Jat

छत्तीसगढ़ में एक दिन पहले ही राज्य सरकार ने ग्रामीणों से गोबर खरीदने का ऐलान किया है। सरकार का दावा है कि इससे खाद बनेगी और ग्रामीण लोगों की आय भी बढ़ेगी। अब बीजेपी नेता अजय चंद्राकर ने ट्विटर और फेसबुक पर लिखा कि- छत्तीसगढ़ के वर्तमान राजकीय चिन्ह को नरवा, गरवा, घुरवा, बारी की अपार सफलता और छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में "गोबर" के महत्व को देखते हुए इसे राजकीय प्रतीक चिन्ह बना देना चाहिए।

कांग्रेस ने किया पलटवार

छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने बीजेपी नेता के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा है कि - आपकी सोच को देखकर लगता है कि सरकार की इस योजना से भाजपा के नेताओं को काफ़ी लाभ मिल सकता है, उठाना भी चाहिए। दिमाग़ में भरे गोबर को बेचें, आर्थिक लाभ पाएँ। कुछ अच्छी चीजें भी दिमाग़ में घुसेंगी। बता दें कि बीजेपी नेता के इस ट्वीट की कांग्रेस नेताओं ने निंदा की है।

अपने भी कर रहे हैं विरोध

बीजेपी नेता अजय चंद्राकर की इस पोस्ट का अब लोग विरोध कर रहे हैं। आम लोगों ने इसे गलत बताया। फेसबुक पर चंद्राकर के कुछ समर्थक और भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी राजकीय चिन्ह और गोबर की इस तुलना को सही नहीं माना है। इस पोस्ट पर कमेंट के माध्यम से लोगों ने विरोध जताया है।

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