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प्रदेश के प्रत्येक विकासखण्ड के एक आंगनवाड़ी केन्द्र को बाल शिक्षा केन्द्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है
प्रदेश के प्रत्येक विकासखण्ड के एक आंगनवाड़ी केन्द्र को बाल शिक्षा केन्द्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है|Social Media
मध्य भारत

मध्यप्रदेश: बाल शिक्षा विकास में एक बड़ा कदम उठा रही सरकार

महिला एवं बाल विकास विभाग ने प्रदेश के प्रत्येक विकासखण्ड के एक आंगनवाड़ी केन्द्र को बाल शिक्षा केन्द्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।

रवीना शशि मिंज

राज एक्सप्रेस। राज्य की महिला एवं बाल विकास विभाग ने प्रदेश के प्रत्येक विकासखण्ड के एक आंगनवाड़ी केन्द्र को बाल शिक्षा केन्द्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।

प्रथम चरण में 313 आंगनवाड़ी केन्द्र में बाल शिक्षा केन्द्र शुरू किये गये हैंइन बाल शिक्षा केन्द्रों में 6 वर्ष तक आयु वर्ग के नौनिहालों को प्री-प्रायमरी शिक्षा की तैयारी कराई जा रही है।

महिला-बाल विकास विभाग द्वारा प्रारंभिक बाल्यावस्था में देखरेख और शिक्षा के संबंध में रेग्युलेटरी दिशा-निर्देश तैयार किये जा रहे हैं। इसके माध्यम से शासकीय एवं निजी क्षेत्रों में 6 वर्ष तक आयु वर्ग के बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए संचालित की जा रही प्री-प्रायमरी संस्थाओं का नियमन, निगरानी और मूल्यांकन किया जाएगा। प्रदेश स्तर पर भी शाला पूर्व शिक्षा नीति तथा नियामक दिशा-निर्देश बनाए जा रहे हैं।

माहवार पाठ्यक्रम निर्धारित

आंगनवाड़ी में आने वाले 3 से 6 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए 19 विषयों का मासिक पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इसमें स्वयं की पहचान, मेरा घर, व्यक्तिगत साफ-सफाई, रंग और आकृति, तापमान एवं पर्यावरण, पशु-पक्षी, यातायात के साधन, सुरक्षा के नियम, हमारे मददगार मौसम और बच्चों का आत्म-विश्वास तथा हमारे त्यौहार शामिल हैं।

बाल शिक्षा केन्द्र में बच्चों के लिए आयु समूह के अनुसार तीन एक्टीविटी वर्कबुक तैयार की गई हैं।

शिशु विकास कार्ड से जान पाएंगे बच्चें में सुधार

बाल शिक्षा केन्द्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए साल भर में करवाई जाने वाली गतिविधियों का संकलन तथा मासिक और साप्ताहिक कैलेण्डर की जानकारी उपलब्ध कराई गई है। इसमें बच्चों के विकास की निगरानी रखने के लिए आयु समूह के अनुसार शिशु विकास कार्ड बनाए गए हैं।

आंगनवाड़ी छोड़ते वक्त बच्चों को प्रमाण-पत्र और हर साल पी.एस.ई.किट उपलब्ध कराई जाएगी। 'निपसिड़' से प्रशिक्षित स्टेट रिर्सोस ग्रुप के द्वारा राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षित किये गये हैं, जिनके द्वारा पर्यवेक्षकों को 'हेण्डस ऑन' प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकताओं और सहायिकाओं (असिस्टेंट) को भी पर्यवेक्षकों द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

खेलकूद के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा

आंगनवाड़ी शिक्षा केन्द्र में खेल-खेल में बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए दैनिक गतिविधियाँ निर्धारित की गई हैं। इसमें क्रियात्मक और रचनात्मक खेल, नाटक अथवा नकल करने वाले खेल, सामूहिक और नियमबद्ध खेल शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, बच्चे अपने मन से अकेले कुछ खेल खेलना चाहते हैं, उसे भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन केन्द्रों पर खेलों के आधार पर बच्चों से अलग-अलग गतिविधियाँ कराई जाती हैं। केन्द्रों पर प्रतिदिन 3 से 4 घन्टे का समय शाला-पूर्व शिक्षा के लिए निर्धारित है। बच्चों को एक गतिविधि के लिए 15 से 20 मिनिट का समय निर्धारित किया गया है क्योंकि 3 से 6 वर्ष तक की उम्र के बच्चे एक गतिविधि पर इससे अधिक समय तक ध्यान नहीं दे पाते।

पोस्टर लगाकर कक्षा को दिया नया स्वरूप

कक्षा में दीवारों पर चार्ट, पोस्टर्स और कटआऊट लगाकर नया स्वरूप देने की कोशिश की गई है। बड़े समूह की गतिविधियों के लिए कक्ष के एक कोने में मंच की व्यवस्था की गई है, जहां बच्चे पुस्तक पढ़कर सुनाते हैं, गाना गाते हैं, कविताएं और कहानियाँ सुनाते हैं।

बाल शिक्षा केन्द्र के कक्ष के अन्दर का वातावरण छोटे बच्चों की रूचि एवं विकासात्मक आवश्यकताओं के अनुसार बनाया गया है। बच्चों के खेलने के लिए अलग-अलग कोने जैसे गुड़िया घर का कोना, संगीत का कोना, विज्ञान एवं पर्यावरण प्रयोग का कोना, बिल्डिंग ब्लॉक से खेलने का कोना, शिल्पकला का कोना और कहानियों का कोना आदि बनाए गए हैं।

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