सांठगांठ ऐसी की बिना रजिस्ट्रेशन ही जेयू में संचालित हो रहा हेल्थ सेंटर

ग्वालियर, मध्य प्रदेश : जीवाजी विश्वविद्यालय में अफसरों की मिलीभगत के चलते विवि के एक प्रोफेसर को एक भवन मुफ्त में आंवटित कर दिया। इस भवन में हेल्थ सेंटर संचालित हो रहा है।
सांठगांठ ऐसी की बिना रजिस्ट्रेशन ही जेयू में संचालित हो रहा हेल्थ सेंटर
जेयू में संचालित हो रहा हेल्थ सेंटरSocial Media

हाइलाइट्स :

  • कुलपति व अन्य अधिकारियों की मिली भगत से चल रहा सेंटर

  • मेहरबान : हेल्थ सेंटर चालने जीवाजी विवि की गाड़ी दी दान में

  • नियम विरुद्ध इसलिए अभी तक नहीं कराया रजिस्ट्रेशन

ग्वालियर, मध्य प्रदेश। जीवाजी विश्वविद्यालय में अफसरों की मिलीभगत के चलते विवि के एक प्रोफेसर को एक भवन मुफ्त में आंवटित कर दिया। इस भवन में हेल्थ सेंटर संचालित हो रहा है। इस सेंटर को संचालित होते हुए लगभग तीन वर्ष से अधिक का समय हो गया, लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग में इसका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। बिना रजिस्ट्रेशन के ही जेयू में यह हेल्थ सेंटर संचालित हो रहा है। जो कि नियम विरूद्ध है।

जीवाजी विश्वविद्यालय के अधिकारी अपने किसी चहेते को लाभ पहुंचाने चाहे तो वह सारे नियम कायदे और कानून भूल जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है कि जीविवि में अपने चहेते प्रोफेसर जीबीकेएस प्रसाद को स्थापित करने के लिए कुलपति प्रो.संगीता शुक्ला ने उन्हें भवन मुफ्त में आंवटित कर दिया, यह भवन हेल्थ सेंटर के नाम से आंवटित किया गया है। अन्य बड़े अफसरों को यह दुहाई देते हुए भवन आंवटित हुआ कि इसमें जीवाजी विवि के अधिकारी, कर्मचारियों का नि:शुल्क उपचार किया जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि जब इस हेल्थ सेंटर में कर्मचारी उपचार के लिए पहुंचते हैं । तो उनसे रेट लिस्ट के हिसाब से ही शुल्क वसूला जाता है।

इतना ही नहीं इस हेल्थ सेंटर के संचालक की सबसे गंभीर लापरवाही यह सामने आई है कि जेयू परिसर में सेंटर संचालित होते हुए करीब तीन वर्ष हो गए। लेकिन स्वास्थ्य विभाग में अभी तक इस हेल्थ सेंटर का रजिस्ट्रेशन ही नहीं हुआ है। जानकारी के अनुसार हेल्थ सेंटर के संचालक प्रो.प्रसाद एक बार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यालय रजिस्ट्रेशन की जानकारी लेने पहुंचे थे। दस्तावेजों और नियमों को हेल्थ सेंटर पूरा नहीं कर रहा था। इसलिए इसका रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका।

किस पंचकर्म के कितने रूपए

नाम पंचकर्म थैरेपी, प्रतिदिन दर, साप्ताहिक दर

एकांग स्नेहन स्वेदन, 200, 1100

सर्वांग स्नेहन स्वेदन, 350, 2000

षष्टिक शालि पिण्डस्वेद, 450, 2500

शिरोधारा(काढ़ा अथवा दूध), 400, 2300

शिरोधारा (तेल), 450, 2500

कटि बस्ती/जानू बस्ती/ग्रीवा बस्ती, 300, 1700

नस्य कर्म, 100, 550

नेत्र तर्पण, 150, 850

अनुवासन बस्ती, 350

आस्थापन वस्ति, 300

मात्रा वस्ति, 250, 1400

योग वस्ति, 2200

काल वस्ति,4400

वामन कर्म, 3000

विरेचन कर्म, 3000

पत्र विण्ड स्वेदन, 450, 2500

इन डॉक्टरों के नाम हैं चस्पा :

आयुर्वेद इकाई

  • डॉ. केके सिजौरिया

  • डॉ. मीनाक्षी पाल

  • डॉ. केके गुप्ता

ऐलोपेथिक इकाई

  • डॉ. एसएल बरौदिया

दन्त चिकित्सा

  • डॉ. हर्ष शर्मा

  • डॉ. रोहित शर्मा

फिजियोथेरेपी

  • डॉ. दीपिका तिवारी

नेचुरोपेथी इकाई

  • डॉ. आरिषि वशिष्ठ

दान में दी एम्बुलेंस :

जीवाजी विश्वविद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों के लिए एक गाड़ी खरीदी गई थी। उसका उपयोग दुर्घटना/हादसा में घायल होने वाले कर्मचारियों को अस्पताल तक ले जाने के लिए होता था। विवि में हेल्थ सेंटर की शुरूआत होते ही विवि ने कार्यपरिषद सदस्यों के साथ मिलकर इस गाड़ी (एम्बुलेंस) को हेल्थ सेंटर को दान में दे दी।

इनका कहना है :

आयुर्वेद की मुझे जानकारी नहीं है। यदि ऐलोपेथिक इकाई संचालित हो रही है तो इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। बिना रजिस्ट्रेशन के हेल्थ सेंटर चालान नियम विरूद्ध है। मैं जानकारी लेकर कार्रवाई करता हूं।

डॉ.मनीष शर्मा, सीएमएचओ

हेल्थ सेंटर संचालित करने के लिए इन्होंने रजिस्ट्रेशन कराया है या नहीं। इसकी जानकारी मैं लेता हूं। यदि आम आदमी और कर्मचारियों से एक समान रूपये लिए जा रहे हैं तो उसमें कर्मचारियों को छूट मिलना चाहिए। हेल्थ सेंटर को एम्बुलेंस दान में नहीं दी गई है। वहां सिर्फ वह खड़ी होती है।

मनेन्द्र सोलंकी (मोनू), कार्यपरिषद सदस्य, जेयू

जब इस संबंध में हेल्थ सेंटर के संचालक प्रोफेसर जीबीकेएस प्रसाद के मोबाइल नम्बर +9192291 97619 पर सम्पर्क करना चाता तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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