इंदौर : डेली कॉलेज में 13 कौवे और मरे, पूरा परिसर किया गया सैनिटाइज
डेली कॉलेज में 13 कौवे और मरे, पूरा परिसर किया गया सैनिटाइजRaj Express

इंदौर : डेली कॉलेज में 13 कौवे और मरे, पूरा परिसर किया गया सैनिटाइज

इंदौर, मध्य प्रदेश : अब तक 83 कौवों की मौत मिला एच5एन8 एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस। मृत पाए गए कौवों को 6 फीट गहरे गड्ढे में किया गया दफन।

इंदौर, मध्य प्रदेश। डेली कॉलेज परिसर में 29 दिसंबर को 50 कौवे मृत मिले थे। जांच के बाद इस बात की पुष्टि हुई थी कि इन कौवों में से कुछ की मौत एच5एन8 एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस से हुई थी। इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया था। शनिवार को एक बार फिर डेली कॉलेज परिसर का निरीक्षण किया गया, तो यहां पर 13 कौवे मृत मिले।

इस प्रकार शुक्रवार को भी 20 कौवे मृत मिले थे। इस प्रकार अब तक कॉलेज परिसर में 83 कौवे मर चुके हैं। इनमें से कई में वायरस का संक्रमण पाया गया है। हालांकि प्रारंभिक जानकारी अनुसार यह वर्ड फ्लू का टाइप तो है, लेकिन वह टाइप नहीं है, जो दूसरे को भी संक्रमित करे।

वेटनरी विभाग की टीम मौके पर पहुंची :

डेली कॉलेज में 29 दिसंबर को पहली बार कुछ कौवे मृत मिले थे। इसकी सूचना मिली तो स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा विभाग के अफसर मौके पर पहुंचे। पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक पीके शर्मा ने बताया कि मृत कौवों के सैंपल जांच के लिए भोपाल स्थित प्रयोगशाला भेजे गए थे। जांच के दौरान पाया गया कि कौवों की मौत एच5एन8 एवियन इन्फ्लूएंजा से हुई है। एच5एन1 से लेकर एच5एन5 टाइप तक वाला वायरस घातक बर्ड फ्लू होता है, जो एक पक्षी से दूसरे पक्षी में फैलता है। वर्तमान में जिस वायरस से कौवों की मौत हुई है, वह केवल कौवों तक ही सीमित है। वायरस से मृत कौवों को निगम की टीम ने पशु विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में शनिवार सुबह एकांत में दफनाया। यहां मौजूद एक कर्मचारी ने पीपीई किट पहनकर पहले मृत कौवों को एकत्रित किया। इसके बाद फिर उन्हें काली पॉलीथिन में भरा। इसके लिए पहले जेसीबी की मदद से 6 फीट का गड्ढा खोदा गया। इसके बाद सभी कौवों को गड्ढे में डालकर ऊपर से चूने की परत बिठाई गई। इसके बाद फिर मिट्टी डालकर उन्हें दबा दिया गया।

5 किमी क्षेत्र में शुरू हुआ सर्वे :

शनिवार सुबह से ही डेली कॉलेज के आस-पास के पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले घरों में सर्वे के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें पहुंच गई थीं। निगम के वार्ड नंबर 51, 52 और 54 में सर्वे के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमों के साथ सैंपलिंग टीम भी पहुंची। टीम में स्वास्थ्य विभाग के एएनएम, आशा कार्यकर्ता और सुपरवाइजर लोगों के घर- घर पहुंचकर उनके परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य के बारे में पूछ रहे थे। परिवार में किसी सदस्य को सर्दी, खांसी बुखार के लक्षण तो नहीं इसके बारे में पूछताछ कर रिकॉर्ड दर्ज किया गया। नगर निगम के माध्यम से डेली कॉलेज परिसर में जिन पेड़ों के आस-पास कौओं के घोंसले बने हुए हैं और जहां कौओं की मौत हो रही है, वहां पर सैनिटाइजेशन करवाया गया। गौरतलब है कि डेली कॉलेज परिसर में मृत पाए गए कौओं में इनफ्लुएंजा वायरस एच5एन8 पाया गया है। इसका संक्रमण आस-पास की कॉलोनी के लोगों में तो नहीं फैला इसकी जांच के लिए स्वास्थ विभाग द्वारा सर्वे करवाया जा रहा है।

14 लोगों में मिले सर्दी-खांसी के लक्षण :

सर्वे के दौरान 14 लोगों में सर्दी-खांसी के लक्षण मिले हैं। सर्वेक्षण प्रभारी डॉ. अनिल डोंगरे के मुताबिक सीएमएचओ डॉ. पूर्णिमा गडरिया के निर्देश पर डोर टू डोर सर्वे किया गया। प्रमुख रूप से मूसाखेड़ी, पालदा नाका, आजाद नगर, रेजीडेंसी, स्नेहलगंज और चौहान नगर क्षेत्र में किया गया। इन क्षेत्रों में 501 घरों में रहने वाले 2609 लोगों का सर्वेक्षण किया गया था। डॉ. डोंगरे ने बताया कि सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से केवल 14 लोग खांसी और सर्दी से पीड़ित पाए गए। हालांकि, उनमें से किसी में भी बर्ड फ्लू या एवियन इन्फ्लूएंजा का कोई लक्षण नहीं पाया गया। सर्वेक्षण को अगले कुछ दिनों तक जारी रखा जाएगा क्योंकि हम क्षेत्र के हर घर तक पहुंचने की कोशिश करेंगे। सीएमएचओ ने कहा कि जरूरत पडऩे पर संदिग्ध मरीजों के सेंपल जांच के लिए भोपाल भेजे जाएंगे।

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