बैठक के बाद मिश्रा ने बताया, धर्मांतरण को रोकने के लिए किए 'सख्त प्रावधान'
ठक के बाद मिश्रा ने बतायाPriyanka Yadav-RE

बैठक के बाद मिश्रा ने बताया, धर्मांतरण को रोकने के लिए किए 'सख्त प्रावधान'

भोपाल, मध्यप्रदेश : नरोत्तम मिश्रा ने मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद बताया कि धर्म परिवर्तन करने और कराने वालों की गतिविधियों पर रोक के लिए सख्त सजा और दंड का प्रावधान किया गया है।

भोपाल, मध्यप्रदेश। प्रदेश में लव जिहाद को रोकने के लिए मप्र धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक-2020 को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है, प्रदेश में कोई भी व्यक्ति अब किसी को बहला-फुसलाकर, डरा-धमका कर विवाह के माध्यम से धर्म परिवर्तन नहीं करा पाएगा, ऐसा प्रयास करने वाले व्यक्ति के विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। धर्म परिवर्तन को लेकर मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दिया बयान।

आज शिवराज की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मध्य प्रदेश में लव जिहाद के खिलाफ प्रस्तावित धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को मंजूरी दी गई है। बैठक के बाद गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि इस विधेयक में धर्म परिवर्तन रोकने के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं। इसमें सजा और दंड के बेहद सख्त प्रावधान किए गए हैं और अनेक प्रावधान देश में फिलहाल सिर्फ इसी राज्य में किए गए हैं।

यह विधेयक जब कानून का स्वरूप लेगा, तब 1968 वाला धर्म स्वातंत्र्य कानून समाप्त हो जाएगा।

नरोत्तम मिश्रा ने बताया-

नरोत्तम मिश्रा ने ट्वीट कर कहा -

इस मामले में मिश्रा बोले की विधेयक के कानून बन जाने के बाद कोई भी व्यक्ति दूसरे को प्रलोभन, धमकी, बल, दुष्प्रभाव, विवाह के नाम पर अथवा अन्य कपटपूर्ण तरीके से प्रत्यक्ष अथवा अन्य तरीके से उसका धर्म परिवर्तन या धर्म परिवर्तन का प्रयास नहीं कर सकेगा, विधेयक धर्म परिवर्तन करने और कराने वालों की गतिविधियों पर रोक के लिए सख्त सजा और दंड का प्रावघान किया गया है।

धर्म परिवर्तन को लेकर सख्त कानून :

मिश्रा ने कहा कि धर्म छुपाकर धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम का उल्लंघन करने पर तीन साल से दस साल तक के कारावास और 50 हजार रूपए अर्थदण्ड और सामूहिक धर्म परिवर्तन का प्रयास करने पर 5 से 10 वर्ष के कारावास एवं एक लाख रूपए के अर्थदण्ड का प्रावधान किया गया है। किसी भी व्यक्ति के द्वारा अधिनियम का उल्लंघन करने पर एक साल से पांच साल तक के कारावास और 25 हजार रूपए का जुर्माना लगेगा। नए कानून में धर्म संपरिवर्तन के आशय से किया गया, विवाह शून्य घोषित करने के साथ महिला और उसके बच्चों के भरण पोषण का हकदार करने का प्रावधान भी किया गया है, ऐसे विवाह से जन्मे बच्चे माता-पिता की संपत्ति के उत्तराधिकारी होंगे।

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