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टाइगर रिजर्व क्षेत्र में शिकार की आशंका
टाइगर रिजर्व क्षेत्र में शिकार की आशंका|Social Media
मध्य प्रदेश

शिकारियों पर नकेल कसने टाइगर रिजर्व के संचालक ने दिए निर्देश

मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में अब बाघों की जान पर खतरा मंडराने लगा है। आये दिन जंगली जानवरों के शिकार के मामले सामने आते रहते हैं।

Priyanka Yadav

Priyanka Yadav

राज एक्सप्रेस। मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में अब बाघों की जान पर खतरा मंडराने लगा है। आये दिन जंगली जानवरों के शिकार के मामले सामने आते रहते हैं। मिली जानकारी के अनुसार टाइगर रिजर्व क्षेत्र में वन्यजीवों के शिकार की आशंका के मद्देनजर रेड अलर्ट घोषित किया गया है।

'रेड अलर्ट' घोषित

टाइगर रिजर्व के उप संचालक जरांडे रामहरि ने कोर और बफर क्षेत्र में सोमवार से 16 जनवरी तक 'रेड अलर्ट' घोषित करते हुए शिकार की आशंका वाले क्षेत्रों में विशेष ऐहतियात बरतने के निर्देश दिए हैं।

रिजर्व के मैदानी और जिम्मेदार अमले से कहा गया है कि

संपूर्ण क्षेत्र में गश्त और बढ़ायी जाए तथा किसी भी संदेहास्पद गतिविधि दिखायी देने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाए।

टाइगर रिजर्व क्षेत्र में इन दिनों शिकार की आशंका की सूचनाएं होने के मद्देनजर यह अलर्ट घोषित किया गया है। बाघों से आबाद हो चुके पन्ना टाइगर रिज़र्व में मौजूदा समय में 55 से अधिक बाघ हैं, जो कोर क्षेत्र के अलावा बफर और आसपास के जंगलों में भी विचरण कर रहे हैं। हाल के दिनों में बफर क्षेत्र और आसपास के जंगल में शिकार की घटनाओं से पार्क प्रबंधन बाघों की सुरक्षा को लेकर सचेत हुआ है।

मध्यप्रदेश बना टाइगर स्टेट

आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में बाघों के बीच बढ़ती वर्चस्व की लड़ाई और अवैध शिकार के चलते बाघों की संख्या तेजी से घटने लगी थी। 2006 की गणना में बाघों की संख्या 300 थी, जो 2010 में घटकर 257 रह गई थी, जबकि इसी दौरान 300 बाघों के साथ बाघ राज्य का दर्जा कर्नाटक को मिल गया था। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में 2018 में ऐसी वर्चस्व की लड़ाई शुरू हुई थी।

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