Anuppur : तीसरी लहर के संभावना के बीच गंदगी का अंबार बनी अमलाई कॉलोनी
तीसरी लहर के संभावना के बीच गंदगी का अंबार बनी अमलाई कॉलोनीSitaram Patel

Anuppur : तीसरी लहर के संभावना के बीच गंदगी का अंबार बनी अमलाई कॉलोनी

अनूपपुर : अमलाई कॉलोनी में कई वर्षों से गंदगी का अंबार भरा हुआ है, लगातार शिकायतों के बाद भी कोई कार्यवाही न ही पंचायत के द्वारा की गई और न ही एसईसीएल के महाप्रबंधक के द्वारा कोई निदान किया गया।

अनूपपुर, मध्यप्रदेश। जिले के अंतिम छोर में बसी अमलाई कॉलोनी जो कि ग्राम पंचायत बरगवां के अंदर समाहित है और जल्द ही नगर पंचायत बनाए जाने की कवायद में लगी हुई है। यहां पर कई वर्षों से गंदगी का अंबार भरा हुआ है, लगातार शिकायतों के बाद भी कोई कार्यवाही न ही पंचायत के द्वारा की गई और न ही एसईसीएल के महाप्रबंधक के द्वारा कोई निदान किया गया। आज भी नाली बजबजा रही है, नाली का पानी घरों के अंदर घुस रहा है, जिससे दर्जनों लोग यहां डेंगू के शिकार हो चुके हैं, लेकिन पंचायत के द्वारा और न ही एसईसीएल के द्वारा सफाई पर कोई बड़ा कार्य किया जा रहा है। अगर तीसरी लहर आ पाई तो तीसरी लहर से तो लोग बच सकते हैं, लेकिन एक बार अगर इस कॉलोनी में महामारी ने घर कर लिया तो पूरे जिले के अस्पताल कम पड़ने लगेंगे। एक तरफ पूरा जिला तीसरी लहर को बचाने के लिए प्रत्येक पंचायत में दर्जनों लोगों की स्वास्थ्य टीम बनाकर लोगों को पकड़ पकड़ कर टीका लगवा रही है तो अचरज की बात तो यह है कि आने वाले महामारी को रोकने के लिए कोई भी दल गठित आज तक नहीं किया जा सका, जहां हजारों जिंदगियां खतरे में पड़ी है और जिले के जिम्मेदार आराम से अपने कुर्सी में बैठकर सिर्फ तमाशा देख रहे हैं।

डीएम कर चुकी हैं निरीक्षण :

नवागत कलेक्टर सुश्री सोनिया मीणा भी अमलाई कॉलोनी अपने पद स्थापना के समय ही सघन वृक्षारोपण के कार्यक्रम में उपस्थित होकर कोरोना योद्धाओं से मिलकर क्षेत्र के विकास के लिए प्रयास करने की बात कही थी, जिस पर क्षेत्रीय नेताओं के द्वारा उक्त अमलाई कालरी के नालियों को लेकर भारी चिंता जताई गई थी, जिस पर अतिरेक भवन के सामने अपना काफिला रोककर निरीक्षण भी किया गया था साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया था कि जल्द ही एसईसीएल के महाप्रबंधक को चिट्ठी लिखकर साफ सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करवाई जाएगी। इसके अलावा ग्राम पंचायत के जनपद सीईओ एवं अन्य जिम्मेदारों को लिखकर इसकी व्यवस्था दुरुस्त करवाए जाने के साथ-साथ नाली निर्माण के आदेश भी दिए जाएंगे, लेकिन आज तक इस क्षेत्र में किसी प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई।

टीकाकरण के लिए टीम, संभावित महामारी पर नजर भी नहीं :

लगातार इस क्षेत्र में दर्जनों लोगों की टीम बनाकर लोगों को पकड़-पकड़ कर कोरोना का दूसरा टीका लगवाया जा रहा है, किससे कोरोना की बीमारी से बचा जा सके, फिलहाल यह बीमारी तो सामने नहीं दिख रही है, जिसके लिए टीकाकरण किया जा रहा है, लेकिन अपनी आंखों के सामने महामारी का भयावह रूप ले चुके नाली की अपार गंदगी, जिससे कभी भी महामारी फैल सकती है। इस पर जिले के जिम्मेदारों के द्वारा बड़े फैसले नहीं लिए जा रहे हैं । टीकाकरण पर अगर दर्जनों लोगों को लगाया जा सकता है तो महामारी के रूप में फैलने वाले नाली के गंदगी को और कूड़ा करकट को साफ करने वाले लोगों के लिए एक टीम भी गठित नहीं कर पा रहे हैं। जिम्मेदार सिर्फ कोरोना से होने वाली मौतों के आंकड़ों पर कार्य कर रही है, लगातार 2 से 3 वर्ष बीत जाने के बाद भी दर्जनों आवेदन के बाद नाली के पसरी गंदगी पर कोई काम नहीं हो पा रहा है।

किस लिए चुप हैं जिम्मेदार?

कई वर्षों से लगातार जनप्रतिनिधियों के द्वारा आवेदन दिए जाने के बाद भी एसईसीएल के महाप्रबंधक और जिले में बैठे प्रशासनिक अधिकारी महामारी के रूप में फैले इस गंदगी के अंबार को साफ कराने के लिए पहल क्यों नहीं करते यह अपने आप में बड़ा सवाल है क्योंकि कभी बरगवां पंचायत के जनपद सदस्य और उपसरपंच संतोष टंडन के द्वारा विधिक न्यायालय में शिकायत देने के बाद डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट स्वयं अपनी आंखों से उक्त जगह का निरीक्षण कर चुके हैं, इसके बाद सघन वृक्षारोपण के समय वर्तमान कलेक्टर ने भी आकर इस गंभीर समस्या पर अपने बात रखी और समस्या से जल्द निदान किए जाने की बात भी कहीं, तो क्या अब मान ले की एसईसीएल की कॉलोनी जहां पर लगभग 15 सौ लेकर 2000 के बीच जनसंख्या रह रही है जो कि ग्राम पंचायत बरगवां के मतदाता भी हैं इनके तरफ एसईसीएल के अमलाई खदान बंद हो जाने के कारण ध्यान न दिया जाना और फिर अब अंतिम छोर में होने के कारण शायद प्रशासनिक अधिकारी और जिम्मेदारी रखने वाले अधिकारियों की नजर न पहुंच पाने के कारण ही या फिर अन्य प्रकार के सेंट्रल के दबाव के कारण अपने जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ कर या फिर किसी दबाव में आकर काम नहीं कर पाना माना जाएगा। भले ही यहां महामारी फैल कर सैकड़ों लोगों की जान जाती रहे। फिर यह एक जांच बनकर रह जाएगी, लेकिन तब तक लोग अपने लोगों को खो चुके रहेंगे बार-बार यहां की समस्याओं को कई अखबारों ने प्रकाशित किया, लेकिन जिम्मेदार अभी तक सो रहे हैं और इसके पीछे कोई बड़ा कारण भी है तभी तो एक छोटी सी समस्या का निदान भी नहीं हो पा रहा है।

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