Anuppur : धान में फिर लगा सूखा रोग, किसान परेशान न बीमा का लाभ न राहत
धान में फिर लगा सूखा रोग, किसान परेशान न बीमा का लाभ न राहतSitaram Patel

Anuppur : धान में फिर लगा सूखा रोग, किसान परेशान न बीमा का लाभ न राहत

धान की फसल में लग रहे झुलसा रोग ने किसानों की चिता बढ़ा दी है, बीमारी से धान के उत्पादन पर भी असर पड़ने का खतरा मंडराने लगा है, क्षेत्र में लगभग सैकड़ों किसानों की धान की फसल झुलसा रोग से प्रभावित है।

अनूपपुर, मध्यप्रदेश। जिलेभर में कई किसानों के धान की फसलों में ऐसे कीड़े देखे गये, जो महज कुछ ही दिनों में हरे-भरे खेत में खड़ी फसल को सूखे में बदल दे रहे हैं। धान की फसल में लग रहे झुलसा रोग ने किसानों की चिता बढ़ा दी है, बीमारी से धान के उत्पादन पर भी असर पड़ने का खतरा मंडराने लगा है, क्षेत्र में लगभग सैकड़ों किसानों की धान की फसल झुलसा रोग से प्रभावित हैं। इसके साथ जंगली सुअर भी किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों ने बताया कि धान की पत्तियों को देखने पर इस पर लाल और काले रंग के कीट नजर आते हैं। यह कीट पत्तियों का रस चूस लेते हैं। इसके बाद पत्ती पीली पड़ने लगती है। कुछ दिन बाद सूख कर पत्तियां नीचे गिर जाती है। धीरे-धीरे कर बीमारी पड़ोस के अन्य खेतों तक फैल रही है। यह नई प्रकार की बीमारी नजर आ रही है। इसका उपचार नहीं मिला तो धान की फसल चौपट हो जाएगी। कड़ी मेहनत के साथ पूंजी लगाकर खेती की गई है। उत्पादन प्रभावित हुआ तो किसानों की आर्थिक रीढ़ टूट जाएगी।

रोकथाम के लिए किसान चिंचित :

ग्राम पंचायत लखनपुर के ग्राम कर्राटोला निवासी राजीव सिंह ने बताया कि फसलों में लग रही बीमारी की रोकथाम के लिए किसान चिंचित हैं। वे बीमारी के लक्षण बताकर दुकान से दवा खरीद कर खेतों में छिड़क रहे हैं। किसानों का आरोप है कि कृषि अधिकारी क्षेत्र का दौरा करने के बजाय घर बैठे आंकड़ा प्रस्तुत करते हैं। किसान दवा का छिडकाव कर रहे हैं, पर ज्यादा असर नही दिखाई दे रहा है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। धान के खेतों में फैली बीमारी के संबंध में उचित सलाह नहीं मिलने से किसान परेशान हैं।

धान के पौधे का ऊपरी हिस्सा सूख रहा :

सावन में हुई बारिश से किसानों को राहत तो मिली थी, निंदाई, गुडाई के बाद धान के बड़े होते लहलहाते पौधे देखकर किसान प्रफुल्लित हो रहे थे। अब धान के खेत में कीट प्रकोप ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। तना छेदक, ब्लास्ट, ऊपरी हिस्सा सूखने की बीमारी शुरू हो गई है। तना छेदक में कीट धान के पौधों के बीच में उत्पन्न होकर पौधे के तने को निशाना बनाता है। उसे छेदकर पौधे को ही नष्ट कर देता है। पत्ती मुड़कर कीट प्रकोप से पत्तियां सफेद धारीदार हो जाती हैं, कीट अन्य पत्तियों को चिपकाकर खोल बना कर रहता है तथा पत्ती के हरे भाग को खाकर नष्ट कर देता है।

कृषि अधिकारी नहीं करते क्षेत्र का दौरा :

ग्राम कर्राटोला, ग्राम पंचायत परसवार के ग्राम मौहरी के किसानों ने बताया कि धान के पौधे में ऊपरी हिस्सा सूखने की बीमारी हो रही है। खाद दुकानदारों से सलाह लेकर दो-तीन किस्म का कीटनाशक डालने के बाद भी बीमारी कंट्रोल में नहीं आ रही है। सैकड़ों किसान ऐसे भी हैं जो आज तक कृषि अधिकारी का नाम तक नही जानते, इतना ही नहीं कई लोग तो आज तक देखे भी नहीं हैं। वर्षो से अपने पद पर काबिज होकर महज कार्यालय में अपना हिसाब-किताब देख रहे हैं।

फसल बीमा के नाम पर छलावा :

बीते चार वर्षों से बैंक व बीमा कंपनियों द्वारा फसल बीमा के नाम पर छलावा किसानों के साथ छलावा कर रही है। शिकायत पत्र देने के बाद भी कार्यवाही व बीमा का लाभ नहीं मिल पाता है। ग्राम मौहरी के कृषक नारायण पटेल ने शिकायत पत्र में बताया कि केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा किसानों के हित में लगातार प्रयास कर योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते किसान योजनाओं से वंचित बने हुए हैं। यहां पर लगातार बीते चार वर्षों से किसानों को आपदा से नष्ट फसलों का मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में खरीफ की फसल नष्ट हुई थी और बीमा भी कराया गया था, जब इसका लाभ नहीं मिला तो कृषि उपसंचालक को आवेदन पत्र दिया गया था, लेकिन आज तक निराकरण नहीं हुआ। इससे किसान क्लेम से वंचित हो गए। जिन्हें अब तक क्लेम राशि नहीं मिली।

किसानों की प्रीमियम राशि बैंकों द्वारा काट ली :

बीमा कंपनी के पोर्टल पर डाटा अपलोड नहीं किया और किसान क्लेम से वंचित हो गए। इसके साथ ही लगभग सैकड़ों अन्य किसानों को भी क्लेम नहीं मिल पाया है। वर्ष 2018 में बीमा कंपनी ने अधिकारियों की मिली भगत से गलत सर्वे रिपोर्ट जारी कर किसानों का बीमा नहीं मिल पाया। किसानों ने वर्ष 2018 में नष्ट खरीफ फसल का सर्वे कर शीघ्र ही क्लेम राशि दिलाए जाने की मांग की है।

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