जिला पंचायत की हार का कलंक धोने की कोशिश
जिला पंचायत की हार का कलंक धोने की कोशिशPrafulla Tiwari

जिला पंचायत की हार का कलंक धोने की कोशिश : आठ स्थाई समितियों पर भाजपा ने जमाया कब्जा

जिला पंचायत अध्यक्ष कांग्रेस की झोली में जाने के बाद से ही सत्ता और संगठन में तनातनी मची है। भाजपा हाईकमान ने संंपूर्ण घटनाक्रम की जांच की जिम्मेदारी प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों को दी है।

नर्मदापुरम, मध्यप्रदेश। जिला पंचायत अध्यक्ष कांग्रेस की झोली में जाने के बाद से ही सत्ता और संगठन में तनातनी मची हुई है। भाजपा हाईकमान ने संंपूर्ण घटनाक्रम की जांच की जिम्मेदारी प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों को दी है। इसको लेकर दो सदस्यीय जांच टीम नर्मदापुरम भी आ चुकी है। हालांकि यह मामला पार्टी स्तर पर चल रहा है। वहीं दूसरी ओर जिला पंचायत की आठ स्थाई समितियों में बुधवार को सभापति के चुनाव संपन्न हुए जिसमें सभी समितियों पर भाजपा के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। जबकि कांग्रेस का एक भी उम्मीदवार इस निर्वाचन में शामिल नहीं हुआ।

कुल मिलाकर बहुमत होने के बाद भी जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में मिली करारी शिकस्त का कलंक धोने के लिए भाजपा ने जिला पंचायत की समितियों के चुनाव में भाजपा यानी अपने समर्थकों को स्थान दिला दिया। इस मामले में जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह गूर्जर ने पूरी निर्वाचन प्रक्रिया को नियम विरुद्ध ठहराते हुए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व अन्य सदस्यों के साथ कमिश्नर कोर्ट में अपील करने और हाईकोट जाने की बात कही है।

समितियों के चुनाव के बाद एक बार फिर जिला पंचायत की राजनैतिक गलियों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। कुछ सदस्यों का कहना है कि जिला पंचायत की सभी समितियों में अब भाजपा का कब्जा है, लेकिन सवाल यह उठता है कि जब सदस्यों के ऊपर स्थानीय नेताओं का इतना भरोसा, वर्चस्व और बरदहस्त था, तो फिर अध्यक्ष का पद कांग्रेस के खाते में कैसे गया और क्यों गया? यह भी चर्चा का विषय भी बना हुआ है। जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष कांग्रेस के हैं, और भाजपा कैसे हारी यह सब छिपाने के लिए समिति के चुनाव में जिला पंचायत के सदस्यों को इन समितियों में एक्जस्ट कर दिया है। बता दें कि यह वही सदस्य हैं, जिन्होंने कांग्रेस की राधाबाई पटेल को जिला पंचायत का अध्यक्ष बनाया है। जानकारों का कहना है कि भाजपा के जिन सदस्यों ने क्रास वोटिंग की उन पर संगठनात्मक कार्यवाही की जानी चाहिये, लेकिन उन्हें समिति का सभापति बनाकर उपकृत कर दिया गया है। वहीं भाजपा अंदरखाने की माने तो जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी की जा रही है।

भाजपा ने चार पदाधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी :

जिला पंचायत अध्यक्ष पद भले ही भाजपा के पास न हो, लेकिन सदस्यों की संख्या के आधार पर जिला पंचायत की 8 स्थायी समिति में भाजपा निर्विरोध जीत गई। संगठन ने इस समिति के निर्वाचन के लिये भाजपा खेल प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक पीयूष शर्मा, पूर्व जनपद अध्यक्ष भगवती चौरे, सिवनीमालवा नपा अध्यक्ष रिंकू जैन, जिला उपाध्यक्ष सोनू दीक्षित, पूर्व जिला महामंत्री रघुवीर सिंह को सौंपी थी। जिसको लेकर पूर्व में ही भाजपा सदस्यों के साथ बैठकें आयोजित रणनीति तैयार कर ली गईं थीं, जिसमें सदस्यों को एकजुट कर सभी समितियों के चुनाव में अपना कब्जा जमा लिया है।

कोर्ट में जाएंगे असंतुष्ट :

जिला पंचायत समिति की निर्वाचन प्रक्रिया को कांग्रेस के सदस्यों ने असंवैधानिक बताते हुए कोर्ट की शरण लेने की बात कह रहे हैं। जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह पटेल और अध्यक्ष व अन्य सदस्य कमिश्नर के अलावा हाई कोर्ट में भी अपील करेंगे। इनका कहना है कि जो समिति बनाई गई है वह असंवैधानिक है। कुछ लोगों को सूचना भी नहीं दी गई और आनन-फानन में समिति का गठन किया गया जो कि नियम के विरुद्ध है। इस मामले को लेकर हाई कोर्ट की तैयारी में है। सदस्य पहले कमिश्नर कोर्ट में अपील करेंगे, इसके बाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

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