शिवपुरी: शासन की योजनाओं के धन को जिम्मेदारों ने डकारा
शिवपुरी/बैराड : नाले का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं बस्ती वासी। रवि सोलंकी

शिवपुरी: शासन की योजनाओं के धन को जिम्मेदारों ने डकारा

मध्य प्रदेश : नहीं है बिजली, पानी, स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्र, नाले का पानी पीने को मजबूर हैं ग्रामवासी, सभी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं ग्राम पंचायत खैरारा बनवारीपुरा की खैरमानी आदिवासी बस्ती।

शिवपुरी/बैराड, मध्य प्रदेश। शिवपुरी जिले के पोहरी अनुविभाग अंतर्गत बैराड तहसील क्षेत्र में आज के जमाने में भी एक ग्राम की आदिवासी ग्रामीण बस्ती इतने खस्ता हाल में जीवन बसर कर रही है, जिसे बयान करना शासन की योजनाओं को प्रत्येक ग्राम तक पहुंचाने की दंभ भरने वालों की कलई खोलना ही कहा जा सकता है।

अब जब शासन प्रशासन द्वारा प्रत्येक ग्राम को हर प्रकार की मूलभूत सुविधा से जोड़े जाने की बात कही जाती है। वहीं आज भी इस तरह के ग्राम हैं जहां मूलभूत सुविधाओं का पहुंचना तो क्या वहां के ग्रामवासी जानवरों जैसा जीवन बसर करते देखे जा रहे हैं। जहां स्थिति चौकाने वाली सामने आई है।

आजादी के इतने साल बीत जाने के बाद भी बैराड तहसील की इस ग्रामीण आदिवासी बस्ती में ना तो बिजली है, ना पानी है, ना स्कूल है और ना ही कोई आंगनबाड़ी केन्द्र ही हैं। यहां तक कि यहां के ग्रामीण आदिवासी नाले के दूषित पानी को पीकर जैसे तैसे अपना जीवन बसर कर रहे हैं।

जब मीडिया की टीम इस बस्ती तक पहुंची, तो वह देखकर दंग रह गई। जहां के हाल को हमारे संवाददाता ने अपने कैमरे में कैद कर लिया। ग्रामीणजनों की दयनीय स्थिति देखते नहीं बन रही थी। इस क्षेत्र के विधायक मध्यप्रदेश शासन में लोक निर्माण मंत्री होने के बावजूद उनके ही क्षेत्र में इस तरह से ग्रामीणों का जीवन बसर करना कई तरह के सवाल शासन व प्रशासन पर खड़े कर देता है। जिसका जबाव ना तो शासन के पास है और ना ही प्रशासन के पास।

जानकारी के अनुसार शिवपुरी जिले के पोहरी विधानसभा क्षेत्र के बैराड तहसील में स्थित ग्राम पंचायत खैरारा बनवारीपुरा की खैरमानी बस्ती के लोगों को आजादी के इतने साल बीत जाने के बाद आज भी किसी भी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। प्रत्येक ग्रामीण अंचल को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने का दंभ भरने वाले जिम्मेदारान यह जान लें कि बैराड तहसील की इस ग्राम पंचायत की आदिबासी बस्ती के लोगों को ना तो बिजली की सुविधा है और ही पीने के पानी की। यहां ना बच्चों को पढ़ने के लिये कोई स्कूल की सुविधा मुहैया कराई गई है और ना ही किसी आंगनबाड़ी केन्द्र को इस बस्ती से जोड़ा गया है।

यहां रहने वालों ने स्पष्ट शब्दों में बताया कि वे पीने का पानी भी दो से तीन किलोमीटर दूर निकले नाले से जाकर दूषित जल को पीकर अपना जीवनयापन करते चले आ रहे हैं। शासन की ओर से दी जाने वाली शौचालय की सुविधा के नाम पर महज खानापूर्ति होने के कारण ग्रामीणों को मजबूरन खुले में शौच करने जाना पड़ता है। बस्ती में बिजली नहीं होने से शाम ढलने के बाद दीपक की रोशनी का सहारा लेना पड़ता है। इन समस्याओं के साथ इस बस्ती के लोग पिछले कई बर्षों से जी रहे हैं, लेकिन इनकी समस्याओं को लेकर न स्थानीय प्रशासन जागरूक हैं न ही कोई जन प्रतिनिधि।

मजदूर, आदिवासियों के लिए बनाए थे आवास :

शिवपुरी जिले के पोहरी विधानसभा अंतर्गत बैराड़ तहसील की ग्राम पंचायत खैरारा बनवारीपुरा से 10 किलोमीटर दूर खैरमानी आदिवासी बस्ती का निर्माण सालों पहले करवाया गया था। इस बस्ती में करीब 250 से अधिक मजदूर निवास कर रहे हैं। लेकिन वे शासन की सभी मूलभूत सुविधाओं से वंचित होकर नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

सुविधाओं के अभाव में, सांप बिच्छू से रोज होता है सामना :

शासन प्रशासन द्वारा ग्रामीण अंचल में दी जाने वाली शासन की योजनाओं का लाभ मिलना तो दूर यहां मूलभूत सुविधाओं के अभाव में आलम यह है कि यहां पर लोगों को रोज सांप और बिच्छू का सामना करना पड़ता है। लोगों ने कई बार सरपंच सचिव और प्रशासन से समस्याओं को दूर किए जाने के संबंध में मांग भी की है। लेकिन अभी तक नतीजा सिफर है। पंचायत द्वारा आवास विकास की ओर से इस बस्ती को डेवलप किया गया था। गुजरते वक्त के साथ इस बस्ती में लोग बसते गए और वर्तमान समय में पूरी बस्ती आबादी में तब्दील हो गई। लोगों की माने तो जब तक हम गांव में निवास करते तब तक समस्याएं दूर हो जाती थीं लेकिन पांच साल पहले इस बस्ती को ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव के द्वारा बनाया गया है, जिसके बाद बस्ती में हर तरफ समस्याओं ने अपना घर बना लिया है। जिसकी वजह से लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने यह भी बताया कि बारिश होने पर बस्ती में पानी भर जाता है। जिसकी बजह से लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो जाते हैं। लोगों का यह भी कहना है कि कई बार तो घरों के अंदर तक पानी आ जाता है। जिससे समस्या और भी ज्यादा बढ़ जाती है। लोगों का कहना है कि बस्ती में लाइट की भी व्यवस्था नहीं है। जिससे रात के वक्त घर से बाहर निकलने में भी डर लगता है।

ग्रामीण बस्ती के चारों ओर है घना जंगल :

ग्राम पंचायत खैरारा बनवारीपुरा से 10 किमी दूर खैरमानी आदिवासी बस्ती वासियों का कहना है कि आसपास जंगली झाड़ियाँ एवं घना जंगल होने की वजह से जंगली जानवर घरों में घुस जाते हैं। बिजली ना होने से रात के अंधेरे में जंगली जानवरों से जान का खतरा हमेशा बना रहता है। कई बार यहां घटनाएं भी घटित हो चुकी हैं।

इनका कहना है :

मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है। मैं इस संबंध में जानकारी लगवाता हूं। इस तरह से जिन ग्रामवासियों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्हें शासन की सभी सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिये। मैं इस मामले को दिखवाता हूं।

- राजन वी नाडिया, एसडीएम, पोहरी

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