आर ओ प्लांट की जांच के पूर्व ही संचालक प्लांट पर ताला लगाकर भागा
आर ओ प्लांट की जांच के पूर्व ही संचालक प्लांट पर ताला लगाकर भागा|kratik Sahu-RE
मध्य प्रदेश

RO प्लांट की जांच के पूर्व ही संचालक प्लांट पर ताला लगाकर भागा

इंतजार करते-करते नायब तहसीलदार की तबीयत बिगड़ गई पर प्लांट की उज्जैन से आए अधिकारी ने नहीं की जांच, सील कर की इतिश्री

Gopal Mavar

Gopal Mavar

राजएक्सप्रेस। कोरोना महामारी के चलते एक पेयजल प्लांट से वितरण करने वाले पानी की शुद्वता पर सवाल उठाए गए थे इसको लेकर एसडीएम ने संबंधित विभाग अधिकारी को प्लांट की जांच करने के आदेश देकर एक मजिस्ट्रेट व चार पुलिस जवान भी उज्जैन से आए दल को उपलब्ध कराए। टीम ने संचालक को सूचना दी, तीन घंटे तक इंतजार किया इस दौरान नायब तहसीलदार की धूप के कारण तबीयत बिगड़ गई। उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। इतना होने के बाद भी टीम ने सिर्फ प्लांट को बाहर से ही सील कर पल्ला झाड़ लिया। इससे साफ हो गया की प्लांट संचालक से उज्जैन से आए अधिकारी की साठगांठ है। जिससे इस महामारी व भीषण गर्मी के कारण लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ की आशंका बढ़ गई।

शहर के आर ओ प्लांट पर एकाधिकार करने वाले अरिहंत प्लांट संचालक हमेशा पेयजल की शुद्धता को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं। दो-चार छोटे प्लांट को छोड़कर शहर के सभी आर ओ प्लांटो का अधिग्रहण कर लगभग शहर के पेयजल वितरण में एकाधिकार बना लिया है। बंद पानी की कैनो में पानी बेचने का लायसेंस मिला हुआ है। लॉकडाऊन के बाद टंकी से घर-घर जाकर कैने भरने का काम भी प्रारंभ कर दिया गया। इसकी अनुमति उनके पास है या नहीं यह जानकारी स्थानीय प्रशासन को भी नहीं है। प्लांट संचालक द्वारा शहर में बेचे जा रहे पानी की शुद्वता पर भी सवाल उठ रहे थे। एसडीएम आरपी वर्मा को शिकायत मिली थी इस पर उन्होंने खाद्य अपमिश्रण विभाग उज्जैन के अधिकारियों को प्लांट की जांच करने के आदेश दिए।

पहले तो की आना-कानी, दबाव बना तो आना पड़ा फिर भी...

इस पर उज्जैन के अधिकारियों ने आना-कानी भी की लेकन एसडीएम वर्मा द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर अवगत कराया तो खाद्य अपमिश्रण विभाग के अधिकारी को उज्जैन से भेजा गया। स्थानीय स्तर पर सिटी मजिस्ट्रेट की हैसियत से नायब तहसीलदार व चार पुलिसकर्मी अधिकारी को उपलब्ध कराए। सभी को लेकर अधिकारी बसंत शर्मा नायन स्थित अरिहंत आर ओ प्लांट पर गए भी सही, पर इनके जाने के पूर्व ही प्लांट संचालक को सूचना मिल गई थी तो, वह प्लांट पर ताला लगाकर भाग गया।

अधिकारी ने नहीं उठाया मोबाईल

यदि कोई प्लांट पर जांच करने टीम जाती है और प्लांट संचालक प्लांट पर ताला लगाकर भाग जाए तो टीम को अधिकार है कि, वह इसका पंचनामा बनाकर ताला तोड़कर जांच कर सकते हैं, पर अधिकारी ने यह नहीं करते हुए सिर्फ बाहर से ही प्लांट को सील कर पल्ला झाड़ कर उज्जैन चले गए। उज्जैन से आए अधिकारी शर्मा से उनके मोबाईल नंबर 9425915702 पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने मोबाईल अटैंड नही किया। जांच करने आए अधिकारी ने पल्ला झाड़ लिया इसलिए उन्होंने मोबाईल पर संपर्क करना उचित नहीं समझा।

शुद्धता पर उठ रहे प्रश्न-चिन्ह फिर भी जांच नहीं की

उक्त प्लांट से बेचे जाने वाले पेयजल की शुद्धता पर प्रश्न चिन्ह लगते आ रहे हैं, जब भी टीम जांच करने प्लांट पर जाती है तो संचालक को पूर्व मे ही इसकी सूचना मिल जाती है। और वह प्लांट बंद कर गायब हो जाता है। उज्जैन के जांच करने वाले विभाग के अधिकारियों से शायद पहले ही जानकारी मिल जाती है। टीम आती है और बिना जांच करे प्लांट सील करे चली जाती है। तीन दिन बाद सब सामान्य हो जाता है तो बिना जांच करे सील खुल भी जाती है।

फिर भी नहीं पसीजा दिल

उज्जैन से आए खाद्य अपमिश्रण के अधिकारी को स्थानीय अधिकारियों की टीम उपलब्ध कराई। एक नायब तहसीलदार और चार पुलिस के जवान के तीन घंटे प्लांट संचालक का इंतजार करना पड़ा। चिलचिलाती धूप के कारण नायब तहसीलदार अन्नु जैन की तबीयत खराब हो गई। उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा इसके बाद भी खाद्य अपमिश्रण के अधिकारी का दिल नहीं पसीजा और सिर्फ प्लांट बाहर से ही सील कर चले गए। जिससे स्थानीय अधिकारियों में उक्त अधिकारी के खिलाफ आक्रोश व्याप्त हो गया।

इनका कहना

अरिहंत आर ओ प्लांट की शिकायत मिलने पर विभाग के संबंधित अधिकारियों को जांच करने के लिए बुलाया था। नायब तहसीलदार और चार पुलिस के जवान भी उनको उपलब्ध कराए थे। नियमानुसार यदि प्लांट मालिक नहीं आ रहा था तो पंचनामा बनाकर ताला तोड़कर जांच करना चाहिए थी। उन्होंने क्यों नहीं की इसके लिए बात करूंगा।

आरपी वर्मा, एसडीएम नागदा

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