रिश्वत लेकर भिंड एसपी कर रहे थानों में पोस्टिंग
रिश्वत लेकर भिंड एसपी कर रहे थानों में पोस्टिंगSocial Media

रिश्वत लेकर भिंड एसपी कर रहे थानों में पोस्टिंग

पुलिस के संरक्षण में चलाया जा रहा रेत का अवैध उत्खनन, पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने लगाया आरोप, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र।

राजएक्सप्रेस। प्रदेश में जब कांग्रेस की सरकार थी तो यही एसपी कांग्रेस नेताओं के आगे पीछे घूमते थे, लेकिन सत्ता बदलते ही अपना रंग बदल दिया और अवैध कमाई में जुट गए। भिंड जिले में थानों में पदस्थी के नाम पर पैसे लिए जाते हैं, साथ ही यह भी तय किया जाता है कि मंथली भी चाहिए। यह आरोप पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने लगाते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को पत्र भी लिखा है।

पूर्व मंत्री डॉ. सिंह ने आरोप लगाया कि भिंड एसपी नागेंद्र सिंह द्वारा लॉकडाउन के दौरान व्यापक स्तर पर रेत का अवैध उत्खनन कराने का काम किया जा रहा है। जब पूरा देश कोरोना संक्रमण से लड़ रहा है और लॉक डाउन होने से लोग घरों में बंद हैं, ऐसे समय में पुलिस अधीक्षक भिंड ने जिले के 80 प्रतिशत से अधिक थाना प्रभारियों के तबादले किए। डॉ. सिंह ने बताया कि कई थाना प्रभारियों ने उनको बताया है कि एसपी के पास राशि पहुंचाने के लिए बिचौलिया लगे हैं और जब राशि देने से मना कर दिया तो उनके तबादले कर दिए। यह बात इससे प्रमाणित होती है कि डीआईजी चंबल रेंज ने 26 मई को श्योपुर से साथ लाकर वसूली करने वाले एक हवलदार एवं आरक्षक को निलंबित कर उसकी जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को दी गई है।

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में पूर्व मंत्री डॉ. सिंह ने उल्लेख किया है कि जिले में अवैध उत्खनन रोकने के लिए मैंने कई बार एसपी से कहा, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने इस तरफ कोई कार्रवाई न करते हुए अवैध उत्खनन को बढ़ावा दिया, क्योंकि अवैध उत्खनन करने वालों से एसपी मोटी राशि लेते हैं। अवैध उत्खनन नहीं रोका गया तो ग्राम ढौचरा में 26 मई को रेत माफियाओं के बीच गोलीबारी हुई जिसमें चार लोग गंभीर रूप से घायल हैं। पूर्व मंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि विधानसभा सत्र शुरू होने पर जिले के एसपी की काली करतूतों को विधानसभा में रखूंगा जिससे प्रदेश के लोग यह जान सकें कि भाजपा सरकार में किस तरह से अवैध उत्खनन के साथ ही पैसे लेकर तबादले करने का उद्योग चलता है। डॉ. सिंह ने मुख्यमंत्री से पत्र के माध्यम से मांग की है कि भिंड एसपी नागेंद्र सिंह द्वारा किए गए कृत्यों की जांच उसके अधीनस्थ कार्य करने वाले कनिष्ठ अधिकारी से कराना उचित नहीं होगा, इसलिए इसकी जांच उच्चस्तरीय जांच वरिष्ठ अधिकारियों की कमेटी बनाकर कराई जाए।

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