CM की घोषणा को लेकर बेरोजगार एक साथ
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मध्य प्रदेश

CM की घोषणा को लेकर बेरोजगार एक साथ, अधिकार लेने के लिए की तैयारी शुरू

भोपाल, मध्यप्रदेश: बाहरी राज्यों के युवाओं को भर्तियों में जगह ना देने के लिए प्रदेश के बेरोजगार हुए सक्रिय।

Shahid Kamil

भोपाल, मध्यप्रदेश। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा रोजगार में बाहरी राज्यों के लोगों का प्रवेश वर्जित करने की घोषणा के बाद प्रदेश के बेरोजगार सक्रिय हो गए हैं। मौजूदा समय में सरकार जो भर्ती प्रक्रिया कर रही हैं उसमें परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों ने अभी से अपना वास्तविक अधिकार लेने के लिए तैयारियां की हैं। चेतावनी दी गई है कि अगर विधानसभा उपचुनाव के पहले सरकार नियम लागू नहीं करती है तो इसका विरोध होगा। जिन क्षेत्रों में उपचुनाव होना है वहां बेरोजगार एकजुट होकर प्रमुख राजनीतिक दलों को घेरने की तैयारी करेंगे।

प्रदेश के युवा बेरोजगार नौकरी से हो रहे वंचित

वर्तमान में प्रदेश की सबसे बड़ी शिक्षक भर्ती परीक्षा के उत्तीर्ण अभ्यार्थी सामने आए हैं। इनका आरोप है कि शिक्षक भर्ती परीक्षा में सबसे अधिक बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों को नियुक्ति देने की तैयारी है। नतीजतन प्रदेश के युवा बेरोजगार नौकरी से वंचित हो रहे हैं। इन्होंने विषय वार तकनीकी खामियां गिनाते हुए कहा कि भर्ती परीक्षाओं में बड़ा भेदभाव हो रहा है। बताया गया कि जिस संस्कृत और हिंदी को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपए खर्च हो रहे। उस भाषा के पद को समाप्त करने के लिए अफसरों ने एक प्रकार से षड्यंत्र किया है। बेरोजगारों के संगठन का कहना है कि स्कूल शिक्षा विभाग एवं आदिम जाति विभाग के शिक्षकों के समस्त रिक्त पदों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों से स्थाई शिक्षकों की भर्ती कर क्षेत्र तथा प्रदेश से शिक्षित बेरोजगारी की समस्या को दूर किया जाए। ज्ञापन-पत्र के माध्यम से मांग की गई कि स्थाई शिक्षक-भर्ती की निष्पक्ष रूप से जांच हो तथा समस्त विषयों एवं भाषाओं को महत्व देते हुए स्थाई शिक्षक-भर्ती की जाए।

पात्र अभ्यर्थियों में दिखाई दे रहा आक्रोश

बताया गया कि, कई वर्षों के बाद प्रदेश में स्थाई शिक्षकों की भर्ती की जा रही है। उसके बावजूद रिक्त पदों के अनुपात में कम पद दर्शाने से पात्र अभ्यर्थियों में आक्रोश दिखाई दे रहा है। पात्र अभ्यर्थी लगातार कई दिनों से पद वृद्धि की मांग कर रहे हैं। इस मांग को लेकर पिछली कांग्रेस सरकार के समय शिक्षाषा मंत्री रहे प्रभु राम चौधरी के क्षेत्र सांची से लेकर भोपाल तक पात्र अभ्यर्थी आंदोलन एवं धरना प्रदर्शन भी कर चुके हैं। फिर भी हालात जस के तस रहे हैं। आरोप है कि एक ओर जहां भर्ती परीक्षाओं में विसंगतियां हैं तो दूसरी ओर इनमें बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों को सबसे अधिक जगह दी जा रही है। अगर उपचुनाव के पहले सरकार ने मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार नियम लागू नहीं किया तो विधानसभा के उपचुनावों में  शिक्षित युवा बेरोजगारों द्वारा सीधा विरोध किया जाएगा।

हमें उपचुनाव से पहले सीएम की घोषणा के अनुसार नियम चाहिए

इस आंदोलन के अगुआ नेता रंजीत गौर का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा से प्रदेश के शिक्षित युवा बेरोजगारों में आशा की एक नई किरण जागी है। उन्होंने बताया है कि जितनी भी भर्ती परीक्षाएं अभी तक हुई हैं उनमें सबसे अधिक एक षड्यंत्र के तहत बाहरी राज्यों के युवाओं को नियुक्ति का मौका दिया गया है। अगर इनके दस्तावेजों का ईमानदारी से परीक्षण हो तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। रंजीत का कहना है कि शिक्षक भर्ती परीक्षा में भी अधिकारी यही मन बनाए हुए हैं। नतीजतन सरकार उपचुनाव के पहले नए नियम लागू करें। अन्यथा इसका बड़ा विरोध किया जाएगा।

सीएम की घोषणा पर बेरोजगार आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं

बेरोजगार युवा संघ की महिला विंग अध्यक्ष ममता निगम का कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा जो घोषणा की गई है उसको प्रदेश के युवा बेरोजगार आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं। ममता निगम का कहना है कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों की भर्ती संबंधी जो परीक्षा कराई गई है। अभी उसकी प्रक्रिया पूर्ण नहीं हुई है। इस कारण सरकार मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार नियम बनाकर नए सिरे से शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू करें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो राज्य की धरती पर बड़ा विरोध बढ़ेगा।

विधानसभा क्षेत्रों में दलों को देखने को मिलेगी बेरोजगारों की ताकत

प्रदेश में बेरोजगारों के हितों का नेतृत्व कर रहे निष्कासित कर्मचारी नेता राजेश अहिरवार का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा का पालन होना शीघ्र ही जरूरी है। अगर अफसरशाही ने ऐसा नहीं किया तो राजनीतिक दलों को चुनाव में इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा है कि सेवा में बहाली की मांग कर रहे साक्षर भारत मिशन के निष्कासित प्रेरकों ने भी अब सरकार को ताकत दिखाना शुरू कर दी है। इस कारण सरकार को इन निष्कासित कर्मचारियों की मांग पर भी ध्यान देना होगा।

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