डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य छठ पर महिलाओं ने पानी में उतरकर की पूजा
डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य छठ पर महिलाओं ने पानी में उतरकर की पूजाRaj Express

Bhopal : डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य, छठ पर महिलाओं ने पानी में उतरकर की पूजा

रविवार को राजधानी में छठ पूजा का महापर्व बड़े ही उत्साह के साथ मनाया गया। यह पर्व चार दिनों का होता है। जिसमें रविवार का दिन खास था। महिलाओं ने शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया।

भोपाल, मध्यप्रदेश। लोक आस्था का महापर्व छठ भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही आज सोमवार को अल सुबह अर्घ्यदान के साथ संपन्न हो जाएगा। इससे पहले रविवार को राजधानी के छठ घाटों पर महिलाओं ने सूरज को अर्घ्य दिया। ऐसी मान्यता है कि पूरी आस्था के साथ अर्घ्य अर्पित करने वालों पर भगवान सूर्य की विशेष कृपा होती है। वे उसे अपने जैसा तेज प्रदान करते हैं। रोगों को हर लेते हैं। परिवार में सुख व शांति प्रदान करते हैं। उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ लोगों ने जन कल्याण की कामना की। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ छठ पूजा घाटों पर दिखी।

रविवार को राजधानी में छठ पूजा का महापर्व बड़ी उत्साह के साथ मनाया गया। यह पर्व चार दिनों का होता है। जिसमें रविवार का दिन खास था। महिलाओं ने शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। छठ महापर्व ही ऐसा पर्व है जहां डूबते सूरज की अराधना की जाती है। कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को व्रत रखने वाली महिलाएं शाम के समय डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर छठ माई से संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। श्रद्धा, भक्ति, आस्था और उमंग के साथ श्रद्धालुओं ने छठ का पहला अर्घ्य दिया। भविष्य पुराण में बताया गया है कि भगवान सूर्य को जल देने से आरोग्य और यश की प्राप्ति होती है। साथ ही युगों तक सूर्य लोक में स्थान प्राप्त होता है। छठ महापर्व नहाय खाय के साथ शुरू होता है और दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन सूर्य को पहला अर्घ्य और चौथे दिन सुबह दूसरा अर्घ्य दिया जाता है।

क्या है महत्व :

छठ पूजा के दौरान भगवान सूर्य और छठी मैया से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए महिलाएं 36 घंटे तक उपवास रखती हैं। छठ के पहले दिन को नहाय खाय कहा जाता है। श्रद्धालु नदी में स्नान करते हैं। वहीं छठ का पालन करने वाली महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान सूर्य के लिए प्रसाद तैयार करती है। दूसरे और तीसरे दिन को खरना और छठ पूजा कहा जाता है। इसके साथ ही चौथे दिन उषा अर्घ्य महिलाएं पानी में खड़े होकर उगते सूरज को अर्घ्य देती हैं और फिर अपना 36 घंटे का उपवास तोड़ती हैं।

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