Bhopal : राजधानी में 70 स्कूलों के समीप भीषण गंदगी बच्चों के लिए बनी खतरा
राजधानी में 70 स्कूलों के समीप भीषण गंदगी बच्चों के लिए बना खतराRaj Express

Bhopal : राजधानी में 70 स्कूलों के समीप भीषण गंदगी बच्चों के लिए बनी खतरा

भोपाल, मध्यप्रदेश : राजधानी की जेल प्रांगण में स्थित तात्या टोपे स्कूल के ठीक पीछे भारी घास उगी हुई है तो रहवासियों द्वारा यहां प्रतिदिन कचरा फेंका जा रहा है। जिससे मच्छरों का भारी प्रकोप बढ़ रहा है।

भोपाल, मध्यप्रदेश। राजधानी में 70 ऐसे विद्यालय हैं जहां पर भारी-भरकम गंदगी व्याप्त है। दो दिन पहले ही जिला शिक्षा अधिकारी ने इस संदर्भ में प्राचार्य को निर्देश दिए हैं। अब अगर कछुआ गति से काम हुआ तो बच्चे एक ओर जहां कोरोना से बचते हुए पढ़ाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके डेंगू की जकड़ में आने की संभावना है।

राजधानी की जेल प्रांगण में स्थित तात्या टोपे स्कूल के ठीक पीछे भारी घास उगी हुई है तो रहवासियों द्वारा यहां प्रतिदिन कचरा फेंका जा रहा है। जिससे मच्छरों का भारी प्रकोप बढ़ रहा है। शिक्षक स्वयं कह रहे हैं कि कक्षा संचालन के दौरान मच्छरों का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। गांधीनगर हायर सेकेंडरी स्कूल अर्से से गंदगी का साम्राज्य बना रहा है। यहां पर बाउंड्री होने के बाद भी प्रांगण में सुअर प्रवेश करते रहते हैं। गोदरमऊ स्कूल भी गंदगी से अछूता नहीं है। प्रांगण में जरूर साफ-सफाई है, लेकिन आसपास फैली गंदगी बच्चों के लिए संकट पैदा करने का संकेत दे रही है। बागसेवनिया, बागमुफ्ती, सुल्तानिया जैसे मिडिल और हायर सैकेण्डरी स्कूलों में स्वच्छता व्यवस्था का भारी अभाव है। अशोका गार्डन क्षेत्र में हर स्कूल गंदगी से जूझ रहा है। कन्या स्टेशन एरिया में बड़ा प्रांगण होने के बाद भी चौतरफा गंदगी फैली हुई है। कन्या गोविंदपुरा, राजाभोज में भी सफाई व्यवस्था की जरूरत है। भीम नगर मीरा नगर सहित अन्य क्षेत्रों में संचालित मिडिल एवं प्राइमरी सालों में बच्चों को बुलाया जा रहा है पर, स्वच्छता शासन के आदेश अनुसार स्वच्छता की भारी जरूरत है। जनशिक्षकों का कहना है कि 70 स्कूल ऐसे हैं जहां पर नियमित रूप से सफाई करवाना आवश्यक है। जिला शिक्षा अधिकारी नितिन सक्सेना का कहना है कि प्रशासन के निर्देश पर लगातार विद्यालयोंं में स्वच्छता विद्यालयों में सफाई प्रबंधों का जायजा लिया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि निरीक्षण टीमें निरंतर निरीक्षण कर रही हैं।

खुलने वाले आवासीय विद्यालयों पर खतरा :

सरकारी स्कूलों का संचालन होने के बाद अब राज्य शिक्षा केंद्र आवासीय छात्रावास संचालित करने की योजना बना रहा है। इसके लिए बाकायदा शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। कारण है कि मिडिल विभाग की कक्षाएं प्रारंभ हो गई है। अब इधर सवाल यह भी है कि कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए बच्चों को आवासीय छात्रावासों में तो बुलाया जा रहा है, लेकिन दूसरी चुनौती भी सामने है। एक तरफ कोरोना से बचाव करना है तो ओर डेंगू जैसी घातक बीमारी से भी बच्चों को सुरक्षित रखना है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि बीमारियों से बचाव के लिए सभी प्राचार्य को निर्देशित कर दिया गया है।

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