किसानों को बेवकूफ बनाना अब आसान नहीं, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का बयान
किसानों के समर्थन में पूर्व सीएम कमलनाथ ने दिया बयान Syed Dabeer Hussain - RE

किसानों को बेवकूफ बनाना अब आसान नहीं, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का बयान

भोपाल, मध्यप्रदेश: किसानों के समर्थन में पूर्व सीएम कमलनाथ ने भी बयान जारी किया है। जिसमें पहले के और आज के किसानों में अंतर बताया है।

भोपाल, मध्यप्रदेश। प्रदेश में महामारी कोरोना का संकट जहां संक्रमण के मामलों के साथ थमने का नाम नहीं ले रहा है वहीं संकटकाल के बीच नए कृषि कानून को लेकर किसानों का प्रदर्शन बढ़ता ही जा रहा है इस बीच ही भारत बंद के आह्वान के बाद जहां कांग्रेस नेताओं का विरोध प्रदर्शन किसानों के समर्थन में शुरू हुआ था वहीं इस मुद्दें पर पूर्व सीएम कमलनाथ ने भी बयान जारी किया है। जिसमें पहले के और आज के किसानों में अंतर बताया है।

किसान आंदोलन को लेकर बोले पूर्व सीएम कमलनाथ

इस संबंध में, मीडिया के सवालों में किसान आंदोलन के सवाल पर जवाब देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि, किसानों को बेवकूफ बनाना कि वे इतनी संख्या में यहां इकट्ठे हुए हैं? 30 साल पहले और अब के किसानों में बहुत बड़ा अंतर है। किसानों को आज बहुत बेहतर जानकारी है। साथ ही पहले बयान देते हुए कहा था कि, “किसान” भारत का पर्यायवाची है, हम किसानों के साथ थे, हम किसानों के साथ हैं,हम किसानों के साथ रहेंगे। साथ ही आज भारत बंद के आह्वान पर भी समर्थन जताया है।

इससे पहले किसानों का समर्थन कर नेता दिग्गी समेत कांग्रेसी दे चुके है ज्ञापन

इस संबंध में, आज यानि मंगलवार को कृषि कानून के विरोध में वरिष्ठ नेता दिग्विजय के साथ बड़े कांग्रेसी नेता सज्जनसिंह वर्मा जी जीतू पटवारी जी विधायक विशाल पटेल जी विधायक संजय शुक्ला जी कांग्रेस अध्यक्ष श्री विनय बाकलीवाल जी चिंटू चौकसे जी शेख अलीम जी पहुंचे। जहां छावनी मंडी के गेट पर पहुंचकर कांग्रेसियों ने वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के साथ बिल वापस लेने को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ देर यहां रुकने के बाद कांग्रेसियों ने वहां मौजूद पुलिस-प्रशासन से मंडी में भीतर जाकर किसानों से चर्चा करने की बात कही। इसके बाद सभी कांग्रेसी मंडी के भीतर पहुंचे और मंडी का एक चक्कर लगाने के बाद हम्माल और तुलाई वालों से बात की। जहां इसके बाद तुलाई वाली जगह पर खड़े होकर वरिष्ठ नेता सिंह ने अपना उद्धबोधन दिया, तो वहीं प्रशासनिक अधिकारी को राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया।

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