भोपाल: गैस पीड़ितों ने उठाई मांग, स्थाई क्षति के लिए डाव केमिकल दे मुआवजा
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भोपाल: गैस पीड़ितों ने उठाई मांग, स्थाई क्षति के लिए डाव केमिकल दे मुआवजा

भोपाल, मध्यप्रदेश: गैस काण्ड के पीड़ितों के 4 संगठनों ने महामारी से साबित हुए दूरगामी शारीरिक क्षति के लिए डाव केमिकल से अतिरिक्त मुआवजें की मांग की।

भोपाल, मध्यप्रदेश। प्रदेश में वैश्विक महामारी कोरोना का प्रकोप जहां जारी है वहीं दूसरी तरफ महामारी में हुए नुकसान को लेकर आज एक पत्रकार वार्ता में भोपाल गैस काण्ड के पीड़ितों के 4 संगठनों ने यह मांग की कि कोरोना महामारी से साबित हुए दूरगामी शारीरिक क्षति के लिए यूनियन कार्बाइड और उसके मालिक डाव केमिकल अतिरिक्त मुआवजा दे। संगठनों ने आधिकारिक दस्तावजों से यह दर्शाया कि गैस पीड़ित आबादी में कोरोना की वजह से मृत्यु दर जिले की अपीड़ित आबादी से 6.5 गुना ज्यादा है।

प्रेस वार्ता में संगठनों ने रखी अपनी बात

इस संबंध में प्रेस वार्ता के दौरान चार संगठनों ने अपनी बात रखी है। जिसमें भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्षा श्रीमती रशीदा बी ने कहा कि, "कोरोना महामारी ने इस सरकारी झूठ का पर्दाफाश किया है कि यूनियन कार्बाइड की जहरीली गैसों से 93% पीड़ितों को अस्थाई क्षति पहुँची है।" वहीं भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खां ने कहा कि, हमारे पास मौजूद सरकारी दस्तावेज यह दर्शाते हैं, कि भोपाल जिले में कोरोना महामारी की वजह से हुई 56% मौतें गैस पीड़ित आबादी में हुई है जो भोपाल जिले की आबादी का मात्र 17% ही है।"अब भारत सरकार को चाहिए की यह तथ्य और साथ ही गैस राहत अस्पतालों के रिकार्ड सर्वोच्च न्यायालय में लंबित सुधर याचिका में पेश करे और कंपनी से अतिरिक्त मुआवजा दिलवाए।"

महामारी ने पीड़ितों के साथ हुई नाइंसाफी को किया उजागर

भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एन्ड एक्शन की रचना ढिंगरा ने कहा कि यूनियन कार्बाइड के खुद के दस्तावेज यह बताते हैं कि मिथाइल आइसो सायनेट (MIC) के असर से स्थाई क्षति पहुँचती है, इसके बावजूद 90% पीड़ितों को अस्थाई रूप से क्षतिग्रस्त मानते हुए मात्र 25,000 मुआवजा दिया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि, विश्वव्यापी महामारी ने विश्व कि भीषणतम हादसे के पीड़ितों के साथ हुई नाइंसाफी को साफ़ उजागर कर दिया है", "कोरोना महामारी के बहाने से डाव केमिकल ने हज़ारों मजदूरों की छंटनी की है और सैनिटाइजर के उत्पादन से मुनाफ़ा कमा रही है लेकिन जब महामारी से उसी के अधीन कंपनी के द्वारा ढाई गई स्थाई क्षति उजागर होती है तो डाव नज़र फेर लेती है। डाव-कार्बाइड के खिलाफ नौशीन खान ने भोपाल में यूनियन कार्बाइड के लंबित दीवानी, आपराधिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों से डाव केमिकल भाग रही है।"

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