Nagar Nigam Election 2022 : धर्म नहीं, समस्याएं होंगी निगम चुनाव का मुद्दा
Nagar Nigam Election 2022Syed Dabeer Hussain - RE

Nagar Nigam Election 2022 : धर्म नहीं, समस्याएं होंगी निगम चुनाव का मुद्दा

भोपाल, मध्यप्रदेश : लोकसभा और विधानसभा चुनाव में धर्म का मुद्दा हमेशा उठता है। लेकिन राजधानी में हो रहे निकाय चुनाव में यह मुद्दा नजर नहीं आएगा। इस बार चुनाव में सिर्फ समस्याएं ही रखी जाएंगी।

भोपाल, मध्यप्रदेश। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में धर्म का मुद्दा हमेशा उठता है। लेकिन राजधानी में हो रहे निकाय चुनाव में यह मुद्दा नजर नहीं आएगा। इस बार चुनाव में सिर्फ समस्याएं ही रखी जाएंगी। इसके लिए वार्डों के दावेदार अपने-अपने इलाकों की समस्याओं की फहरिस्त बना रहे हैं। नए शहर में सड़क, सीवेज और पानी मुद्दा है तो वहीं पुराने शहर में पेंशन, राशन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड बनवाने के दावे किए जा रहे हैं। इसके अलावा वैध-अवैध कॉलोनियों की समस्या भी चुनावी मुद्दे में शामिल है।

अगर आपको राशन कार्ड के लिए किसी जनप्रतिनिधि के साईन करवाना हैं तो पार्षद ही आसानी से उपलब्ध हो सकता है। इसके अलावा सड़क, नाली, सीवेज लाईन, स्ट्रीट लाईट, पानी सप्लाई जैसी मूलभूत सुविधाओं के काम भी पार्षद के ही अंडर में आते हैं। सीधे तौर पर एक वार्ड की हर समस्या को सुलझाने का हुनर पार्षद के पास रहता है। इसलिए निकाय चुनाव में मतदाता धर्म-जाति की जगह समस्याओं को प्राथमिकता देते हैं और उसी के आधार पर अपना नेता चुनते हैं।

जाति-धर्म नहीं, चाहिए समस्या सुलझाने वाला नेता :

नगर निगम चुनाव में इस बार जाति-धर्म मुद्दा नहीं रहेगा। इधर मतदाता भी इस मुद्दे से दूर नजर आ रहे हैं और ऐसे प्रत्याशियों को ही पार्षद चुनने का मन बना चुके हैं, जो वार्ड की समस्याएं सुलझा सके। वार्डों में मतदाता भी एक-दूसरे से यही चर्चा कर रहे हैं कि प्रत्याशियों को पहले से समस्याओं से अवगत कराएंगे, जो समस्याएं दूर करने का भरोसा दिलाएगा, उसे ही चुनेंगे।

इन मुद्दों पर होंगे चुनाव :

पुराने शहर के अधिकांश वार्डों में पेंशन, राशन कार्ड जैसी समस्याएं हैं। यहां निवास करने वाली आबादी गरीब तबके की है, जो सरकारी योजनाओं पर ही आश्रित है। इसके अलावा शहर के दूसरे वार्डों में माजूद झुग्गी बस्तियों में भी कुछ ऐसे ही मुद्दे हैं। जबकि नए शहर में सड़क, सीवेज, स्ट्रीट लाईट की समस्या है। परिसीमन के बाद शामिल हुई कॉलोनियों में भी सीवेज और सड़क की समस्याएं हैं। ऐसे ही निगम को अब तक ट्रांसफर नहीं होने वाली अवैध कॉलोनियों के रहवासी भी कॉलोनी को वैध कराने के नाम पर ही नेता चुनेंगे।

पहले चरण में भोपाल भी शामिल :

पहले चरण में प्रदेश की 11 नगर निगमों में चुनाव होंगे। इसमें भोपाल नगर निगम भी शामिल है। इसके अलावा इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, उज्जैन, सागर, सिंगरौली और सतना पहले चरण के मतदान में शामिल है। पहले चरण 6 जुलाई को, जबकि नतीजे 17 जुलाई को घोषित हो जाएंगे। यानि इसी दिन पता चल जाएगा कि शहर की सरकार कांग्रेस बनाएगी या बीजेपी।

नॉमिनेशन की फीस है तय :

अगर आप महापौर का चुनाव लड़ना चाहते हैं तो आपको नॉमिनेशन पत्र के साथ 20 हजार रुपए जमा करने होंगे। जबकि नगर निगम में पार्षद पद के लिए नॉमिनेशन पत्र के साथ 5 हजार रुपए जमा करने होंगे। यह जमानत राशि भी है। अगर चुनाव परिणाम में एक तिहाई से कम वोट मिले तो यह राशि वापस नहीं मिलती। इसे ही जमानत जब्त होना कहते हैं।

एक साथ लड़ सकते हैं महापौर और पार्षद का चुना :

निकाय चुनाव में एक उम्मीदवार महापौर और पार्षद का चुनाव एक साथ लड़ सकता है। लेकिन उस व्यक्ति की उम्र 25 साल होना जरूरी है। निकाय चुनाव में शैक्षणिक योग्यता की कोई शर्त लागू नहीं है। लेकिन नामांकन पत्र में पूरी जानकारी देनी होगी, जिसमें उम्मीदवार की पढ़ाई और उसका पूरा विवरण होना जरूरी है।

दो मत का उपयोग करेंगे मतदाता :

भोपाल नगर निगम चुनाव में महापौर का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से हो रहा है। ऐसे में वोटर को यहां दो वोट देने होंगे, एक पार्षद पद के उम्मीदवार को, जबकि दूसरा महापौर पद के उम्मीदवार के लिए होगा। इसके लिए मतदान स्थल पर ही पीठासीन अधिकारी पूरी जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

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