Bhopal : हलाली नदी में तीन बच्चे डूबे, दो की मौत, एक की बचा ली जान
हलाली नदी में तीन बच्चे डूबे, दो की मौत, एक की बचा ली जानसांकेतिक चित्र

Bhopal : हलाली नदी में तीन बच्चे डूबे, दो की मौत, एक की बचा ली जान

भोपाल, मध्यप्रदेश : ईटखेड़ी के बच्चे गणेश विसर्जन देखने गए थे, पैर फिसलने से हुआ हादसा। बच्चों की मृत देह में जान फूंकने के लिए परिजनों ने दो घंटे तक नमक के ढेर में दबाया।

भोपाल, मध्यप्रदेश। ईटखेड़ी थाना क्षेत्र स्थित हलाली नदी में डूबने से दो बच्चों की मौत हो गई। घटना मंगलवार दोपहर की है। ईटखेड़ी में रहने वाले तीन बच्चे गणेश विसर्जन देखने नदी के घाट पर गए थे। वहां खेलते-खेलते फिसलने से वे नदी में जा गिरे। वहां मौजूद लोगों ने एक बच्चे की जान बचा ली जबकि दो बच्चों की मौत हो गई। बच्चों की मौत पर परिजनों को भरोसा नहीं हुआ। संजीवनी अस्पताल के शवगृह में ही परिजनों ने दोनों बच्चों के शवों को नमक के ढेर में इसलिए दबा दिया कि वे जिंदा हो जाएंगे।

पुलिस के मुताबिक घटना मंगलवार दोपहर करीब एक बजे की है। ईटखेड़ी इलाके में रहने वाले तीन बच्चे पर्व परिहार (9), सरस माली (7) और युवराज माली करीब 300 मीटर दूर हलाली नदी के घाट पर गणेश विसर्जन देखने गए थे। पर्व परिहार के चचेरे भाई संजय परिहार ने बताया कि मैं घर में था। इसी बीच किसी ने मुझे बताया कि एक लड़का नदी में डूब गया है। मैं तुरंत घर से भागा। अपने दो साथियों की मदद से एक लड़के युवराज को निकाल लिया। युवराज के परिजन उसे अस्पताल लेकर चले गए। हम लोग भी घर आने लगे। इसी बीच नदी के पास खड़ी एक बच्ची ने बताया कि तीन बच्चे डूबे हैं। हम लोगों को पहले बच्ची की बातों पर भरोसा नहीं हुआ। बाद में बच्ची ने डूबने वाली जगह बताई। हम लोगों ने रेस्क्यू शुरू किया। करीब पांच मिनट बाद मेरे चचेरे भाई पर्व का शव मिला। इसके दो मिनट बाद सरस का शव मिला। पर्व इस साल पहली कक्षा में गया था।

दूसरी बार घाट पर चला गया था पर्व :

बताया जाता है कि पर्व परिहार सुबह अपने पिता के साथ घाट पर घूमने गया था। घाट से उसका घर करीब 300 मीटर दूर है। दोपहर में अपने भाई संजय के साथ खाना खाने के बाद वह खेलने की बात कहकर घर से निकल गया। थोड़ी देर बाद वह मोहल्ले में रहने वाले साथियों के साथ नदी पर पहुंच गया। जहां खेलते-खेलते तीनों बच्चे नदी में गिर गए। लोगों ने बच्चों को पत्थर उछालकर खेलते देखा था। ईंटखेड़ी थाना प्रभारी सुनील चतुर्वेदी का कहना है कि जिस जगह हादसा हुआ वहां विसर्जन नहीं किया जाता। तीसरे बच्चे युवराज के बयान हो गए हैं। उसने बताया है कि हम तीनों दोस्त नदी के किनारे हाथ पकड़कर खेल रहे थे। तभी पैर फिसलने से तीनों दोस्त नदी में गिर गए।

नमक के ढेर में दबा दिए बच्चों के शव :

पानी से निकालकर बच्चों को अस्पताल ले जाया गया था, जहां पर्व और सरस को मृत घोषित कर दिया गया। दोनों बच्चों को संजीवनी अस्पताल ने जब मृत घोषित कर दिया तो परिजनों को भरोसा नहीं हुआ। अंधविश्वास के चलते मृत बच्चों के परिजनों ने दोनों बच्चों को संजीवनी अस्पताल में ही ढेर सारे नमक के ढेर में दबा दिया। परिजनों को भरोसा नहीं हो रहा था उनके बच्चे अब इस दुनिया में नहीं रहे। अस्पताल के शव गृह में वे बच्चों की देह को नमक के ढेर में दबाकर जान फूंकने की कोशिश करते रहे। बाद में अस्पताल पहुंची ईटखेड़ी पुलिस ने परिजनों को समझाइश देकर दोनों बच्चो के शवों को नमक के ढेर से बाहर निकाला।

नमक के ढेर में दबा दिए बच्चों के शव
नमक के ढेर में दबा दिए बच्चों के शवRaj Express

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