Bhopal : आज मुख्यमंत्री शिवराज ने भील कलाकार, पद्मश्री भूरी बाई के साथ लगाए ये पौधे
CM ने भूरी बाई के साथ लगाए ये पौधेSocial Media

Bhopal : आज मुख्यमंत्री शिवराज ने भील कलाकार, पद्मश्री भूरी बाई के साथ लगाए ये पौधे

भोपाल, मध्यप्रदेश : सीएम ने भूरी बाई के साथ लगाए 2 पौधे, इस अवसर पर कहा- अपनी कला के लिए प्रसिद्ध बहन भूरी बाई अब अपने चित्रों माध्यम से लोगों को पर्यावरण के प्रति भी जागरुक कर रही हैं।

भोपाल, मध्यप्रदेश। एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पौधारोपण की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज भील कलाकार, पद्मश्री भूरी बाई के साथ राजधानी भोपाल के स्मार्ट उद्यान में दो पौधे लगाए हैं। इस अवसर पर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अपनी कला के लिए प्रसिद्ध बहन भूरी बाई अब अपने चित्रों माध्यम से लोगों को पर्यावरण के प्रति भी जागरुक कर रही हैं।

आज सीएम ने लगाया गुलमोहर और पीपल का पौधा :

मिली जानकारी के मुताबिक आज सीएम ने भोपाल के स्मार्ट पार्क में भील कलाकार, पद्मश्री भूरी बाई जी के साथ गुलमोहर और पीपल का पौधा लगाया है। सीएम ने कहा कि पीपल एक छायादार वृक्ष है। पर्यावरण शुद्ध करता है। इसका धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व भी है। प्रकृति विज्ञान के अनुसार पीपल का वृक्ष दिन-रात ऑक्सीजन छोड़ता है जो हमारे पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है। वही एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने गुलमोहर का महत्व बताया, कहा- गुलमोहर को विश्व के सुंदरतम वृक्षों में से एक माना गया है।गुलमोहर की सुव्यवस्थित पत्तियों के बीच बड़े-बड़े गुच्छों में खिले फूल इस वृक्ष को अलग ही आकर्षण प्रदान करते हैं।गर्मी के दिनों में गुलमोहर के पेड़ पत्तियों की जगह फूलों से लदे हुए रहते हैं।यह औषधीय गुणों से भी समृद्ध है।

भूरी बाई ने चित्रकारी का सफर समकालीन भील कलाकार के रूप में प्रारंभ किया : CM

बता दें कि झाबुआ जिले के पिटोल गांव में जन्मी पद्मश्री भूरी बाई ने चित्रकारी का सफर समकालीन भील कलाकार के रूप में प्रारंभ किया। भूरी बाई कागज व कैनवास का इस्तेमाल करने वाली पहली भील कलाकार हैं। भारत भवन के तत्कालीन निदेशक जे.स्वामीनाथन ने उन्हें कागज पर चित्र बनाने के लिए प्रेरित किया।

सीएम ने कहा कि जंगल में जानवर, वृक्षों की शांति तथा गाटला (स्मारक स्तंभ), भील देवी-देवता, पोशाक, गहने, टेटू, झोपड़ियां, अन्नागार, हाट उत्सव आदि के साथ नृत्य और मौखिक कथाओं सहित भील जीवन के प्रत्येक पहलू को अपनी कला में समाहित किया है। हाल ही में उन्होंने वृक्षों और जानवरों के साथ-साथ, हवाई जहाज, टेलीविजन, कार तथा बसों के चित्र भी बनाना शुरू किए हैं। भूरी बाई की चित्रकारी देश में ही नहीं विदेशों में भी सराही जाती है। वही आगे कहा कि पद्मश्री भूरी बाई भोपाल आदिवासी लोक कला अकादमी में एक कलाकार के तौर पर कार्य करती हैं और इन्हें मध्यप्रदेश सरकार ने सन् 1986-87 में अपने सर्वोच्च पुरस्कार शिखर सम्मान से नवाजा है। साथ ही 1998 में प्रदेश सरकार ने इन्हें अहेलिया सम्मान से भी विभूषित किया है।

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