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मध्य प्रदेश

किसान हितों के लिए केंद्र से चर्चा करें प्रदेश भाजपा सदस्य: कमलनाथ

मध्यप्रदेश विधानसभा में आज किसानों से जुड़े मुद्दे जैसे बोनस आदि को लेकर हुयी तीखी नोंकझोंक और सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करना पड़ी।

Priyanka Yadav

Priyanka Yadav

राज एक्सप्रेस। मध्यप्रदेश विधानसभा में आज किसानों से जुड़े मुद्दे जैसे बोनस आदि को लेकर सत्तारूढ़ दल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भाजपा के सदस्यों के बीच तीखी नोंकझोंक हुयी और सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करना पड़ी। वहीं भाजपा के सदस्यों ने बहिर्गमन भी किया। प्रश्नकाल में विधायक देवेंद्र वर्मा ने राज्य में अतिवृष्टि और इसके कारण फसलों को क्षति पहुंचने का मामला उठाया था। इस पर अनुपूरक सवाल और जवाब के दौरान मामला गेंहू के बोनस पर आ गया और इसी बात को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा-

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज विधानसभा में कहा कि, किसानों को बोनस देने के कारण केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार के निर्धारित कोटे से 7 लाख टन खाद्यान्न खरीदने से इंकार कर दिया है। उन्होंने इस बात पर भी अफसोस जताया कि, प्रदेश में पिछले दिनों हुई अतिवृष्टि के कारण 8 हजार करोड़ रूपयों के नुकसान को लेकर प्रदेश के 28 भाजपा सांसदों में से एक ने भी इस मुद्दे को केन्द्र सरकार के समक्ष नहीं उठाया। मुख्यमंत्री ने प्रश्नकाल के दौरान अतिवृष्टि के कारण हुई क्षति के संबंध में अनुपूरक प्रश्नों के दौरान हस्तक्षेप करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यह भी कहा, यह दु:खद है "कि किसानों को बोनस देने के कारण प्रदेश से क्रय किये जाने वाले खाद्यान्न के कोटे में से 7 लाख टन खाद्यान्न केन्द्र सरकार नहीं लेगी। केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर सूचित किया है। अतिवृष्टि से हुए नुकसान के लिए भी केन्द्र से पर्याप्त सहायता राज्य सरकार को नहीं मिली है।"

मुख्यमंत्री ने कहा-

किसानों के हितों की वाकई में भाजपा को चिन्ता है तो वह दोनों मुद्दों को लेकर केन्द्र सरकार से चर्चा करें और राज्य सरकार को राहत दिलवाये। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र और किसानों का हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि, किसानों के साथ न्याय हो, इसके लिये सरकार प्रतिबद्ध है।

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