पार्टी से उलट बीजेपी विधायक त्रिपाठी का रवैया
पार्टी से उलट बीजेपी विधायक त्रिपाठी का रवैया|Social Media
मध्य प्रदेश

पार्टी से उलट BJP विधायक त्रिपाठी का रवैया, कहा- विकास के साथ हूं

भोपाल, मध्यप्रदेश: प्रदेश की राजनीति में कब क्या मोड़ सामने आ जाए कहा नहीं जा सकता, इस बीच अपनी ही पार्टी से उलट नजर आया बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी का रवैया।

Deepika Pal

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राज एक्सप्रेस। मध्यप्रदेश की राजनीति में कब क्या नए मोड़ सामने आ जाएं कहा नहीं जा सकता है एक ओर जहां विधानसभा सत्र आगामी तारीख के लिए स्थगित हो गया है तो वहीं बीजेपी ने फ्लोर टेस्ट की मांग को लेकर ली है सुप्रीम कोर्ट की शरण। इन सब गतिविधियों के बीच मैहर से बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी का अपनी पार्टी से अलग ही रवैया सामने आया है। जिसमें जहां राजभवन में बीजेपी विधायकों की परेड करवाई जा रही थी तो विधायक त्रिपाठी मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिलने पहुंचे थे। साथ ही कमलनाथ सरकार द्वारा बागी विधायकों को मनाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

सीएम कमलनाथ से मिलने पहुंचे त्रिपाठी

इस संबंध में पहले भी कमलनाथ सरकार के पक्ष में बयान दे चुके बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी ने कहा कि, मैहर को जिला बनाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ से चर्चा करने पहुंचा हूं, हां मैं राजभवन नहीं गया, मैं अपने क्षेत्र के विकास के साथ हूं, फिलहाल अभी तो मुख्यमंत्री कमलनाथ ही है और सरकार पर कोई संकट नहीं है। बता दें कि, पूर्व में विधायक त्रिपाठी ने जुलाई में मध्य प्रदेश विधान सभा में दंड विधि संशोधन विधेयक पर कमलनाथ सरकार का साथ देते हुए पार्टी लाइन से अलग हटकर क्रॉस वोटिंग की थी। साथ ही कहा था कि मैहर का विकास नहीं करने के कारण मैं बीजेपी से नाराज हूं।

बागी विधायकों को मनाएंगे विधायक शेरा

सूत्रों के मुताबिक, बागी विधायकों को मनाने के प्रयास जहां कमलनाथ सरकार कर रही है वहीं हाल ही में चर्चा में आए निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा बागी विधायकों को मनाने के लिए पहुंच सकते हैं। साथ ही उन्होंने दावा करते हुए कहा कि, सरकार के पास पर्याप्त विधायक हैं इसलिए सरकार पूरे 5 साल चलेगी। इधर पूर्व सीएम दिग्गी ने बीजेपी पर सवाल करते हुए कहा कि, यदि बीजेपी के पास बहुमत है तो फिर कोर्ट क्यों गई। इस पर कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने कहा कि, अगर बीजेपी कोर्ट गयी है तो हम भी कोर्ट में उसका जवाब देंगे। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगता है तो ये लोकतांत्रिक तरीक़े से अवैधानिक होगा।

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