Indore : छत का सपना अब निर्माण सामग्री पर पड़ रहा भारी
निर्माण सामग्री के दामों में आई तेजीRaj Express

Indore : छत का सपना अब निर्माण सामग्री पर पड़ रहा भारी

इंदौर, मध्यप्रदेश : ईंट, सीमेंट, गिट्टी सहित सभी सामग्री महंगी हो गई है। आम आदमी का अपनी छत का सपना अब निर्माण सामग्री पर भारी पड़ रहा है। यह सपना महंगाई की मार की वजह से हकीकत नहीं बन पा रहा है।

इंदौर, मध्यप्रदेश। ईंट, सीमेंट, गिट्टी सहित सभी सामग्री महंगी हो गई है। आम आदमी का अपनी छत का सपना अब निर्माण सामग्री पर भारी पड़ रहा है। यह सपना लगातार महंगाई की मार की वजह से हकीकत नहीं बन पा रहा है। निर्माण सामग्री के अलावा बिजली उपकरणों के साथ ही लोहा तक के दामों में भारी उछाल आया है। जानकारों के अनुसार आज की स्थिति में लोहा मार्केट में मोल भाव करो तो व्यापारी सीधा डीजल का रोना रो देता है। अचानक बढ़े दामों की वजह से लोगों ने अपने आवासों का निर्माण बंद करना शुरू कर दिया है। दरअसल बीते कुछ समय में भवन निर्माण में काम आने वाली सामग्री में शामिल रेत, सीमेंट, गिट्टी, ईंट, लोहे के दामों में अचानक वृद्धि हो गई है। खास बात यह है कि इनमें दामों में कमी की जगह और वृद्धि होने की संभावना बनी हुई है। इस महंगाई का शिकार वे लोग भी हो रहे हैं जिनके द्वारा बिल्डरों के प्रोजेक्ट में फ्लैट, ड्यूप्लेक्स बुक करवाए हुए हैं।

तेजी से आया उछाल :

हाल ही में रेत की कीमतों में भी तेजी से उछाल आया है। रेत की कीमतों में 40 रुपए घन फीट से बढ़कर 45 रुपए घनफीट तक की सर्वाधिक वृद्धि हुई है। इसी तरह सीमेंट की एक बोर की कीमत में भी 40 रुपए तक की तो गिट्टी के भावों में भी जो पहले 630 रुपए घन मीटर थी वो अब 700रुपए घन मीटर हो गई है। इसके अलावा लोहा के दाम भी आसमान छूने लगे हैं। बताया जा रहा है कि अचानक हुई इन दामों में वृद्धि की वजह है, डीजल के दामों का बढ़ना। निर्माण सामग्री के सप्लायर का कहना हैं कि माल की ढुलाई महंगी होने की वजह से इनके दामों में तेजी बड़ी वजह है। इससे सभी तरह की सामग्री महंगी हो गई है। सूत्रों के अनुसार इंदौर के आसपास के नदी के घाट बंद होने से रेत पर पूरी तरह रोक लगी हुई है। यहां सिर्फ जिन लोगों ने स्टॉक किया हुआ है वहीं माल सप्लाई कर पा रहे हैं। हालांकि इनके पास भी नाम मात्र का स्टॉक है।

इस तरह आया बदलाव :

पहले सीमेंट 325रुपए प्रति बोरी थी जो बढ़कर 360 रुपए प्रति बोरी तक पहुंच गई। गिट्टी पहले 630 रुपए घन मीटर थी जो अब 700रुपए घन मीटर हो गई है। ईंट पहले 6 रुपए में मिल रही थी, वहीं अब 8 रुपए तक पहुंच गई है। रेत 40 रुपए घनफीट से बढ़कर 45 रुपए घनफीट तक हो गई है। जो लोहा 51 रुपए प्रति किलो मिल रहा था वो अब 65 रुपए प्रति किलो पहुंच गया है। पीवीसी प्रोडक्ट पिछले एक साल में 50 प्रतिशत तक बढ़े हैं। वायर के पिछले एक साल में 70 प्रतिशत तब भाव बढे हैं। प्लंबिंग आयटम पिछले सालों के मुकाबले इस बार करीब 50 प्रतिशत बढ़ गए हैं।

अधिकांश बड़े निर्माण प्रोजेक्ट का काम रुका :

व्यवसायियों का कहना हैं पहले ही दो साल से भवन निर्माण सामग्री के कारोबार पर कोरोना संक्रमण ने ब्रेक लगाया हुआ है। शहर और आसपास में चल रहे 'यादातर बड़े निर्माण प्रोजेक्ट का काम रुक गया है। निर्माण सामग्री कारोबार से जुड़े सैकड़ों कारोबारियों को अपने व्यवसाय से संचालन लागत तक निकालने में परेशानी हो रही है। व्यवसायी अखिलेश का कहना हैं पिछले साल कोरोना के चलते और इस साल महंगाई के चलते गिट्टी, बालू का कारोबार काफी प्रभावित हुआ है। कारोबारियों को नहीं चाहते हुए भी अपने कर्मियों को हटाना पड़ा है। संचालन लागत तक निकालना भी मुश्किल हो गया है। सीमेंट कारोबारी मांग की कमी को देखते हुए कारोबार में पूंजी फंसाने से परहेज करने लगे हैं। शहर में निर्माण कार्य पिछले लॉकडाउन के समय से ही रुका-रुका सा है। बालू के लोडिंग और अनलोडिंग से जुड़े सैकड़ों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। उनके सामने दो जून की रोटी का इंतजाम करना तक मुश्किल हो गया है। मकान बनाना बहुत महंगा हो गया है। एक साल में कई चीजों के भाव 30 से 70 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। र्इंट, रेती, सीमेंट, लोहा, पीवीसी प्रोडक्ट, वायर, प्लंबिंग सहित अन्य सामान महंगा हो गया है। घर बनाना आम आदमी को बहुत मुश्किलभरा लग रहा है।

कोरोना काल में मंदी का असर दिहाड़ी मजदूरों पर नजर आया :

शहर में मेहनत-मजदूरी कर जीविका चलाने वाले श्रमिक और दिहाड़ी मजदूरों की हालत खस्ता है। इनमें से कई के पास दो वक्त की रोटी का जुगाड़ भी नहीं हो पा रहा है। विभिन्न पेशे से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से जुड़े ऐसे लोग हताश है, जिनमें से सैकड़ों तो पलायन कर चुके हैं। कोरोना काल में मंदी का असर शहर के दिहाड़ी मजदूरों पर भी नजर आया है। राजा तीन साल से शहर में निमार्णाधीन बिल्डिंग में मजदूरी करता हैं। राजा ने बताया कि ईमानदारी की रोटी जैसे-तैसे जुटा लेते थे, किसी के आगे हाथ नहीं फैलाने पड़ते थे। लेकिन पहले कोरोना संक्रमण और अब महंगाई की वजह से मानों गृहस्थी पर ग्रहण लग गया हो।

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