कैबिनेट ने लव जिहाद के खिलाफ अध्यादेश को मंजूर कर महामहिम राज्यपाल को भेजा
शिवराज की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठकSocial Media

कैबिनेट ने लव जिहाद के खिलाफ अध्यादेश को मंजूर कर महामहिम राज्यपाल को भेजा

भोपाल, मध्यप्रदेश : CM शिवराज की अगुवाई आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में धर्म स्वातंत्र्य अध्यादेश को दे दी है मंजूरी, अब इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए आगे भेज दिया गया है।

भोपाल, मध्यप्रदेश। कोरोना संकट के बीच आज प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में धर्म स्वातंत्र्य अध्यादेश को मंजूरी दे दी गई है, इस कानून को फिलहाल मध्य प्रदेश कैबिनेट ने राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है, बता दें कि अगर राज्यपाल इस अध्यादेश को स्वीकृति देती हैं तब यह कानून राज्य में लागू हो जाएगा।

मंगलवार सुबह धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2020 को दी मंजूरी :

आज यानि मंगलवार को मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में 'वंदे मातरम' गीत के साथ कैबिनेट की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रारम्भ की, प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अध्यादेश के जरिए कैबिनेट में मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2020 को लेकर आए, धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2020 को अध्यादेश के रूप में कैबिनेट ने मंजूर कर महामहिम राज्यपाल के पास भेज दिया है, कैबिनेट बैठक में सभी मंत्री वर्चुअल तरीके से जुड़े थे।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा

राज्य में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2020 विधानसभा के शीतकालीन सत्र स्थगित होने के कारण अब इसे अध्यादेश के जरिए कानून के रूप में लागू किया जाएगा। सीएम ने कल रात यहां एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से चर्चा के दौरान एक सवाल के जवाब में यह बात कही। शिवराज ने कहा कि सत्र स्थगित होने के कारण धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2020 समेत जितने भी विधेयक हैं, उनके संबंध में अध्यादेश लाने का अनुमोदन मंगलवार को राज्य मंत्रिपरिषद की विशेष बैठक में किया जाएगा और अध्यादेश जारी होने के बाद संबंधित कानून राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएंगे।

MP सरकार ने धर्म परिवर्तन और लवजिहाद रोकने के लिए संबंधित विधेयक में सख्त प्रावधान किए हैं। इसके लागू होने के बाद कोई भी व्यक्ति दूसरे को प्रलोभन, धमकी, बल, दुष्प्रभाव, विवाह के नाम पर अथवा अन्य कपटपूर्ण तरीके से प्रत्यक्ष अथवा अन्य तरीके से उसका धर्म परिवर्तन या धर्म परिवर्तन का प्रयास नहीं कर सकेगा। कोई भी व्यक्ति धर्म परिवर्तन किए जाने का दुष्प्रेरण अथवा षड्यंत्र नहीं कर सकेगा। किसी भी व्यक्ति के द्वारा इससे संबंधित अधिनियम का उल्लंघन करने पर एक साल से पांच साल तक के कारावास और 25 हजार रुपए का जुर्माना लगेगा। नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति के मामले में दो से दस साल तक का कारावास और कम से कम 50 हजार रुपए का अर्थदंड लगाने का प्रावधान है।

बता दें कि अपना धर्म छिपाकर (लवजिहाद) धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम का उल्लंघन करने पर तीन साल से दस साल तक के कारावास और 50 हजार रुपए अर्थदंड और सामूहिक धर्म परिवर्तन का प्रयास करने पर 5 से 10 वर्ष के कारावास और एक लाख रुपए के अर्थदंड का प्रावधान किया गया है। नए कानून में धर्म संपरिवर्तन (लवजिहाद) के आशय से किया गया विवाह शून्य घोषित करने के साथ महिला और उसके बच्चों के भरण पोषण का हकदार करने का प्रावधान भी किया गया है। ऐसे विवाह से जन्मे बच्चे माता-पिता की संपत्ति के उत्तराधिकारी होंगे। धर्मांतरण के लिए होने वाली शादियों पर रोक लगाने के लिए प्रस्तावित धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम को कठोर बनाने के साथ कुछ ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जो देश के किसी भी राज्य में अब तक नहीं हैं।

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