इंदौर : इंदौर में धड़ल्ले से बिक रही कार्बाइड गन

इंदौर, मध्य प्रदेश : गुरुवार को ही सनावद इलाके में इस गन के धुएं से कुछ बच्चों की आंखें खराब हो गईं। इनमें से चार को इंदौर भेजा गया है। वहीं इंदौर में प्रशासन का अभी तक इस ओर ध्यान नहीं है।
इंदौर : इंदौर में धड़ल्ले से बिक रही कार्बाइड गन
इंदौर में धड़ल्ले से बिक रही कार्बाइड गनRaj Express

इंदौर, मध्य प्रदेश। शहर और आसपास के हाटबाजारों में इन दिनों प्लास्टिक पाइपों से बनी कार्बाइट गन धड़ल्ले से बिक रही है। गुरुवार को ही सनावद इलाके में इस गन के धुएं से कुछ बच्चों की आंखें खराब हो गईं। इनमें से चार को इंदौर भेजा गया है। वहीं इंदौर में प्रशासन का अभी तक इस ओर ध्यान नहीं है।

दीपावाली के नजदीक आते ही जहां बच्चों के लिए टिकली, फुलझडिय़ों दुकानों में सजने लगी हैं, वहीं तेज आवाज के लिए इन दिनों एक नई तरह की गन बाजार में दिख रही है। बाहरी लगने वाले कुछ लोग प्लास्टिक पाइप से बनी इस गन को हाट-बाजारों और चौराहों पर बेच रहे हैं। इसमें एक पाइप में ऊपर से छोटा छेद कर कार्बाइड का टुकड़ा डाला जाता है, जिस पर दो-चार बूंद पानी डालकर हिलाया जाता है और पीछे से लाइटर से आग लगा दी जाती है। इससे धमाके के साथ हल्का धुआं निकलता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। 200-250 रु. में बेचने वाले युवक शहर के रहवासी इलाकों में बेच रहे हैं। गुरुवार को ही सनावद में इस तरह का एक मामला सामने आया है, जिसमें 6 बच्चों की आंखें इस काबाईड गन के धुएं से प्रभावित हुई हैं। सनावद के निजी नेत्र चिकित्सक के अनुसार काबाइट का धुआं काफी खतरनाक है। आंखों में जाने से बच्चों के कार्निया को नुकसान हुआ है। चार बच्चों को इंदौर रैफर किया गया है। उधर सनावद के स्थानीय प्रशासन ने कार्बाइड गन पर प्रतिबंध लगाते हुए कुछ गन भी बरामद की है। वहीं मामला सामने आने के बाद खरगोन एसपी शैलेन्द्रसिंह चौहान ने सभी थाना प्रभारियों को संदेश दिया है कि इस तरह की गन की बिक्री तथा उपयोग सख्ती से रोका जाए।

दशहरे के बाद आए शहर में :

उक्त गन बेचने वाले महाराष्ट्र या बिहार के लग रहे हैं, जो संभवत: दशहरे के बाद ही शहर में आए हैं। प्लास्टिक की गन बनाकर वे चौराहे-चौराहे पर उसका डेमो भी दे रहे हैं। आम नागरिकों के साथ बच्चे भी यहां मजमा देखकर खड़े हो जाते हैं। हालांकि इंदौर में अभी तक ऐसा कोई केस नहीं आया है। लेकिन बच्चों के हाथ में गन जाने के बाद यह खतरनाक हो सकता है। प्रशासन को इस पर तुरंत रोक लगाना जरूरी है।

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