Gwalior : जान पर खेलकर तराश रहे पत्थर, खराब हो रहीं लाखों की मशीनें
पानी के बिच में रखी मशीनRaj Express

Gwalior : जान पर खेलकर तराश रहे पत्थर, खराब हो रहीं लाखों की मशीनें

मोतीमहल स्थित आर्ट एंड क्राफ्ट सैंटर में इन दिनों पत्थर शिल्पियों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है, लेकिन बारिश के इस मौसम में यह स्थान शिल्पियों के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है।

हाइलाइट्स :

  • बारिश बनी आफत

  • स्मार्टसिटी के आर्ट एंड क्राफ्ट सैंटर में आयोजित हो रहा है पत्थर शिल्पियों का शिविर

  • टीनशेड में आ रहा पानी, खुले पड़े स्विच बोर्ड, लाखों रुपए की मशीनें हो रहीं बर्बाद

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। झमाझम बारिश जहां शहरवासियों के चेहरे पर खुशी लेकर आई, वहीं आर्ट एंड क्राफ्ट सैंटर मोतीमहल में काम कर रहे पत्थर शिल्पियों के लिए यह बारिश आफत बनकर आई है। मोतीमहल स्थित आर्ट एंड क्राफ्ट सैंटर में इन दिनों पत्थर शिल्पियों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है, लेकिन बारिश के इस मौसम में यह स्थान शिल्पियों के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं। क्राफ्ट सेंटर का टीनशेड पूरी तरह कवर नहीं होने से बारिश का पानी भीतर आ रहा है। मशीनों के स्विच बोर्ड( स्टार्टर) के ऊपर पानी आने से यहां कभी भी गंभीर दुर्घटना हो सकती है।

दो विभागों की रस्साकसी की वजह से आर्ट एंड क्राफ्ट सैंटर में काम कर रहे पत्थर शिल्पी पिस रहे हैं। दो दिन से शहर में हो रही बारिश से यहां काम कर रहे शिल्पियों की जान पर बन आई है। बारिश का पानी क्राफ्ट सैंटर में भर रहा है। आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर में टीनशेड लगाकर पत्थर तराशने की मशीनों का स्टॉलेशन किया गया है, लेकिन शेड को पूरी तरह कवर्ड नहीं करने की वजह से पानी मशीनों पर आ रहा है, जिससे लाखों रुपए कीमत की मशीनों को नुकसान पहुंच रहा है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि मशीनों को चलाने के लिए यहां जो स्विच बोर्ड( स्टार्टर) लगाया गया है, वो उसी ओर है जिस दिशा से बारिश का पानी आ रहा है, ऐसे में यहां कभी भी कोई आकास्मिक दुर्घटना हो सकती है।

टीन शेड से गिरता बारिश का  पानी
टीन शेड से गिरता बारिश का पानीRaj Express

30 शिल्पी ले रहे प्रशिक्षण :

विकास आयुक्त कार्यालय वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार की ओर से प्राप्त अनुदान राशि से यहां इन दिनों पत्थर शिल्पियों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें उन्हें पत्थर तराशने का हुनर सिखाने के साथ मानदेय के रूप में 300 रुपए भी हर रोज दिए जा रहे हैं। बायोमैट्रिक उपस्थित होने की वजह से बारिश के इस मौसम में भी जान जोखिम में डालकर शिल्पी यहां काम कर रहे हैं, जो बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं। बिजली के स्विच बोर्ड पर पानी आने की वजह से यहां हर पल दुर्घटना की संभावना बनी हुई है।

इनका कहना है :

राजएक्सप्रेस द्वारा संज्ञान में यह बात लाई गई है। मशीनों एवं शिल्पियों दोनों की सुरक्षा जरूरी है। वहां जरूरी इंतजाम करा दिए जाएंगे, साथ ही टीनशेड को भी फुली कवर्ड करा दिया जाएगा, जिससे मशीन और शिल्पी सुरक्षित हो सकें।
कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर

वैसे तो यहां नियमित तौर पर आठ कलाकार पत्थर तराशने का काम करते हैं, लेकिन इन दिनों प्रशिक्षण शिविर आयोजित होने से 30 पत्थर शिल्पी यहां काम कर रहे हैं। बारिश का पानी टीन शेड में आने से न सिर्फ कलाकारों का काम करने में असुविधा हो रही है, बल्कि करंट लगने का भी खतरा बना हुआ है, ऐसे में किसी कलाकार की जान भी जा सकती है। मैंने इसकी जानकारी स्मार्ट सिटी के अधिकारियों को दे दी है।

दीपक विश्वकर्मा, ट्रेनर नेशनल अवार्डी

बारिश के सीजन में शिल्पियों की सुरक्षा जरूरी है। स्मार्ट सिटी के अफसर वस्तुस्थिति से अवगत हैं। मैं इसकी जानकारी जिलाधीश को भी दूंगा ताकि शिल्पियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए कदम उठाया जा सके।

पुष्पराजन, सहायक निदेशक, विकास आयुक्त कार्यालय वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार

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