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सरकारी पैसे के लालच में फर्जी शादियां रचा रहे जोड़े
सरकारी पैसे के लालच में फर्जी शादियां रचा रहे जोड़े|Ankur Yadav
मध्य प्रदेश

सरकारी पैसे के लालच में फर्जी शादियां रचा रहे जोड़े

छतरपुर, मध्यप्रदेश : 273 जोड़ों ने रूपए के लिए रच लिया फर्जी विवाह, जिले में 467 जोड़ों की जांच कर रहा प्रशासन, राशि रोकी ।

Ankur Yadav

राज एक्सप्रेस। मध्यप्रदेश सरकार सामूहिक विवाह और निकाह सम्मेलन में शादी करने वाले निर्धन परिवारों को सरकार 51 हजार रूपए की सहायता उपलब्ध कराती है। प्रदेश की मुख्यमंत्री कन्यादान योजना जहां कई निर्धन बेटियों के परिवारों के लिए संजीवनी साबित हुई तो वहीं कुछ लोगों ने इस योजना से सरकारी धन लूटने के लिए फर्जी शादियां कर डालीं। सिर्फ छतरपुर जिले में 1 अप्रैल 2019 से लेकर अब तक 273 फर्जी शादियां पकड़ी जा चुकी हैं। यही नहीं 467 शादियों की जांच भी जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है। सामाजिक न्याय विभाग ने फर्जी शादियों का भुगतान भी रोक दिया है।

जिले में 863 शादियों में से 195 शांदियां मिली फर्जी :

सामाजिक न्याय विभाग के द्वारा छतरपुर जिले के विभिन्न नगर निकायों एवं जनपद पंचायतों के माध्यम से अथवा अन्य सामाजिक संस्थाओं के द्वारा 1 अप्रैल 2019 से लेकर अब तक 863 शादियों का आयोजन किया गया। इसके अलावा 72 निकाह भी कराए गए। कुल मिलाकर 935 जोड़ों ने सरकारी योजना के तहत विवाह किया। चौकानें वाली बात ये है कि इन 935 जोड़ों में से 195 जोड़े अपात्र पाए गए हैं। अपात्रों की सबसे बड़ी संख्या बड़ामलहरा में सामने आई जहां 9 जून 2019 को 280 सामूहिक विवाह में से 101 विवाह फर्जी जोड़ों ने कर डाले। इसी तरह छतरपुर में 40, राजनगर में 29 और गौरिहार में भी 10 फर्जी जोड़ों ने विवाह किए हैं। इतना ही नहीं 935 सामूहिक शादियों में से 467 शादियां अब भी जांच के दायरे में हैं। कुल मिलाकर अभी सिर्फ 242 जोड़ों को ही शासन की 51 हजार रूपए की सहायता राशि दी गई है। शेष जोड़ों की जांच की जा रही है।

इस तरह रचाई जाती हैं फर्जी शादियां :

सरकार मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत निर्धन बेटी के परिवार को 48 हजार रूपए एवं आयोजक संस्था को 3 हजार रूपए की राशि देकर प्रत्येक शादी पर कुल 51 हजार रूपए का खर्च कर रही है। इसी सरकारी धन को लूटने के लिए संस्थाएं फर्जी जोड़ों के माध्यम से भ्रष्टाचार करने में जुटी हैं। ज्यादातर मामलों में ऐसे जोड़े सामने आए जो पहले से ही शादीशुदा था लेकिन सरकारी राशि का लाभ लेने के लिए उन्होंने सामूहिक विवाह समारोह के दौरान दोबारा सात फेरे ले लिए। कई मामलों में लड़के अथवा लड़की के दस्तावेज पूरे नहीं मिले फिर भी उनकी शादियां करा दी गईं। कुछ मामलों में सामाजिक संस्थाओं ने सिर्फ दस्तावेज लगाए और पुरानी शादी की फोटो के आधार पर भुगतान के बिल लगा दिए। राज्य सरकार के निर्देश पर सामूहिक विवाह समारोह में होने वाले ऐसे फर्जीवाड़ों को रोकने के लिए जांच शुरू कराई गई है। छतरपुर जिले में भी इसी जांच के कारण यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है।

पहले भी हुआ है शादी का फर्जीवाड़ा :

छतरपुर जिले में शादियों के नाम पर सरकारी धन लूटने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। सबसे बड़ा मामला वर्ष 2016 में सामने आया था जब तत्कालीन सामाजिक न्याय विभाग के उपसंचालक आरपी खरे के संरक्षण में एक सामाजिक संस्था ने 350 शादियां कराई थीं। इन शादियों में ज्यादातर फर्जी शादियां कराई गई थीं। मीडिया में सुर्खियां बनने के बाद जिला प्रशासन ने इस मामले की जांच कराई और सभी शादियों का भुगतान निरस्त कर दिया। इस मामले में उपसंचालक आरपी खरे को भी सस्पेंड किया गया था।

फैक्ट फाइल :

इस साल कुल सामूहिक विवाह - 935

फर्जी पाए गए विवाह- 273

जांच में जोड़े- 467

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