Chhath Puja 2020: सीएम शिवराज ने प्रदेशवासियों को दी छठ पूजा की शुभकामनाएं

भोपाल, मध्यप्रदेश। आज देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ छठ पूजा का महापर्व मनाया जा रहा है, मुख्यमंत्री शिवराज ने छठ पूजा की आत्मीय बधाई दी है।
Chhath Puja 2020: सीएम शिवराज ने प्रदेशवासियों को दी छठ पूजा की शुभकामनाएं
Chhath Puja 2020Priyanka Yadav-RE

भोपाल, मध्यप्रदेश। आज (20 नवंबर) को देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ छठ पूजा का महापर्व मनाया जा रहा है, बुधवार से आस्था का महापर्व छठ पूजा का आगाज हो चुका है, आज तीसरा दिन है। विश्व प्रसिद्ध सूर्य देव की आराधना तथा संतान के सुखी जीवन की कामना के लिए समर्पित छठ पूजा हर वर्ष का​र्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को होती है। इस वर्ष छठ पूजा 20 नवंबर दिन शुक्रवार को है।

शिवराज ने छठ पूजा पर दी शुभकामनाएं

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आस्था के पावन महापर्व छठ पूजा पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का संकल्प लें तथा कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए पर्व मनाएं।

शिवराज ने ट्वीट कर कहा-

"आदि देव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर: दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोस्तुते" सूर्योपासना के पावन पर्व छठ पूजा की आत्मीय बधाई! भगवान सूर्य और छठी मैया से आपकी सुख, समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन के लिए प्रार्थना करता हूं। आप स्वस्थ रहें और सभी मनोकामनाएं पूरी हों, यही कामना!

नरोत्तम मिश्रा ने ट्वीट कर कहा- छठ महापर्व सिखाता है कि जो 'अस्त' होता है, उसका 'उदय' होना निश्चित है। भगवान सूर्य की उपासना के महापर्व छठपूजा के पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। संयम, तप, समर्पण और पवित्रता के इस पर्व पर छठी मैय्या से आप सभी की सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना करता हूँ।

4 दिनों की होती है "छठ पूजा"

  • पहला दिन- छठ पूजा का प्रारंभ कार्तिक शुक्ल चतुर्थी तिथि से होती है। यह छठ पूजा का पहला दिन होता है, इस दिन नहाय खाय होता है।

  • दूसरा दिन- छठ पूजा का दूसरा दिन लोहंडा और खरना का होता है, यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होता है।

  • तीसरा दिन- छठ पूजा का मुख्य दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि होती है। इस दिन ही छठ पूजा होती है। इस दिन शाम को सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

  • चौथा दिन- छठ पूजा का अंतिम दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि होती है। इस दिन सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है, उसके बाद पारण कर व्रत को पूरा किया जाता है।

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