डॉ. विक्रम साराभाई और कवि दुष्यंत कुमार की पुण्यतिथि पर CM ने दी श्रद्धांजलि
आज डॉ. विक्रम साराभाई और दुष्यंत कुमार की पुण्यतिथिSyed Dabeer Hussain - RE

डॉ. विक्रम साराभाई और कवि दुष्यंत कुमार की पुण्यतिथि पर CM ने दी श्रद्धांजलि

भोपाल, मध्यप्रदेश। आज डॉ. विक्रम साराभाई और दुष्यंत कुमार की पुण्यतिथि है। मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि दी है।

भोपाल, मध्यप्रदेश। आज भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के पितामह व पद्म पुरस्कारों से सम्मानित डॉ. विक्रम साराभाई और हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध कवि, कथाकार और गजल कार दुष्यंत कुमार की पुण्यतिथि है। आज ही के दिन डॉ. विक्रम साराभाई और कवि दुष्यंत कुमार का निधन हुआ था। मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने इनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि दी है।

विक्रम साराभाई की पुण्यतिथि पर शत् शत् नमन : CM शिवराज

मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने ट्वीट कर कहा कि भारत में अंतरिक्ष कार्यक्रमों के संस्थापक जनक, पद्मभूषण व पद्मविभूषण से अलंकृत विक्रम साराभाई की पुण्यतिथि पर शत् शत् नमन। अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को विश्व पटल पर स्थान दिलाने व विभिन्न संस्थानों की नींव रखने में दिया आपका योगदान कभी विस्मृत नहीं किया जा सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई में महान वैज्ञानिक, भविष्य द्रष्टा, औद्योगिक प्रबंधक और देश के आर्थिक, शैक्षिक एवं सामाजिक उत्थान के लिए संस्थाओं की परिकल्पना तथा उसे साकार करने का अद्भुत गुण था। डॉ. विक्रम साराभाई एक स्वप्नद्रष्टा थे और उनमें कठोर परिश्रम की असाधारण क्षमता थी। उन्होंने अनेक लोगों को स्वप्न देखना और उस स्वप्न को वास्तविक बनाने के लिए काम करना सिखाया था।भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की सफलता इसका प्रमाण है।विज्ञान के महान सेवक की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि!

दुष्यंत कुमार की पुण्यतिथि पर CM ने दी विनम्र श्रद्धांजलि :

हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध कवि, कथाकार और गजल कार दुष्यंत कुमार (Dushyant Kumar) की पुण्यतिथि पर एमपी के सीएम ने ट्वीट कर कहा- प्रसिद्ध कवि, कथाकार, गीतकार एवं ग़ज़लकार दुष्यंत कुमार की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। कालजयी कवि दुष्यंत कुमार के लेखन के स्वर सड़क से संसद तक अब भी गूंजते हैं। 'जलते हुए वन का वसंत' और 'साये में धूप' जैसी आपकी कृतियां साहित्य जगत को सदैव सुशोभित करती रहेंगी।

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