महान समाजसेवी एवं लेखक महात्मा 'ज्योतिबा फुले' की जयंती पर सीएम ने किया नमन
ज्योतिबा फुले' की जयंती पर सीएम ने किया नमनPriyanka Yadav-RE

महान समाजसेवी एवं लेखक महात्मा 'ज्योतिबा फुले' की जयंती पर सीएम ने किया नमन

भोपाल, मध्यप्रदेश। आज महान समाजसेवी एवं लेखक महात्मा 'ज्योतिबा फुले' की जयंती है, सीएम शिवराज ने ट्वीट कर ज्योतिबा फुले की जयंती पर उन्हें नमन किया है

भोपाल, मध्यप्रदेश। कोरोना संकटकाल के बीच कई महान विभूतियों की जयंती और पुण्यतिथियां सामने आ रही हैं इस बीच ही आज महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती है, बता दें कि आज के दिन (11 अप्रैल 1827) महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म हुआ था, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ज्योतिबा फुले की जयंती पर उन्हें नमन किया।

सीएम शिवराज ने ट्वीट के जरिए किया नमन

एमपी के सीएम शिवराज ने ट्वीट कर कहा- महान भारतीय विचारक, समाज सेवी, लेखक, दार्शनिक ज्योतिबा फुले की जयंती पर उन्हें शीश झुकाकर नमन करता हूं, महिलाओं की दशा सुधारने और उनकी शिक्षा के क्षेत्र में महात्मा फुले द्वारा किये गये कार्यों ने निश्चित ही भारतीय समाज को एक नई दिशा दी।

शिक्षा स्त्री और पुरुष दोनों के लिए समान रूप से आवश्यक है– 'ज्योतिबा फुले' शिक्षा के माध्यम से नारी व असमर्थों के जीवन को सशक्त बनाने का प्रयास करने वाले, सामाजिक क्रांति के अग्रदूत, महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती पर नमन! आपके अमूल्य विचार सदैव मानवता का कल्याण करते रहेंगे।

सीएम शिवराज ने कहा-

मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी किया ट्वीट

मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ट्वीट कर महान समाजसेवी, विचारक और सत्यशोधक समाज के संस्थापक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती पर उन्हें सादर नमन, मिश्रा ने कहा कि उन्होंने महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण में अतुलनीय योगदान दिया है, उनके विचार और संघर्ष हमेशा नई पीढ़ी को प्रेरित करते रहेंगे।

ज्योतिबा फुले का जन्म पुणे में हुआ था :

बताते चले कि 11 अप्रैल 1827 को ज्योतिबा फुले का जन्म पुणे में हुआ था, उनकी माता का नाम चिमणाबाई तथा पिता का नाम गोविंदराव था,वह भारत के महान विचारक, समाजसेवी, लेखक और दार्शनिक में गिने जाते हैं, ज्योतिबा फुले ने समाज में महिलाओं के उत्थान के लिए काफी कार्य किए, यही नहीं उन्होंने महिलाओं के लिए देश का पहला महिला शिक्षा स्कूल खोला था।

28 नवंबर 1890 को ज्योतिबा फुले की हुई थी मृत्यु :

इसके अलावा ज्योतिबा फुले भारतीय समाज में होने वाले जातिगत आधारित विभाजन और भेदभाव के कट्टर दुश्मन थे, उस समय महाराष्ट्र में जाति प्रथा बड़े पैमाने पर फैली हुई थी, बता दें कि ज्योतिबा फुले की मृत्यु 28 नवंबर 1890 को पुणे में हुई, 1888 में उन्हें 'महात्मा' की उपाधि दी गई थी।

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