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मध्य प्रदेश

CM शिवराज ने वीसी के माध्यम से हिंदी विश्वविद्यालय के भवन का किया लोकार्पण

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने आज हिंदी दिवस के खास अवसर पर अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया।

Priyanka Yadav

Priyanka Yadav

भोपाल, मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज हिंदी दिवस के खास अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी में कितनी क्षमता है, यह हमें स्व. अटल जी के भाषण सुनने के बाद पता चलता है। प्रधानमंत्री ने हिंदी की प्रतिष्ठा को दुनिया में स्थापित किया हैं।

वीसी के माध्यम से हिंदी विश्वविद्यालय के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण :

बता दे कि शिवराज ने ट्वीट कर कहा कि भाषा से ही हमारा गौरव भाषा ही सम्मान है। सूर, कबीर, तुलसी, प्रेमचंद हिन्दी का वरदान हैं। हर भाषा से प्रेम और हिन्दी पर अभिमान है। हिन्दी हमारी संस्कृति, अस्मिता और देश की आवाज है। इसे मान दें, अक्षुण्ण बनायें, देश का गौरव समृद्ध होगा। हिंदी_दिवस पर शुभकामनाएं!

बताते चले कि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रामदेव भारद्वाज ने बताया कि हिंदी विश्वविद्यालय के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण के पश्चात जल्द ही स्मार्ट क्लास रूम और उन्नत प्रयोगशाला तैयार की जाए। मुख्यमंत्री ने समस्त राष्ट्रभाषा प्रेमियों को हिन्दी दिवस की बधाई। देश के प्रमुख हिन्दी प्रांतों में शामिल होने के नाते मप्र में हिन्दी जन-जन की भाषा है। आंचलिक बोलियों के व्यापक प्रचलन के बाद भी हिन्दी के प्रति प्रत्येक नागरिक का सम्मान व्यक्त होता है।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शासकीय स्तर पर भी हिन्दी को पूरा सम्मान व प्रोत्साहन प्राप्त है। मप्र में 2011 में हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। प्रदेश में हिन्दी की पताका लहराती है। राष्ट्रभाषा हिन्दी को समृद्ध बनाने के लिए प्रदेशवासियों की सहभागिता की अपेक्षा है।

हिंदी भारत माता के माथे की बिंदी है, निज भाषा की उन्नति में ही सारी उन्नति समाहित है। हिंदी पूरी दुनिया में बोली जाने वाली तीसरी सबसे बड़ी भाषा है। हिंदी हमें जोड़कर रखती है, यह बेहद समृद्ध भाषा है।
शिवराज ने ट्वीट कर कहा-

शिवराज ने कहा कि आज मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ, एक सपना साकार हो रहा है, एक संकल्प पूरा हो रहा है। अपनी भाषा की उन्नति में ही सारी उन्नति समाहित है। हिंदी आज दुनिया में तीसरी सर्वाधिक बोले जाने वाली भाषा है। यह भाषा हमें जोड़ के रखती है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी मातृभाषा में बोलते हैं और जब हिन्दी में वे बोलते हैं, तो हिन्दी और हिन्दुस्तान का सम्मान सारी दुनिया में बढ़ता है ।

किस प्रकार हम बदलते हुए परिवेश में हिंदी को विकृत होने से बचाएँ, इसके संबंध में हिंदी विश्वविद्यालय शोध करे। अनेक हिंदी पत्र-पत्रिकाओं, समाचार पत्रों की पाठक संख्या बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा-

आगे कहा कि हिंदी विश्वविद्यालय की कल्पना महज़ एक कर्मकांड नहीं था। अपनी मातृभाषा में यदि हम शिक्षा प्राप्त करें तो ज़्यादा गहराई से उस विषय को आत्मसात कर पाते हैं। दूसरी भाषा में पढ़ने से पहले उस भाषा का बोझ हम पर आ जाता है। अंग्रेजी में बोलना लोगों ने अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना लिया है। हिंदी भाषा में भी पढ़ाई की जा सकती है। जापान, जर्मनी, चीन या अन्य देशों में यदि आप अंग्रेजी में बोलते हैं तो यह समझा जाता है कि आप अंग्रेज़ी के ग़ुलाम हैं। अगर वहाँ अपनी भाषा में बात की जाए तो प्रशंसा की जाती है।

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