महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की जयंती पर सीएम शिवराज ने किया नमन
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की जयंतीPriyanka Yadav-RE

महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की जयंती पर सीएम शिवराज ने किया नमन

भोपाल, मध्यप्रदेश : हिन्दी कविता के छायावादी युग के प्रमुख स्तंभों में से एक सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' की जयंती पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज ने उन्हें नमन किया।

भोपाल, मध्यप्रदेश। आज यानि 20 फरवरी को महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की जयंती है। बता दें कि आज के दिन (21 फरवरी 1896 ) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्म पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले में हुआ था, वही सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला का देहांत 15 अक्टूबर 1961 को हुआ था। सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला की जयंती पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें नमन किया।

CM ने सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' पर किया नमन :

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा कि 'वर दे, वीणावादिनि वर दे, प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव भारत में भर दे' जिनकी कलम से निकले हर शब्द स्वत: ही जाग्रत होकर साहित्य जगत के मोती बन जाते हैं, ऐसे महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन! हिन्दी काव्य में आपका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

नरोत्तम मिश्रा ने भी ट्वीट कर कहा-

मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी ट्वीट कर कहा कि 'जागो फिर एक बार प्यार जगाते हुए हारे सब तारे तुम्हें, अरुण-पंख तरुण-किरण खड़ी खोलती है द्वार जागो फिर एक बार' मानवीय भावनाओं को अपनी कविताओं में पिरोने वाले छायावाद के प्रमुख स्तंभ पं. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती पर सादर नमन।

आपको बताते चलें कि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला हिन्दी के छायावादी युग के एक सशक्त हस्ताक्षर हैं, यद्यपि छायावाद से संबंध रखने के बाद भी सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविताएं यथार्थ के अधिक निकट हैं। बता दें कि सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' हिन्दी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं, वे जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा के साथ हिन्दी साहित्य में छायावाद के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। उन्होंने कहानियाँ, उपन्यास और निबंध भी लिखे हैं किन्तु उनकी ख्याति विशेषरुप से कविता के कारण ही है।

बता दें कि हिन्दी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की रचनाओं में प्रेम की सघनता, विपन्नता के प्रति सहानुभूति-सम्वेदना, देश-प्रेम का ज़ज़्बा, सामाजिक रूढ़ियों का विरोध तो कहीं प्रकृति के प्रति अनुराग झलकता है। निराला की महनीय रचनाएं देश की अनमोल निधि एवं साहित्य जगत के अमिट दस्तावेज़ हैं।

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