मुख्यमंत्री शिवराज ने स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती पर किया कोटि-कोटि नमन
स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती Priyanka Yadav-RE

मुख्यमंत्री शिवराज ने स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती पर किया कोटि-कोटि नमन

भोपाल, मध्यप्रदेश : आज आर्य समाज के प्रवर्तक और प्रखर सुधारवादी संन्यासी महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती है, स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती पर मुख्यमंत्री ने उन्हें नमन किया।

भोपाल, मध्यप्रदेश। आज यानि 12 फरवरी को आर्य समाज के प्रवर्तक और प्रखर सुधारवादी संन्यासी महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती है। बता दें कि आज के दिन (12 फरवरी 1824) स्वामी दयानंद सरस्वती (Swami Dayanand Saraswati) का जन्म गुजरात के टंकारा में हुआ था, मूल नक्षत्र में जन्म होने के कारण उनका नाम मूलशंकर रखा गया था, स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें नमन किया।

शिवराज ने स्वामी दयानंद सरस्वती पर किया नमन :

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा कि आर्य समाज के प्रवर्तक और प्रखर सुधारवादी संन्यासी महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती पर उन्हें नमन करता हूं, धार्मिक और सामाजिक सुधार के साथ लोगों के अंदर स्वदेशी की भावना भरने वाले दयानंद सरस्वती जी का भारतीय समाज में योगदान अभूतपूर्व है।

'अज्ञानी होना गलत नहीं है, अज्ञानी बने रहना गलत है- स्वामी दयानंद' आर्य समाज के संस्थापक, हिन्दू पुनर्जागरण के अखंड प्रकाश पुंज, महान संत स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती पर नमन आइये हम सब समाज व राष्ट्र की उन्नति में योगदान देकर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

नरोत्तम मिश्रा ने भी ट्वीट कर कहा-

मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी ट्वीट कर कहा "दुनिया को अपना सर्वश्रेष्ठ दीजिये और आपके पास सर्वश्रेष्ठ लौटकर आएगा"आधुनिक भारत के महान चिंतक, सामाजिक कुरीतियों और अंधविश्वास के खिलाफ नवजागरण करने वाले आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द सरस्वती की जयंती पर सादर नमन।

आपको बताते चलें कि स्वामी दयानंद सरस्वती आर्य समाज के संस्थापक, आधुनिक भारत के महान चिंतक, समाज-सुधारक और देशभक्त थे, स्वामी दयानंद सरस्वती ने बाल विवाह, सती प्रथा जैसी कुरीतियों को दूर करने में अपना खास योगदान दिया था, उन्होंने वेदों को सर्वोच्च माना और वेदों का प्रमाण देते हुए हिंदू समाज में फैली कुरीतियों का विरोध किया था। महान समाज-सुधारक स्वामी का देहांत 30 अक्टूबर 1883 को दीपावली के दिन हुआ था।

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