इंदौर : कलेक्टर की फटकार से सीएमएचओ की तबियत बिगड़ी, निकले आंसू
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इंदौर : कलेक्टर की फटकार से सीएमएचओ की तबियत बिगड़ी, निकले आंसू

इंदौर, मध्य प्रदेश : कलेक्टर मनीष सिंह ने जिले के विभिन्न अधिकारियों के साथ मंगलवार समीक्षा बैठक की। समीक्षा बैठक में कलेक्टर मनीष सिंह, सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जड़िया पर भड़क गए और उन्हें फटकार लगा दी।

इंदौर, मध्य प्रदेश। कलेक्टर मनीष सिंह जिले के विभिन्न अधिकारियों के साथ मंगलवार समीक्षा बैठक की। इसी दौरान जिला खाद्य एंव आपूर्ती अधिकारी आर. सी. मीणा के पेंडिसी केस को लेकर फटकार लगा रहे थे, इसी दौरान वो स्वास्थ्य विभाग में जननी सुरक्षा के तहत जाने वाली प्रसूति सहायता आदि की पेंडेंसी को लेकर सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जड़िया पर भड़क गए और उन्हें फटकार लगा दी।

इस फटकार से डॉ. जड़िया इतने असहज हो गए कि बैठक के बाद उनकी तबियत बिगड़ गई और सीने में दर्द होने लगा और वो कुर्सी पर बैठ गए, इस दौरान उनकी आंखों में आंसू आ गए। उनकी यह हालत देखकर स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उन्हें पकड़कर कार तक ले गए, जहां से उन्हें सीधे एक निजी अस्पताल में जांच के ले गए।

गलती नहीं थी फिर भी पड़ी फटकार :

सूत्रों का कहना है कि जननी सुरक्षा के कुछ मामले पेंडिंग थे। यह कार्य ऑनलाइन अपडेट होना, लेकिन आनलाइन यह शो ही नहीं हो रहे थे। इस कारण पेंडिंग पड़े हुए थे। गलती यह थी कि इसको लेकर सीएमएचओ कार्यालय द्वारा कागजी कार्रवाई नहीं की गई थी, इस कारण उन्हें डांट पड़ी। बैठक में डॉ. जड़िया और आरसी मीणा को यहां तक कह दिया गया कि आप दोनों इंदौर से बाहर ट्रांसफर ले लें। इन्हें इतनी बुरी तरह से फटकार लगाई कि इन्हें अपनी बहुत ज्यादा बेईज्ज़ती महसूस हुई। इस संबंध में विभाग में चर्चा है कि पूर्व में भी डॉ. जड़िया बीमारी पर अवकाश पर गए थे और इसी कारण वो वापस लौटना नहीं चाह रहे थे। अब एक बार फिर उन्होंने पांच दिन का अवकाश लिया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद अवकाश बढ़ भी सकता है।

गलती करेंगे तो डांटना जरूरी :

कलेक्टर मनीष सिंह ने मीडिया से कहा कि रुटीन रिव्यू मीटिंग थी। जिला स्वास्थ्य अधिकारी का एक्टिव रहना जरूरी है। सीएमएचओ के अंडर में प्रसूति सहायता के कई प्रकरण हैं। कोविड मैनेजमेंट की बहुत सी चीजें हैं। इसके अलावा भी अन्य कई जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में जिला अधिकारी गलती करेगा, तो उन्हें डांटना जरूरी है, तभी जनता को रिलीफ मिलेगा। आम जनता के प्रति सभी को अपना दायित्व समझना होगा। वे व्यक्ति अच्छे हैं, लेकिन जिस मेहनत से हम चाहते हैं, वे उस मेहनत से काम नहीं कर पाते। इसका कारण मुझे समझ नहीं आया है। कलेक्टर के अनुसार प्रसूति सहायता मिलने वाली राशि के साथ ही जननी सुरक्षा में लगी गाडिय़ों की भी दो से ढाई हजार पेंडेंसी है। इसे लेकर ही उनसे जानकारी मांगी गई थी। वहीं इस संबंध में डॉ. जड़िया का कहना था सीने में तेज दर्द के कारण तकलीफ के कारण आंखों में आंसू आ गए थे। तबियत खराब होने पर ईसीजी और इको कराया है। अभी पांच दिन का अवकाश लिया है और यदि हार्ट में कोई दिक्कत आती है, तो अवकाश आगे बढ़ा लूंगा।

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