कोयला खदान तालाब में हुई तब्दील
कोयला खदान तालाब में हुई तब्दील|सांकेतिक चित्र
मध्य प्रदेश

कोयला खदान तालाब में हुई तब्दील, एनसीएल प्रबंधन को करोड़ों का नुकसान

सिंगरौली मध्यप्रदेश: बुधवार व गुरुवार को हुई अचानक बारिश की वजह से कोयला खदान में पानी भर गया और खदान का नजारा तालाब सा हो गया, जिधर देखो उधर लबालब पानी। जिसकी वजह से करोड़ों की मशीनें डूब गई।

राज एक्सप्रेस

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सिंगरौली मध्यप्रदेश। एनसीएल दुद्धीचुआ परियोजना के खदान क्षेत्र में करोड़ों के लागत की कई मशीनों के डूबने से कोल प्रबंधन के अफसरों में हड़कंप मच गया है। विगत दिनों बुधवार व गुरुवार को हुई अचानक बारिश के वजह से कोयला खदान में पानी भर गया और खदान का नजारा तालाब सा हो गया, जिधर देखो उधर लबा-लब पानी। जिसके वजह से करोड़ों की मशीनें डूब गईं और कई जगह कोयला निकालने का कार्य बाधित रहा।

अफसरों का कहना है कि पानी में फंसे डंपर व मशीनों को निकालने के लिए लगातार पंम्पिग कराई जा रही है, परंतु ज्यादा पानी भरा होने के कारण समय ज्यादा लग रहा है। इलाके में कई दिनों से रूक-रूक कर हो रही बारिश के सिलसिला ने बुधवार को जोर पकड़ लिया। इसके बाद जारी बरसात का सिलसिला बृहस्पतिवार को भी पूरे दिन रूक-रूक कर जारी रहा।

दुद्धीचुआ प्रोजेक्ट के कर्मचारियों के बताये अनुसार बारिश के पानी का दबाव बढ़ने से जल निकासी की व्यवस्था कम पड़ गई। इसके बाद खदान क्षेत्र के मुख्य कोल सेक्शन में पानी जमा होने लगा। कुछ ही देर में जल दबाव इस कदर हावी हुआ कि कोल सेक्शन के नीचले हिस्से में किसी वजह से खराब खड़ा सौ टन भार वाहन क्षमता का डंपर, एक डोजर, शावेल मशीन, कई हैवी इलेक्ट्रिक पंप सहित अन्य उपकरण पानी में डूब गए।

अफसरों का कहना था कि यह सब अचानक हुआ। बताया जा रहा है कि इस घटना से कोल प्रबंधन को बड़ी क्षति पहुंची है। एनसीएल के प्रवक्ता राम विजय सिंह ने बताया कि अचानक हुई बारिश से पैदा हुई स्थिति से निबटने का प्रयास युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि चार बड़े पंपों के जरिए पानी निकालने का कार्य किया जा रहा है। उनका कहना था कि मौसम ने साथ दिया तो पानी में डूबे डंपर को निकालने में दो से तीन दिन का समय लग सकता है।

खदान सुरक्षा नियमों पर उठ रहे सवाल :

कोयला खदानो पर सुरक्षा नियमों पर सवाल उठना लाजिमी है। क्योंकि मानसून से पहले खदान क्षेत्र में पानी के बहाव व कटान रोकने के लिए लाखों रुपए का टेंडर किया जाता है। ऐसे में कोयला खदान में पानी भराव की स्थिति कैसे उत्पन्न हुई और जल निकासी के लिए तत्काल उचित प्रबंध क्यूं नही किए गए। खदान से पानी निकालने में दो से तीन दिन लगना, साबित करता है कि आपदा से निपटने की तैयारी नाकाफी थी। जल भराव के कारण कोयला उत्पादन बाधित रहा जिससे करोड़ों की क्षति हुई है, इसका जिम्मेदार कौन होगा? सुरक्षा नियमों पर सवाल खड़े हो रहे हैं और अभी मानसून की पहली बारिश में यह हाल है तो आगे सोचकर ही डर से दिल बैठ जाएगा।

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