सिंगरौली : ब्लॉक-बी सीएचपी के नवनिर्मत साइलो से कोयला रैक लोडिंग की शुरुआत
ब्लॉक-बी सीएचपी के नवनिर्मत साइलो से कोयला रैक लोडिंग की शुरुआतPrem N Gupta

सिंगरौली : ब्लॉक-बी सीएचपी के नवनिर्मत साइलो से कोयला रैक लोडिंग की शुरुआत

सिंगरौली, मध्यप्रदेश : सीएमडी एनसीएल एवं महाप्रबंधक, पूर्व मध्य रेलवे ने किया महत्वाकांक्षी परियोजना का ई-ट्रायल। सड़क मार्ग से कोयला परिवहन में आएगी 14 हज़ार टन प्रतिदिन की कमी।

सिंगरौली, मध्यप्रदेश। भारत सरकार की मिनी रत्न कम्पनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड( एनसीएल) ने कोयला मंत्री, भारत सरकार के मार्गदर्शन में, पर्यावरण के अनुकूल कोयला परिवहन की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है l

एनसीएल ने रविवार को फ़र्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) परियोजनाओं में से एक, ब्लॉक-बी सीएचपी के नवनिर्मित साइलो से कोयला रैक लोडिंग का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इस अवसर पर सीएमडी एनसीएल प्रभात कुमार सिन्हा और महाप्रबंधक (ईसीआर) ललित चंद्र त्रिवेदी ने वर्चुअल माध्यम से कोल रैक को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

कार्यक्रम के दौरान सीएमडी एनसीएल प्रभात कुमार सिन्हा बतौर मुख्य अतिथि तथा महाप्रबंधक (ईसीआर) ललित चंद्र त्रिवेदी, एनसीएल के निदेशक (कार्मिक) बिमलेन्दु कुमार, निदेशक (तकनीकी/संचालन) डॉ अनिंद्य सिन्हा, निदेशक (वित्त) आर.एन. दुबे एवं निदेशक (तकनीकी/परियोजना एवं योजना) एस.एस. सिन्हा बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। साथ ही एनसीएल और पूर्व मध्य रेलवे (ईसीआर)के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

अपने उद्बोधन में सीएमडी, एनसीएल प्रभात कुमार सिन्हा ने सभी एनसीएल कर्मियों एवं ईसीआर के सम्बंधित अधिकारी व कर्मचारियों को बधाई दी और विश्वास जताया कि इस परियोजना के क्रियान्वित होने से एनसीएल ब्लाक बी के कोयले को रेल के माध्यम से प्रेषित करने में सहूलियत होगी और एनसीएल दूरस्थ स्थानों में संचालित विद्युत संयंत्रों व अन्य उपभोक्ताओं को आसानी से कोयला उपलब्ध करा सकेगी। सिन्हा ने इस परियोजना के शुरू होने से सड़क मार्ग से कोयला परिवहन में आने वाली कमी का उल्लेख किया और इससे वायु प्रदूषण में होने वाली कमी पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इस महत्वपूर्ण परियोजना के संचालन को एनसीएल एवं रेलवे प्रबंधन के समेकित प्रयासों का परिणाम बताया l

पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक ललित चंद्र त्रिवेदी ने टीम एनसीएल को बधाई दी और इस परियोजना के पूरा होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इससे रेल के माध्यम से कोयला परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और यह परियोजना रेलवे और एनसीएल दोनों के लिए ही लाभप्रद साबित होंगी।

परियोजना के तकनीकी पक्ष :

ब्लाक बी क्षेत्र के सी.एच.पी की वर्ष 2021-22 में वार्षिक क्षमता 3.5 मिलियन टन है जिससे प्रतिदिन 3 रेक लोड की जा सकेंगी। वर्ष 2023-24 तक इसे 8 मिलियन टन प्रतिवर्ष बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस सीएचपी की मदद से जी-9 ग्रेड की गुणवत्ता एवं (-) 100 मिमी के आकार का कोयला उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जा सकेगा। यह सीएचपी "रैपिड लोडिंग सिस्टम" (आरएलएस) से लैस है जिससे कंपनी को विलंब शुल्क की समस्या से निजात मिलेगी और साथ ही सड़क मार्ग से कोयला परिवहन में 14000 टन /दिन की कमी आएगी। प्री वे हॉपर वजन प्रणाली से लैस इस सीएचपी में अंडरलोडिंग व ओवर लोडिंग की समस्या से भी निजात मिल जाएगी और साथ ही आटोमेटेड मकैनिकल सैंपलर (एएमएस ) की मदद से ग्रेड स्लीपेज भी नूनतम स्तर पर रहेगा।

नई रेलवे साइडिंग के चालू होने के लाभ :

इस परियोजना के प्रारम्भ होने से प्रति दिन 3 रेक के प्रेषण में वृद्धि होगी जिससे सड़क मार्ग से कोयला परिवहन में लगे लगभग 500 ट्रकों की आवाजाही में कमी आयगी। इससे क्षेत्र में लगने वाले जाम एवं वायु प्रदूषण की समस्या से निजात मिलेगी और सड़क सुरक्षा में भी वृद्धि होगी।ब्लाक बी क्षेत्र के महाप्रबंधक श्री हरीश दुहान ने कार्यक्रम का संयोजन करते हुए सभी को इस परियोजना के बारे में जानकारी दी। ग़ौरतलब है कि एनसीएल वर्ष 2023-24 तक कोल इंडिया के 1000 मिलियन टन कोयला उत्पादन व प्रेषण के लक्ष्य को हासिल करने हेतु अपने आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास कर रही है।

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