मुनाफे के फेर में ग्राहकों को परोसी जा रही कॉकटेल
मुनाफे के फेर में ग्राहकों को परोसी जा रही कॉकटेल|Afsar Khan
मध्य प्रदेश

शहडोल : मुनाफे के फेर में ग्राहकों को परोसी जा रही कॉकटेल

शहडोल, मध्य प्रदेश : सुरा प्रेमियों की जेब काट रहे ठेकेदार, ब्राण्डेड शराब की बोतलों में सस्ती शराब मिलाने की शिकायत।

Afsar Khan

शहडोल, मध्य प्रदेश। शराब कारोबारियों की आपसी प्रतिस्पर्धा और मंदी ने ठेकेदारों को मुनाफे से दूर करने की परिस्थितियां क्या बनाईं, पुराने महारथियों ने इससे उबरने, दुगना मुनाफा कमाने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया। इस नये फार्मूले में शराब के नये और पुराने दोनों ही शौकीनों को मात दे दी है। मुख्यालय में राजेन्द्र टाकीज के समीप स्थित शराब दुकान क्रमांक 2 में बीते कुछ सप्ताहों से महंगी ब्राण्डेड शराब की बोतलों में सस्ती शराब की मिक्ंसिग या बॉटलिंग किये जाने की खबर है। सूत्रों पर यकीन करें तो, शराब ठेकेदार ने ठीहे पर ही कुछ पुराने महारथियों को इस काम में लगा रखा है, जो महंगी शराब की बोतलों की सील खोलकर उसमें सस्ती शराब मिलाने के बाद वापस उसी तरीके से बंद करते हैं। यह काम इतनी सफाई से होता है कि पैकिंग की जांच में अच्छे-अच्छे धोखा खा जायें।

ऐसे भी होता है खेल :

अन्यत्र से शहडोल आये शराब ठेकेदार ने यहां पर एक पुराने शराब कारोबारी को मैनेजमेंट का जिम्मा सौंपा है, जो दुकान से लेकर पैकिंग और बॉटलिंग से लेकर अहाते तक की व्यवस्था देख रहे हैं, इन्हीं के गुर्गाे द्वारा शराब की ख़ाली बोतलों में शराब और पानी को मिलाकर नए स्टीकर, नए ढक्कन की पैकिंग के साथ बेचने की खबर है।

दबिश से होगा खुलासा :

ठेेकेदार द्वारा की जा रही शराब की अवैध बॉटलिंग पर यदि आबकारी पुलिस शराब दुकान पर आकस्मिक दबिश दे तो, बड़ा खुलासा हो सकता है। ब्राण्डेड शराब में सस्ती शराब या पानी मिलाकर पैकेजिंग का गोरखधंधा कई सप्ताहों से चल रहा है। इसमें ठेकेदार के गुर्गे ख़ाली बोतलों को लेते है, इनमें हर ब्रांड की ख़ाली बोटल होती है। इन्हें धोकर बढ़िय़ा से साफ किया जाता है, जिस ब्रांड की बोटल हो उस ब्रांड की शराब और उस में सस्ती शराब या पानी मिलाकर नई बोटल तैयार कर दी जाती है। जिस बोटल से शराब निकाली जाती उसमें भी पानी भरकर मात्रा पूरी कर दी जाती। याने कि 180 एम एल की दो बोटल से तीसरी बॉटल बनती थी और तीनों की फिलिंग पानी से की जाती थी। पाँच पेटी से साढ़े आठ पेटी बोटल तैयार होती थी। गिरोह के पास नया ढक्कन स्टीकर सब मौजूद होता था, जो कि लगा दिया जाता। ग्राहक जब आता तो उसे सबसे पहले वहीं बोतलें थमाई जाती जिसमें खेल हुआ होता। गोवा जैसे ब्रांड जो कि सस्ते हैं सबसे ज़्यादा खेल उस पर होता है।

शौकीनों की कट रही जेब :

शराब के कारोबारी द्वारा बॉटलिंग व मिक्सिंग के इस खेल से शराब की कीमत निर्धारित मूल्य से आधी हो जाती है, कॉकटेल के कारण नशा भी पर्याप्त रहता है, दुकान पर बैठे सेल्स मैन भी ग्राहक को पहचान कर शराब देते हैं, चूंकि दुकान के मालिक भले ही समय-समय पर बदलते रहे हो, लेकिन सेल्स मैन इस दुकान से उस दुकान व मालिकों के बदलने पर भी इस कारोबार से दूर नहीं होते। इस खेल में ठेकेदार तो मालामाल हो रहे हैं, लेकिन ग्राहकों की जेब पूरी तरह से कटती नजर आ रही है।

आबकारी विभाग की चुप्पी :

मुख्यालय होने के कारण आये दिन आबकारी विभाग के कर्मचारी व अधिकारी निरीक्षण करने यहां जरूर पहुंचते हैं, लेकिन ठेकेदार के इस खेल पर उनकी कभी नजर न पड़ी हो, यह समझ से परे है, आरोप तो यह भी है कि आबकारी विभाग के निचले स्तर के कर्मचारी ठेकेदार के प्रभाव में जानबूझकर भी कॉकटेल के इस खेल से आंखें मूंदे हुए हैं।

नहीं उठा साहब का फोन :

इस संबंध में जब जिला आबकारी अधिकारी सुरेश कुमार राजौरे से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया तो, उनका फोन नहीं उठा।

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