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रेत खदान
रेत खदान |Afsar Khan
मध्य प्रदेश

शहडोल : खनिज निगम के हाथों में सौंपी रेत खदानों की कमान

शहडोल, मध्यप्रदेश : प्रदेश के 43 जिलों के राज्य खनिज निगम के माध्यम से ई-टेण्डरिंग कराई जा रही है, जिसमें प्रदेश की विभिन्न नदियों में 1500 के आस-पास की खदानों की नीलामी चल रही है।

Afsar Khan

राज एक्सप्रेस। मध्यप्रदेश के शहडोल संभाग के प्रदेश के 43 जिलों के राज्य खनिज निगम के माध्यम से ई-टेण्डरिंग कराई जा रही है, जिसमें प्रदेश की विभिन्न नदियों में 1500 के आस-पास की खदानों की नीलामी चल रही है। 26 नवम्बर तक ठेकेदार ऑन लाईन प्रक्रिया के माध्यम से टेण्डर डाल सकते हैं, वहीं अलग-अलग संभाग के लिए तकनीकी एवं वित्तीय निविदाएं खोलने की तिथियां निर्धारित की गई हैं। जिलेवार ठेकेदारों को खदानें आंवटित करने की प्रक्रिया दिसम्बर को पूर्ण होगी।

समूह बनाकर खदाने की गई आवंटितः

इस बार प्रदेश सरकार ने हर जिले में एक समूह बनाकर एक ठेकेदार को खदानें आवंटित करने का नियम बनाया है। ई-टेण्डरिंग से पहले वीडियो कांफ्रेंस में सुझाये गये सुझाव पर विचार करने के बाद प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि अब खदानों के अनुबंध, भण्डारण और सरेण्डर करने जैसी अन्य कार्यवाहियां खनिज निगम के माध्यम से संचालित होंगी, ताकि ठेकेदारों को अलग-अलग कार्यालयों का चक्कर न लगाना पड़े।

20 प्रतिशत ही कर सकेंगे उत्खनन:

वीडियो कांफ्रेंस के दौरान ठेकेदारों ने शासन को यह सुझाव दिया था कि ठेके की प्रक्रिया पूरी न हो जाने तक पंचायत के द्वारा संचालित की जा रही खदानों की जो मंजूरी रेत की उपलब्धता के लिए शुरू की जा रही है, उसमें से खनन कार्य योजना और पर्यावरण स्वीकृति में दी गई मात्रा से 20 प्रतिशत ही प्रतिमाह ग्राम पंचायतों के द्वारा उत्खनन किया जायेगा, जिस पर सरकार ने विचार करते हुए सभी जिलों से संचालित खदानों पर नियमों के पालन करने का निर्देश दिया है। इससे अधिक मात्रा में अगर उत्खनन ग्राम पंचायत के द्वारा किया जाता है तो उसके खिलाफ वैधानिक कार्यवाही करने के भी प्रावधान भी बनाये जा रहे हैं।

उमरिया जिले के खनिज अधिकारी श्रीमान सिंह बघेल ने बताया कि पंचायतों की खदानें जल्द ही शुरू होंगी और 20 प्रतिशत नियम का पालन किया जायेगा।

निगम को सौंपा जिम्माः

ई-टेण्डरिंग की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद राज्य खनिज निगम अनुबंध, निरस्ती, खनन कार्य योजना की अनुमति, भण्डारण, ई-टीपी का शुरू करना और बंद करने, सरेण्डर सहित खदान के संचालन में आने वाली सभी प्रक्रियाओं की जिम्मेदारी अब खनिज निगम के माध्यम से होंगी, ताकि ठेकेदारों का एक ही कार्यालय में सभी प्रकार के काम हो सकें, जिससे की खदानों का संचालन समय पर हो सकेगा और सरकार को राजस्व के साथ ही समय पर ठेकेदारों के काम भी पूरे हो सकेंगे।

सुझाव के आधार पर बदलाव:

खनिज संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ठेकेदारों के द्वारा दिए गये सुझाव के आधार पर बड़ा बदलाव किया गया है, ताकि सारे काम एक ही स्थान पर हो सकें। वीडियो कांफ्रेंस के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों के ठेकेदारों ने विभाग के अधिकारियों को अपने सुझाव दिये थे।

खदान संचालकों ने बताया था कि रेत खदान के संचालन के लिए पर्यावरण स्वीकृति, सीटीओ सहित अन्य कार्यो के लिए उन्हें काफी समय लग जाता है और विभिन्न कार्यालयों के चक्कर भी लगाने पड़ते हैं, जिससे की समय पर खदान शुरू नहीं हो पाती है, जिस आधार पर इस बार खनिज निगम के माध्यम से अधिकांश काम संचालित किये जायेगें।

अवैध उत्खनन-परिवहन का अधिकार:

जिला प्रशासन और खनिज विभाग को नये प्रावधानों के तहत रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन और भण्डारण के खिलाफ कार्यवाही के अधिकार रहेंगे। ठेकेदारों ने यह सुझाव सरकार को दिये थे, जिसके बाद निर्णय लिया गया है, वहीं अब निजी भूमि पर कोई भी रेत की खदानें सूबे में संचालित नहीं हो सकेंगी। अब हर जिले में एक ठेकेदार ही पूरी खदानों को संचालित करेगा, जिसके पीछे सरकार की मंशा है कि राजस्व के साथ ही अवैध उत्खनन, परिवहन और भण्डारण पर रोक लग सकेगी।

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