इंदौर : फ्रेक्चर न होने के बाद भी बच्ची को चढ़ा दिया प्लास्टर, पड़ा घाव
पीड़ित बच्चीRaj Express

इंदौर : फ्रेक्चर न होने के बाद भी बच्ची को चढ़ा दिया प्लास्टर, पड़ा घाव

इंदौर, मध्य प्रदेश : एक 10 वर्षीय बच्ची के पिता ने थाना सराफा में दो डॉक्टर्स पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए लिखित शिकायत की है।

इंदौर, मध्य प्रदेश। एक 10 वर्षीय बच्ची के पिता ने थाना सराफा में दो डॉक्टर्स पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए लिखित शिकायत की है। शिकायत में आरोप लगाया है कि उनकी बच्ची के पैर में फ्रेक्चर न होने के बाद भी रुपयों की लालच में प्लास्टर चढ़ा दिया गया, जिससे उनकी बेटी के पैरों में गंभीर घाव हो गए। इतना ही नहीं इलाज न करते हुए अस्पताल से भगा दिया। बाद में एक अन्य निजी अस्पताल में बालिका का आपरेशन किया गया, जहां वर्तमान में वो इलाजरत है।

शिकायतों में दोनों डॉक्टर्स पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध करने की मांग की गई है। वहीं इस मामले में इलाज करने वाले डॉक्टर का साफ कहना है कि आरोप बेबुनियाद है। अब इस मामले में पुलिस क्या करती है, देखना होगा।

टाइफाइड के इलाज के लिए किया था भर्ती :

तनिष्का वर्मा पिता रविशंकर वर्मा (10 वर्षीय) निवासी कंडिलपुरा को 23 नवंबर को सौरभ हॉस्पिटल में टाइफाइड के इलाज के लिए भर्ती किया गया था। पिता रविशंकार वर्मा द्वारा की गई शिकायत के मुताबिक तनिष्का को बॉटल (स्लाइन) चढ़ाई थी, जिसके अगले दिन पुत्री के लेफ्ट पैर में जांघ के पास सूजन आ गई थी। तब मेरे द्वारा डॉ. सुशील खंडेलवाल को बताया गया, तो उन्होंने डॉ. विजय हरलालिका को बुलाया। इसके बाद मेरी बेटी का एक्सरे एवं सोनोग्राफी कराई गई। रिपोर्ट देखकर डॉक्टर ने पैर में फ्रेक्चर बताया। साथ ही डॉ. हरलालिका ने बताया कि अगर अभी प्लास्टर नहीं चढ़ाया गया तो बाद में 50 हजार रुपए का खर्चा आएगा तथा आपरेशन करना होगा। इसके बाद मैंने बेटी के पैर में प्लास्टर चढ़वा दिया। दो दिन बाद बेटी पैर नहीं हिला पा रही थी। मैंने डॉ. सौरभ हॉस्पिटल के डॉ. सुशील खंडेलवाल से संपर्क किया, तो उन्होंने फिर डॉ. हरलालिका से बात की, तो उन्होंने सोडानी डायग्नोस्टिक सेंटर में एक्स-रे कराने के लिए कहा। एक्स-रे कराया तो सोडानी क्लीनिक की रिपोर्ट में पैर में फ्रेक्चर नहीं बताया गया और प्लास्टर के कारण पैर में घाव पड़ गया था। डॉक्टर्स ने अस्पताल से जबरन डिस्चार्ज कर दिया।

इसके बाद हम 29 नवंबर को बच्ची को लेकर अरविंदो अस्पताल गए, जहां वर्तमान में बच्ची का इलाज चल रहा है। यहां बच्ची की सर्जरी कर बताया गया कि बच्ची को पूर्व में कोई फ्रेक्चर था ही नहीं।

आरोप झूठे हैं :

आरोप झूठे हैं, मैंने टायफायड के लिए मरीज का इलाज किया और डॉ. हरलालिका ने फ्रैक्चर के लिए, जो एक दुर्घटना के बाद हुई थी। वह गंभीर हालत में अस्पताल आई थी क्योंकि उसका परिवार अन्य बीमारियों के लिए उसका इलाज करा रहा था। वह अस्पताल से स्वस्थ होकर डिस्चार्ज की गई थी।

डॉ. सुशील खंडेलवाल

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