MP शीतकालीन विधानसभा सत्र को लेकर असमंजस बरकरार, अब मिश्रा ने दिया बड़ा बयान
मंत्री मिश्रा ने दिया बयानSyed Dabeer-RE

MP शीतकालीन विधानसभा सत्र को लेकर असमंजस बरकरार, अब मिश्रा ने दिया बड़ा बयान

भोपाल, मध्यप्रदेश: कोरोना संकट के बीच मध्यप्रदेश के शीतकालीन विधानसभा सत्र को लेकर असमंजस बरकरार है, इस बीच अब मंत्री मिश्रा का बड़ा बयान सामने आया है।

भोपाल, मध्यप्रदेश। प्रदेश में जहां कोरोना का संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है, वहीं 28 से शुरू होने वाले मध्यप्रदेश के शीतकालीन विधानसभा सत्र पर कोरोना का संकट गहराने लगा है, बता दें कि अब तक कई कर्मचारी और विधायक कोरोना के चपेट में आ चुके हैं, ऐसे में मध्यप्रदेश के शीतकालीन विधानसभा सत्र को लेकर असमंजस बरकरार है, इस बीच अब मंत्री मिश्रा का बड़ा बयान सामने आया है।

आज होने वाली सर्वदलीय बैठक अभी तक नहीं बुलाई गई :

बता दें कि मध्यप्रदेश विधानसभा सत्र बुलाने को लेकर सरकार की तरफ से कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है, इस बीच मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का बड़ा बयान सामने आया है, अब सत्र बुलाने को लेकर किए गए सवाल को गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी टाल गए, बताते चलें कि सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए सत्र बुलाने के पहले सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाती है। इसमें सरकार समेत सभी दलों के प्रमुख नेता उपस्थित होते हैं लेकिन अबतक सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाई गई।

नरोत्तम मिश्रा ने ट्वीट कर कहा

मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ट्वीट कर कहा कि विधानसभा के सत्र को लेकर वो लोग सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे हैं जिनके राज में विधानसभा की बैठक के बारे में सुप्रीम कोर्ट को निर्देश देना पड़ा था। कांग्रेस नेता आरोप लगाने से पहले अपने गिरेबान में भी तो झांकें। मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा बोले कि सत्र होगा या नहीं होगा यह तो निर्णय हो जाएगा, लेकिन कांग्रेस तो सवाल करने का भी हक नहीं है।

यह वही कांग्रेस है, जिनके समय सज्जन सिंह वर्मा ने एक दिन में विधानसभा सत्र खत्म कर दिया था, जिसे बुलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट को निर्देश देना पड़ा था।

नरोत्तम मिश्रा ने कहा

अटक सकता है धर्म स्वातंत्र्य बिल

बताते चलें कि अगर विधानसभा सत्र नहीं होता है, तो फिर बिल अटक सकता है। कल मध्यप्रदेश में लव जिहाद के खिलाफ प्रस्तावित बिल के ड्राफ्ट को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई, इसमें आरोपी को 10 साल की सजा और 1 लाख रुपए तक जुर्माना करना है। इसे 28 दिसंबर को होने वाले विधानसभा सत्र में पेश किया जाना है।

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