ग्वालियर : कांग्रेस ने ग्वालियर पूर्व से सतीश सिकरवार को उतारा

ग्वालियर, मध्य प्रदेश : ग्वालियर पूर्व में एक बार फिर 2018 के विधानसभा के प्रत्याशी ही आमने-सामने होंगे, लेकिन इस बार दोनों प्रत्याशियों के चुनाव चिन्ह अलग होंगे।
ग्वालियर : कांग्रेस ने ग्वालियर पूर्व से सतीश सिकरवार को उतारा
कांग्रेस ने ग्वालियर पूर्व से सतीश सिकरवार को उताराSocial Media

ग्वालियर, मध्य प्रदेश। देश के इतिहास में पहली बार किसी प्रदेश में दलबदल करने के कारण 28 सीटों पर उप चुनाव होने जा रहा है। इसलिए इस बार का उप चुनाव प्रदेश एवं लोकतंत्र के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस ने प्रदेश के उपचुनाव के लिए अपनी दूसरी सूची भी रविवार को जारी कर दी। दूसरी सूची में नौ प्रत्याशियों के नाम घोषित किए गए हैं, जबकि पहली सूची में 15 प्रत्याशी कांग्रेस घोषित कर चुकी थी। इस तरह कांग्रेस ने 24 प्रत्याशी अभी तक तय कर दिए हैं, लेकिन अंचल की मुरैना व मेहगांव की सीट पर प्रत्याशी चयन का पेंच फंसा हुआ है।

ग्वालियर जिले की तीन विधानसभा क्षेत्रो में चुनाव होना है जिसमें से ग्वालियर से सुनील शर्मा एवं डबरा से सुरेश राजे को कांग्रेस पहले ही प्रत्याशी घोषित कर चुकी थी। ग्वालियर पूर्व विधानसभा बची थी जिस पर रविवार को भाजपा से कांग्रेस में आए डॉ. सतीश सिकरवार का नाम तय कर दिया गया है। इस तरह ग्वालियर पूर्व में एक बार फिर 2018 के विधानसभा के प्रत्याशी ही आमने-सामने होंगे, लेकिन इस बार दोनों प्रत्याशियों के चुनाव चिन्ह अलग होंगे। 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से मुन्नालाल गोयल व भाजपा से डॉ. सतीश सिकरवार आमने-सामने थे जिसमें मुन्नालाल गोयल करीब 18 हजार वोटो से जीते थे। सिंधिया की कांग्रेस से नाराजगी के बाद जब उन्होंने कांग्रेस को छोड़ा तो मुन्नालाल भी उनके साथ भाजपा में चले गए थे, अब उप चुनाव में वह भाजपा की तरफ से संभावित प्रत्याशी माने जा रहे हैं। भाजपा ने फिलहाल कोई सूची अभी जारी नहीं की है, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि जो लोग कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए थे उन्हीं को टिकट मिलना तय माना जा रहा है।

जोर लगाया पर सर्वे को माना आधार :

उप चुनाव के लिए दावेदारों ने जमकर जोर लगाया साथ ही नेताओं की सिफारिश भी कराई लेकिन काम नहीं आई। इसके पीछे कारण यह था कि कमलनाथ पहले ही कह चुके थे कि उप चुनाव काफी महत्वपूर्ण है इसलिए इस बार सिफारिश का खेल मत खेलो, इस बार सर्वे के आधार पर ही टिकट मिलेगा। यही कारण रहा कि जो दावेदार अन्य नेताओ से सिफारिश के लिए उनके दरवाजे पहुंचे थे तो उन्होंने भी साफ कह दिया था कि इस बार सिफारिश हमारी नहीं चलेगी आगे जो विधानसभा चुनाव होगा उसमें हम सिफारिश कर देंगे। यही कारण रहा कि क्षेत्र से लेकर भोपाल तक दौड़ लगाने के बाद भी कई दावेदार पिछड़ गए ओर जिनको टिकट मिला उनका नाम सर्वे मेे टॉप पर था। जौरा से पूर्व मंत्री लाखन सिंह के भतीजे युकां के राष्ट्रीय सचिव संजय यादव के अलावा जिला पंचायत मुरैना के उपाध्यक्ष मानवेंद्र सिंह (गांधी) भी दावेदारी के दौड़ में थे, लेकिन वहां से पंकज उपाध्याय को टिकट दिया गया है। सुमावली से अजब सिंह कुशवाह को कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया है। सुमावली में डॉ. सिकरवार का भी खासा जनाधार है, क्योंकि उनके पिता एवं भाई उक्त सीट से विधायक रह चुके है जिसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। पोहरी से हरीबल्लभ शुक्ला को मैदान में लाया गया है।

मेहगांव व मुरैना में फंसा पेंच :

कांग्रेस के लिए मेंहगांव व मुरैना विधानसभा से टिकट तय करने में पसीना बहाना पड़ रहा है। मेहगांव में पूर्व मंत्री राकेश चौधरी दावेदार है ओर उनका नाम सर्वे मेें भी आगे है इसलिए कमलनाथ तो चाहते हैं कि राकेश चौधरी को टिकट मिले, लेकिन जिस तरह से उन्होंने विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव के समय कांग्रेस को धोखा दिया था उसके कारण कांग्रेस के कई नेता उनके नाम को लेकर विरोध कर रहे हैं, यही कारण है कि पेंच फंसा हुआ है। मेहगांव से कांग्रेस की तरफ से राहुल भदौरिया भी दावेदारी कर रहे है, लेकिन भाजपा से ओपीएस भदौरियो के आने की संभावना के कारण उनके नाम पीछे रह सकता है जिसके कारण दूसरे गुट ने हेमंत कटारे का नाम आगे कर दिया है। वहीं मुरैना से राकेश मावई टिकट के प्रबल दावेदार है ओर सर्वे में भी आगे है, लेकिन दिग्विजय सिंह चाहते है कि पूर्व विधायक स्व. सोवरन सिंह मावई की पत्नी आशा देवी मावई को टिकट दिया जाएं। राकेश मावई रिस्ते में आशा देवी के भतीजे है। अब दोनो विधानसभा में किसको कांग्रेस उतारती है इसको लेकर अभी इंतजार करना होगा।

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