ग्वालियर व्यापार मेला पर कोरोना का साया

ग्वालियर, मध्य प्रदेश : प्रदेश का प्रगति मैदान कहा जाने वाला ग्वालियर मेला इस बार आयोजित होगा अथवा नहीं, इसे लेकर कुछ भी कहना मुश्किल है।
ग्वालियर व्यापार मेला पर कोरोना का साया
ग्वालियर व्यापार मेला पर कोरोना का सायाRaj Express

ग्वालियर, मध्य प्रदेश। प्रदेश का प्रगति मैदान कहा जाने वाला ग्वालियर मेला इस बार आयोजित होगा अथवा नहीं, इसे लेकर कुछ भी कहना मुश्किल है। ऐसा पहले भी हुआ है कि मेले का आयोजन बिना संचालक मंडल के ही हुआ है, लेकिन ऐसा पहली बार है कि मेले के आयोजन मेें ज्यादा वक्त नहीं हैं और मेला मंडल में फिलहाल सचिव की पदस्थापना नहीं हो सकी है।

कोविड-19 अनलॉक की प्रक्रिया मेें जब सब कुछ खुल रहा है ऐसे में मेले में कारोबार करने वाले व्यापारियों को ग्वालियर व्यापार मेला के आयोजन की भी पूरी उम्मीद है, लेकिन संशय यह है कि नवम्बर समाप्त होने को है और दिसम्बर में लगने वाले मेले के लिए अभी तक आवंटन प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकी है।

चेंबर लिख चुका है सीेएम को पत्र :

व्यापार मेला को वक्त पर लगाये जाने म.प्र. चेम्बर ऑफ कॉॅमर्स ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, एमएसएमई मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर सांसद विवेक नारायण शेजवलकर को पत्र लिखा है। जिसमें कहा गया है कि सिंधिया राजवंश द्वारा शुरू किया गया114 वर्ष पुराना व्यापार मेला के आयोजन को लेकर असमंजस बना हुआ है। एमपीसीसीआई ने पत्र के माध्यम से मांग की है कि एक उचित निर्णय शासन द्वारा शीघ्रातिशीघ्र लिया जाए ताकि हजारों लोगों के रोजगार का साधन ग्वालियर व्यापार मेला अपनी पूर्ण गरिमा के साथ लगाया जा सके।

गतवर्ष हुआ था 11 सौ करोड़ का कारोबार :

दिसंबर माह से प्रारंभ होकर यह फ रवरी माह तक चलता है, जिसके अंदर लगभग 25 सौ छोटे-बड़े कारोबारी भाग लेते हैं और ग्वालियर-चंबल संभाग के साथ-साथ म.प्र. के दूरस्थ क्षेत्रों के लोग इसे देखने आते हैं। गतवर्ष मध्यप्रदेश शासन ने ग्वालियर व्यापार मेला में बिकने वाले वाहनों के रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट दी थी, जिसकी वजह से 1100 करोड़ रूपये का कारोबार व्यापार मेला में हुआ था। वैसे मेले की तैयारियां माह अगस्त से ही प्रारंभ हो जाती हैं क्योंकि मेले में होने वाले कार्यों के लिए टेण्डर आदि होते हैं।

नौ माह से भंग पड़ा है संचालक मंडल :

मार्च 2019 से मेले का संचालक मण्डल भंग पड़ा हुआ है, जिसकी वजह से यह सारे निर्णय नहीं लिए जा पा रहे हैं जबकि हजारों व्यापारियों का रोजगार सिर्फ मेले के ऊपर ही निर्भर रहता है। कोरोना काल में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मेला का आयोजन कठिन जरूर है, लेकिन असंभव नहीं है। बहुत भीड़ होने से बचाव हो सकते हैं।

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